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जिम्बाब्वे में तख्तापलट, राष्ट्रपति मुगाबे हिरासत में, सेना ने संभाली कमान

Wed, 15 Nov 2017 05:29 PM IST
हरारे/ एजेंसी
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जिम्बाब्वे में जारी राजनीतिक संकट के बीच सेना ने बुधवार को सत्ता पर कब्जा कर लिया। इसे राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे के 37 साल के शासन का खात्मा माना जा रहा है। हालांकि सेना ने तख्तापलट से इनकार किया है। सत्तारूढ़ पार्टी ने मुगाबे और उनकी पत्नी ग्रेस को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है।
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टीवी पर ऐलान 
सेना के प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविजन पर घोषणा की कि उसने देश में कोई तख्तापलट नहीं किया है। वह केवल राष्ट्रपति मुगाबे के आसपास मौजूद अपराधियों को निशाना बना रही है। बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति और उनका परिवार पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जैसे ही हम अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे, देश में हालात सामान्य हो जाएंगे। प्रवक्ता ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

सड़कों पर सेना
राजधानी हरारे की सड़कों पर मंगलवार रात को सेना के बख्तरबंद वाहन नजर आए। सेना ने संसद, अदालतों और सरकारी इमारतों की ओर जाने वाली सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। मुगाबे के निजी आवास और कुछ अन्य जगहों पर बुधवार तड़के गोलीबारी भी सुनी गई।
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ऐसी स्थिति क्यों आई
उत्तराधिकार की लड़ाई : 93 वर्षीय मुगाबे ने पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति इमरसन मनांगाग्वा को बर्खास्त कर दिया था। ब्रिटेन से देश को स्वतंत्र कराने में शामिल रहे 75 वर्षीय मनांगाग्वा को मुगाबे का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। खराब स्वास्थ्य से परेशान मुगाबे 52 वर्षीय पत्नी ग्रेस को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं।

सेना से टकराव  
सत्तारूढ़ पार्टी जेडएएनयू-पीएफ ने सेना प्रमुख जनरल कॉस्सटंटिनो चिवेंगा पर राष्ट्रपति से विश्वासघात का आरोप लगाया था। सेना प्रमुख ने मुगाबे से वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न करने की अपील की थी। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ग्रेस को मुगाबे का उत्तराधिकारी बनाने का विरोध कर रहे हैं।
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सबसे बुजुर्ग राष्ट्राध्यक्ष

93 वर्षीय मुगाबे दुनिया के सबसे उम्रदराज राष्ट्राध्यक्ष हैं। वह 22 दिसंबर 1987 से जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति हैं। 1924 में जन्मे मुगाबे ने 1970 के दशक में देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सा लिया था। गुरिल्ला युद्ध के चलते उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी। पेशे से अध्यापक रहे मुगाबे 1980 से 1987 तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे थे।

हालिया घटनाक्रम
जुलाई : राबर्ट मुगाबे ने उत्तराधिकार की लड़ाई में हस्तक्षेप को लेकर सैन्य अधिकारियों को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि राजनीति को हमेशा सेना का नेतृत्व करना चाहिए और सेना को राजनीति नहीं करनी चाहिए, अन्यथा यह तख्तापलट होगा।
6 नवंबर : उत्तराधिकार की दौड़ में शामिल उपराष्ट्रपति इमरसन को मुगाबे ने बर्खास्त कर दिया
13 नवंबर : सेना प्रमुख ने कहा कि विरोधियों के खिलाफ मुगाबे के अभियान में वह दखल दे सकते हैं
14 नवंबर : सत्तारूढ़ जेडएएनयू-पीएफ पार्टी ने सेना प्रमुख के बयान की आलोचना की और उनकी टिप्पणी को देशद्रोह का आचरण करार दिया

खुदा ही बर्खास्त कर सकता है
वर्ष 2008 में चुनाव के दौरान मुगाबे ने कहा था कि अगर आप चुनाव हार जाएं और लोग आपको अस्वीकार कर दें तो आपको संन्यास ले लेना चाहिए। हालांकि चुनाव में पर्याप्त वोट नहीं मिलने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें उनके पद से केवल खुदा ही बर्खास्त कर सकता है।

अमेरिका ने नागरिकों को सतर्क किया
जिम्बाब्वे में जारी संकट के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। हरारे स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि देश के हालात को देखते हुए राजदूत ने अपने सभी कर्मचारियों को रात में घर में रहने का निर्देश दिया है।

ब्रिटेन रखे है नजर
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह जिम्बाब्वे के हालात पर नजर रखे हुए है। उसने अपने नागरिकों को घरों में ही रहने को कहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने चिंता जताई
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने जिम्बाब्वे के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने वहां की सरकार और सेना से हालात जल्द से जल्द सामान्य बनाने की अपील की है। 
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