चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
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अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चीन दुनिया के किसी देश से बात करने और अपनी तरफ से मदद का भरोसा देने, सहयोग और समर्थन की बात करने से पीछे नहीं हट रहा है। अमेरिका, भारत, पाकिस्तान के अलावा दुनिया के हर मंच पर वह मदद के लिए तैयार खड़ा है। इसी कड़ी में अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दूसरी बार बात की। दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती और परंपरा की याद दिलाते हुए जिनपिंग ने रूस के सामने भी कोविड-19 के संकट से निपटने के लिए अपने मेडिकल किट और सुरक्षा उपकरण खरीदने की पेशकश की।
शी जिनपिंग ने कहा कि जब चीन कोरोना के संकट से जूझ रहा था तो रूस ने उसका पूरा सहयोग किया था। चीन और रूस की सीमाएं नदियों और पहाड़ों से मिली हुई हैं और दोनों देश शुरु से ही एक दूसरे के सहयोगी और दोस्त रहे हैं। रूस इस वक्त कोविड-19 के खतरे से जूझ रहा है और एक पड़ोसी और दोस्त होने के नाते चीन उसकी हर तरह से मदद करने को तैयार है। जिनपिंग ने पुतिन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि उनके नेतृत्व में रूस इस संकट से जल्दी छुटकारा पाएगा। उन्होंने कहा कि पुतिन निजी तौर पर रूस को कोविड-19 से बचाने के लिए कई कारगर कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि चीन की तरफ से भेजे गए मेडिकल एक्सपर्ट्स की टीम मॉस्को में बहुत गंभीरता से काम कर रही है और दोनों नेताओं के बीच लगातार बात हो रही है कि कैसे चीन ने इतनी जल्दी इस संकट से खुद को उबारा और कैसे रूस भी ऐसा कर सकता है। चीन और रूस मिलकर इस संकट से जल्द से जल्द छुटकारा पा सकते हैं।
वैश्विक महामारी पर राजनीति ठीक नहीं
शी जिनपिंग ने कोरोना के राजनीतिकरण और इसके लिए चीन को जिम्मेदार बताने की मुहिम को गलत बताते हुए कहा कि इस वक्त ऐसी कोशिशें कोरोना के खिलाफ चल रही वैश्विक जंग को कमजोर करने वाली हैं। रूस और चीन चाहें तो मिलकर पूरी दुनिया को इस वैश्विक संकट से जल्दी उबार सकते हैं। उन्होंने रूस के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार को बहुत बेहतर बताते हुए कहा कि पहली तिमाही में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.4 फीसदी बढ़ा है और आने वाले वक्त में यह और बढ़ेगा।
पहली तिमाही में चीन के जीडीपी में भारी गिरावट
कोरोना का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। पहली तिमाही में इस महामारी की वजह से चीन की जीडीपी 20.65 ट्रिलियन युआन (2.91 ट्रिलियन डॉलर) दर्ज की गई जो पिछली तिमाही से 6.8 फीसदी कम है। ये आंकड़े नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टटिक्स (एनबीएस) ने शुक्रवार को जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक सेवा क्षेत्र में काम न होने की वजह से ये गिरावट दर्ज की गई है। देश की अर्थव्यवस्था का 60 फीसदी हिस्सा सेवा क्षेत्र का है जिसमें इस तिमाही में 5.2 फीसदी गिरावट आई है।
एनबीएस के मुताबिक महामारी की सुरक्षा को लेकर किए गए उपाय की वजह से हालात अब धीरे धीरे सुधर रहे हैं और रोज़गार के क्षेत्र में भी सुधार नजर आ रहा है।