जिम्बाब्वे में जारी राजनीतिक संकट के बीच सेना ने बुधवार को सत्ता पर कब्जा कर लिया। इसे राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे के 37 साल के शासन का खात्मा माना जा रहा है। हालांकि सेना ने तख्तापलट से इनकार किया है। सत्तारूढ़ पार्टी ने मुगाबे और उनकी पत्नी ग्रेस को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है।
टीवी पर ऐलान
सेना के प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविजन पर घोषणा की कि उसने देश में कोई तख्तापलट नहीं किया है। वह केवल राष्ट्रपति मुगाबे के आसपास मौजूद अपराधियों को निशाना बना रही है। बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति और उनका परिवार पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जैसे ही हम अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे, देश में हालात सामान्य हो जाएंगे। प्रवक्ता ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
सड़कों पर सेना
राजधानी हरारे की सड़कों पर मंगलवार रात को सेना के बख्तरबंद वाहन नजर आए। सेना ने संसद, अदालतों और सरकारी इमारतों की ओर जाने वाली सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। मुगाबे के निजी आवास और कुछ अन्य जगहों पर बुधवार तड़के गोलीबारी भी सुनी गई।
ऐसी स्थिति क्यों आई
उत्तराधिकार की लड़ाई : 93 वर्षीय मुगाबे ने पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति इमरसन मनांगाग्वा को बर्खास्त कर दिया था। ब्रिटेन से देश को स्वतंत्र कराने में शामिल रहे 75 वर्षीय मनांगाग्वा को मुगाबे का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। खराब स्वास्थ्य से परेशान मुगाबे 52 वर्षीय पत्नी ग्रेस को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं।
सेना से टकराव
सत्तारूढ़ पार्टी जेडएएनयू-पीएफ ने सेना प्रमुख जनरल कॉस्सटंटिनो चिवेंगा पर राष्ट्रपति से विश्वासघात का आरोप लगाया था। सेना प्रमुख ने मुगाबे से वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न करने की अपील की थी। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ग्रेस को मुगाबे का उत्तराधिकारी बनाने का विरोध कर रहे हैं।