कोरोना के अस्तित्व में आए हुए पांच महीने हो चुके हैं लेकिन अभी तक कोरोना की वैक्सीन नहीं बनी है। कोरोना की वैक्सीन जब तक नहीं बन जाती, तबतक स्वास्थ्य जानकार घरेलू उपायों के उपयोग कर कोरोना से बचाव की सलाह दे रहे हैं।
दुनिया में कई डॉक्टर वैक्सीन को तैयार करने में जुटे हैं, इसके लिए कई प्रयोगशालाओं में टेस्टिंग भी हो रही है। कई अध्ययनों की एक समग्र समीक्षा में यह बात सामने आई है कि एक मीटर या उससे ज्यादा की शारीरिक दूरी कोरोना संक्रमण को एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने से बचा सकती है।
इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि शारीरिक दूरी के साथ-साथ मास्क और आंखों की भी सुरक्षा से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। यह अध्ययन लांसेट जर्नल में प्रकाशित की गई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि मौजूदा सबूतों की व्यवस्थित समीक्षा विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कराई गई है।
कनाडा के मैकमास्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और समीक्षा के प्रमुख लेखक होल्गर शूनेमन ने कहा कि शारीरिक दूरी से कोरोना के मामले में कमी आने की संभावना है। शूनेमन डब्ल्यूएचओ के संक्रामक रोगों, अनुसंधान के तरीके और सिफारिशें वाले समन्वय केंद्र के सह निदेशक भी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष सबूत सीमित हैं लेकिन समुदाय में मास्क पहनने से फायदा मिलेगा। एन95 या स्वास्थ्य कर्मियों जो मास्क पहनते हैं, उनका इस्तेमाल दूसरे और सामान्य मास्क की तुलना में ज्यादा सुरक्षा देगा। शोधकर्ताओं ने कहा कि आंखों की सुरक्षा से ज्यादा फायदा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे का सहयोग कर रहे शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के प्रत्यक्ष प्रमाणों और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एसएआरएस) और मिड्ल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस) से संबंधित कोरोना वायरस के अप्रत्यक्ष या जुड़े प्रमाणों पर काम किया है।
शोधकर्ताओं ने कहा है कि इसमें वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने और विभिन्न निजी सुरक्षा की रणनीतियों पर अच्छे से अध्ययन करने की जरूरत है।