चीन ने पहली बार पुष्टि की है कि शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत चल रही है। यह बैठक नवंबर में चीन के शेनझेन शहर में हो सकती है। ट्रंप परमाणु हथियारों पर नियंत्रण, जबकि पुतिन यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करना चाहते हैं।
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चीन ने पहली बार पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत चल रही है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को बताया कि तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को लेकर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की जा रही है।
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नवंबर में हो सकती है तीनों नेताओं की ऐतिहासिक मुलाकात
अगर यह बैठक होती है तो इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बड़ी घटना माना जाएगा। संभावना है कि इसी महीने दक्षिणी चीन के शहर शेनझेन में होने वाले क्षेत्रीय आर्थिक सम्मेलन के दौरान तीनों नेता एक साथ नजर आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक बैठक की तारीख या एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
तीनों नेताओं के अपने-अपने एजेंडे
इस संभावित बैठक को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तीनों नेताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परमाणु हथियारों पर नियंत्रण और उनसे जुड़े समझौतों पर चर्चा करना चाहते हैं। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिलचस्पी यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करने में है। खास बात यह है कि पुतिन इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान यूक्रेन को बातचीत की मेज पर शामिल नहीं करना चाहते।
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यूरोप की बढ़ सकती है चिंता
अगर तीनों नेताओं की मुलाकात होती है तो यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ सकती है। इसकी एक बड़ी वजह यूक्रेन युद्ध है। यूरोप इस युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाता रहा है। ऐसे में अगर पुतिन, ट्रंप और शी जिनपिंग आपस में बातचीत करते हैं और यूक्रेन इस चर्चा का हिस्सा नहीं बनता, तो यूरोपीय देशों को यह नागवार गुजर सकता है।
चीन को मिल सकता है बड़ा कूटनीतिक फायदा
इस बैठक को संभव बनाने में चीन की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। तीनों नेताओं को एक मंच पर लाने में सफलता मिलती है तो चीन खुद को वैश्विक राजनीति में एक प्रभावशाली मध्यस्थ के रूप में पेश कर सकेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी कूटनीतिक ताकत और साख दोनों बढ़ सकती हैं। हालांकि, तीनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होने के कारण बैठक का एजेंडा तय करना आसान नहीं होगा।