Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Katni News ›   CAG report claims Narmada Tunnel construction scam involving officials and contractors of Rs 39.60 crore

MP: नर्मदा जल परियोजना में बड़ा घोटाला? ‘हादसे की आशंका’ के नाम पर करोड़ों का भुगतान; जानें पूरा मामला

Tue, 24 Feb 2026 07:37 AM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी Published by: कटनी ब्यूरो Updated Tue, 24 Feb 2026 07:37 AM IST
सार

कटनी के स्लीमनाबाद में बरगी डायवर्जन टनल परियोजना में 39.60 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान पर कैग ने गंभीर अनियमितता उजागर की है। अनुबंध में प्रावधान न होने के बावजूद ‘पानी के दबाव’ के नाम पर ठेकेदार को राशि दी गई। पढ़ें। 

CAG report claims Narmada Tunnel construction scam involving officials and contractors of Rs 39.60 crore
नर्मदा टनल पर 39 करोड़ का घोटाला? - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

    कटनी-जबलपुर के बरगी से रीवा तक नर्मदा जल पहुंचाने के लिए स्लीमनाबाद में बनाई जा रही टनल के निर्माण कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताज़ा रिपोर्ट ने प्रदेश के नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने अनुबंध की शर्तों के विपरीत एक निजी कंपनी को 39.60 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, जबकि इस मद में किसी भी अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान नहीं था। यह राशि ‘हादसे की आशंका’ और ‘पानी के दबाव’ का हवाला देकर स्वीकृत की गई।

    बरगी डायवर्जन टनल परियोजना
    बरगी बांध (नर्मदा नदी, मध्य प्रदेश) से जल डायवर्ट कर सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से कटनी जिले की स्लीमनाबाद तहसील में लगभग 12 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर व्यास की भूमिगत सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से की जा रही खुदाई को इंजीनियरिंग की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता है।हालांकि, कैग रिपोर्ट के अनुसार इन तकनीकी चुनौतियों को आधार बनाकर नियमों को दरकिनार किया गया।

    विज्ञापन

    पानी निकासी के नाम पर खेल
    विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) और भू-वैज्ञानिक जांच में पहले ही उल्लेख था कि खुदाई क्षेत्र में जल स्तर ऊंचा है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार, खुदाई के दौरान पानी की निकासी की जिम्मेदारी पूरी तरह ठेकेदार कंपनी की थी और इसके लिए अलग से भुगतान का कोई प्रावधान नहीं था। खुदाई शुरू होने पर भारी जल दबाव सामने आया, जिसे अधिकारियों और ठेकेदार ने ‘अप्रत्याशित घटना’ बताया। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में केवल समय सीमा बढ़ाई जा सकती थी, लेकिन अधिकारियों ने अतिरिक्त भुगतान की अनुमति दे दी।

    विज्ञापन

    पढ़ें: एएसआई सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, भोजशाला 12वीं सदी में बनी और कमाल मौला 1265 ईस्वी में आए

    20.81 करोड़ से बढ़कर 39.60 करोड़
    कैग रिपोर्ट में उल्लेख है कि एनवीडीए की 257वीं बैठक में मुख्य अभियंता (जबलपुर) द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के आधार पर फरवरी 2023 में 20.81 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान को मंजूरी दी गई। बाद में चल रहे खाते (आरए बिल संख्या 338) तक यह राशि बढ़कर 39.60 करोड़ रुपये पहुंच गई। ऑडिट में स्पष्ट किया गया कि अनुबंध में यह शर्त थी कि ‘अप्रत्याशित घटना’ के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार नहीं करेगी। इसके बावजूद सरकारी धन का भुगतान किया गया।

    विभाग का बचाव और कैग की आपत्ति
    विभागीय अधिकारियों ने तर्क दिया कि प्रारंभिक समीक्षा के बाद निविदा (एनआईटी) के कार्यक्षेत्र का पुनर्गठन किया गया था। लेकिन कैग ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि निविदा की शर्तों में केवल अतिरिक्त समय देने का प्रावधान था, धन देने का नहीं

    विज्ञापन

    Followed