यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अचानक सऊदी अरब पहुंचे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यहां उनकी कई अहम बैठकें होने वाली हैं। हालांकि इस दौरे की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा सहयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।
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ईरानी ड्रोन से निपटने में यूक्रेन देगा मदद
जेलेंस्की ने हाल ही में बताया था कि यूक्रेन पश्चिम एशिया और खाड़ी के पांच देशों, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और जॉर्डन, की मदद कर रहा है। यूक्रेन इन देशों को ड्रोन हमलों से बचने के लिए तकनीक और सिस्टम तैयार करने में सहायता दे रहा है। यूक्रेन ने रूस के साथ युद्ध के दौरान सस्ते और असरदार ड्रोन इंटरसेप्टर विकसित किए हैं, जो अब दुनिया में काफी डिमांड में हैं।
बदले में यूक्रेन को चाहिए एडवांस मिसाइल
इस सहयोग के बदले यूक्रेन खाड़ी देशों से हाई-टेक एयर डिफेंस मिसाइल मांग रहा है। यूक्रेन को इन मिसाइलों की जरूरत रूस के लगातार हो रहे हमलों को रोकने के लिए है।
होर्मुज में भी भूमिका निभा सकता है यूक्रेन
यूक्रेन यह भी देख रहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बहाल करने में कोई भूमिका निभा सकता है या नहीं। यह इलाका तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है और यहां किसी भी तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान की भूमिका
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपनी मुलाकात के बाद एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "यूक्रेन के लिए, यह सिद्धांत का मामला भी है: आतंक को दुनिया में कहीं भी हावी नहीं होना चाहिए। हर जगह पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने यूएई में सुरक्षा स्थिति, ईरान द्वारा किए गए हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी पर चर्चा की, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है।
रूस की 'शैडो फ्लीट' पर यूरोप सख्त
इधर यूरोप के कई देशों ने रूस की शैडो फ्लीट पर कड़ा एक्शन लेने का फैसला किया है। ये पुराने तेल टैंकर होते हैं, जिनसे रूस प्रतिबंधों को चकमा देकर तेल बेचता है और उसी पैसे से युद्ध चलाता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने कहा है कि अब इन जहाजों पर और सख्ती से कार्रवाई होगी और जरूरत पड़ने पर इन्हें रोका या चेक किया जाएगा।
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समुद्र में हमला- टैंकर पर ड्रोन अटैक
तुर्किये के पास एक तेल टैंकर अल्तुरा पर समुद्री ड्रोन से हमला हुआ। इसमें 27 क्रू सदस्य थे, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। यह जहाज रूस के तेल को ले जा रहा था और पहले से ही यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधों में शामिल था। हालांकि यह साफ नहीं है कि इस हमले के पीछे कौन था, लेकिन पहले यूक्रेन ऐसे हमले कर चुका है।
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