दशक भर से युद्ध की मार झेल रहे यमन में हालात अब और बिगड़ते जा रहे हैं। कारण है कि अब दक्षिण के यूएई समर्थित अलगाववादी गुट ने स्वतंत्र देश के लिए नया संविधान जारी कर अलग देश बनाने का दावा किया है। इसके साथ ही अलगाववादी गुट ने बाकी सभी गुटों से इस फैसले को मानने की मांग की है। ऐसे में अब इस कदम से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही यमन युद्ध में शामिल हैं। इतना ही नहीं इस कदम के बाद सऊदी अरब ने यमन पर हवाई हमले भी कर दिए।
अब जब मांग अलगाववादी गुट की है, तो पहले ये समझना आवश्यक है कि आखिर ये अलगाववादी गुट क्या और कौन है। इस गुट का नाम है सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) है और इसे यूएई का समर्थन प्राप्त है। एसटीसी का कहना है कि वह यमन के दक्षिणी हिस्से को अलग देश बनाना चाहता है।
दक्षिण अरब राज्य के लिए अलग संविधान
मामले में विवाद तब ज्यादा बढ़ गया जब शुक्रवार को अलगाववादी संगठन एसटीसी ने घोषणा की कि उसने दक्षिण अरब राज्य के लिए एक नया संविधान बना लिया है। यह वही इलाका है जो 1967 से 1990 तक एक अलग देश हुआ करता था। हालांकि अभी फिलहाल हमें इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि अभी यह साफ नहीं है कि यह फैसला सच में लागू होगा या सिर्फ एक राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
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एसटीसी के नेता ने क्या कहा?
बात अगर इस पूरे मामले में एसटीसी के रुख की करें तो, एसटीसी प्रमुख एडारूस अल-जुबैदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर पूरे मामले में अपना रुख साफ किया। उन्होंने बताया कि नया संविधान दो साल तक लागू रहेगा। इसके बाद जनमत संग्रह (रेफरेंडम) होगा। उन्होंने बताया कि दो साल बाद लोगों से पूछा जाएगा कि वे अलग देश चाहते हैं या नहीं। इन दो वर्षों में उत्तर और दक्षिण यमन के बीच बातचीत होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बाकी गुटों ने यह प्रस्ताव नहीं माना या हमला किया, तो हर विकल्प खुला रहेगा।
पहले ही कब्जा कर चुके हैं कई इलाके
बता दें कि इससे पहले यानी पिछले महीने एसटीसी से जुड़े लड़ाकों ने दक्षिण यमन के दो प्रांतों पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं अदन शहर के राष्ट्रपति भवन पर भी नियंत्रण कर लिया। इसके बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नेता सऊदी अरब की राजधानी रियाद भाग गए।
सऊदी अरब की बमबारी
शुक्रवार को हालात और बिगड़ गए जब सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने दक्षिण यमन के हदरमौत प्रांत में एसटीसी के ठिकानों पर हवाई हमले किए। अलगाववादी गुट का कहना है कि इन हमलों में लोग मारे गए, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। वहीं सऊदी समर्थित बल इन इलाकों को वापस लेना चाहते थे, लेकिन एसटीसी ने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
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सऊदी अरब और यूएई का भी रुख समझिए
सऊदी अरब का कहना है कि उसने कई हफ्तों तक एसटीसी से तनाव कम करने की कोशिश की। एसटीसी ने उसकी बात नहीं मानी और गुट ने सऊदी प्रतिनिधिमंडल को अदन में उतरने तक नहीं दिया। पूरे मामले में सऊदी अरब का आरोप है कि एसटीसी लगातार टकराव बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी ओर यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह हालात को संयम और शांति से संभाल रहा है। उसकी प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता है। वह किसी भी जल्दबाजी में कदम नहीं उठाना चाहता।
पहले से ही यमन पर गरीबी का संकट और अब..
गौरतलब है कि यमन पहले ही दुनिया के सबसे गरीब और संकटग्रस्त देशों में से एक है। अब दक्षिण में अलग देश की घोषणा और सऊदी-यूएई के बीच बढ़ता टकराव युद्ध को और खतरनाक बना सकता है। साथ ही देश के और बंटने का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे बदलती स्थिति के बीच आने वाले दिन यमन के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।
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