वैज्ञानिक सूरज को धरती पर लाने का सपना साकार करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यदि सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही इसमें सफलता मिल जाएगी। सिर्फ यही नहीं ऐसा होते ही सूर्य की ऊर्जा दुनियाभर के कई देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी।
दरअसल, सूर्य के समान स्वच्छ ऊर्जा के एक सर्वोत्तम स्रोत के विकास के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रयोग के तहत वैज्ञानिकों और तकनीकविदों ने दक्षिणी फ्रांस में एक परमाणु संलयन उपकरण के विशाल भागों को जोड़ने की शुरुआत कर दी है।
साथ ही सूरज या यूं कहें कि सौर ऊर्जा की प्रतिकृति बनाने की एक बेहद महत्वाकांक्षी यह परियोजना अब अपने नाजुक चरण में प्रवेश कर गई है। नाजुक चरण इस लिहाज से कि इसमें कलपुर्जों को उनकी सही जगह पर ठीक ढंग से व्यवस्थित किया जाना है, ऐसे में एक भी चूक भारी पड़ सकती है।
इस बेहद अहम परियोजना में भारत के अलावा चीन, अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं। परियोजना में शामिल वैश्विक नेताओं ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर या आईटीईआर के नए चरण के शुभारंभ समारोह में आभासी रूप से शिरकत की।
इस परियोजना में योगदान देने वाले 35 देशों में कई जगह कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बावजूद इसका काम आगे बढ़ा है।