श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव 21 सितंबर को होंगे। श्रीलंका के चुनाव आयोग ने इसका एलान किया है। ऐसी चर्चा थी कि श्रीलंका में राष्ट्रपति रानिल विक्रमासिंघे के कार्यकाल को विस्तार देने के लिए राष्ट्रपति चुनाव टाले जा सकते हैं। हालांकि अब श्रीलंका की सरकार ने आदेश जारी कर बताया है कि राष्ट्रपति चुनाव 21 सितंबर को होंगे और 15 अगस्त से नामांकन शुरू हो जाएगा।
आतंकवाद पर पीएम मोदी के सख्त संदेश से तिलमिलाया पाकिस्तान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त संदेश से तिलमिलाए पाकिस्तान ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से वह (भारत) कश्मीरी लोगों की आवाजों को दबा नहीं सकता। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने लद्दाख के द्रास में शुक्रवार को एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को खारिज करते हुए यह बयान दिया। दरअसल पीएम मोदी ने शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में तल्ख लहजे में कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद और छद्म युद्ध का उपयोग करके प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसे सभी आतंकी प्रयासों को पूरी ताकत से कुचल दिया जाएगा। इस पर पाकिस्तान तिलमिला गया है।
पापुआ न्यू गिनी में 26 ग्रामीणों की हत्या, घरों को जला डाला
दक्षिण प्रशांत द्वीप राष्ट्र के ईस्ट सेपिक प्रांत के कार्यवाहक प्रांतीय पुलिस कमांडर जेम्स बाउगेन ने ‘ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्प’ को बताया कि पापुआ न्यू गिनी के दूरदराज के गांव में बेहद ही खौफनाक ढंग से 16 बच्चों समेत 26 लोगों को मार डाला गया। बाउगेन ने कहा, घटना बहुत भयावह थी, जब मैं घटनास्थल पर पहुंचा तो देखा कि वहां बच्चे, पुरुष व महिलाओं की लाशें पड़ी थीं। इन्हें 30 युवकों के एक समूह ने मार डाला।
अमेरिकी कांग्रेस में भारत समर्थित विधेयक पेश
अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने गुरुवार को कांग्रेस में एक विधेयक पेश किया। इसका मकसद प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भारत का सहयोग करने के लिए कानूनी प्रावधान तैयार करना है। अगर यह कानून की शक्ल में आता है तो अमेरिका भारत को जापान, इस्राइल, कोरिया और नाटो सहयोगियों के समान दर्जा देगा। इसमें भारत की क्षेत्रीय अखंडता को भी अक्षुण्ण रखने का प्रस्ताव है। सीनेटर रुबियो ने प्रस्ताव किया है कि अगर पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकवाद प्रायोजित करते पाया जाता है तो उसे मिलने वाली सुरक्षा सहायता को तत्काल रोका जाएगा। रुबियो ने कहा, कम्युनिस्ट चीन भारत-प्रशांत क्षेत्र में अपने क्षेत्र का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है। वह हमारे क्षेत्रीय भागीदारों की संप्रभुता और स्वायत्तता को बाधित करने की फिराक में है। ऐसी दुर्भावनापूर्ण चालों के खिलाफ अमेरिका मजबूती से मुकाबला करेगा।
UN की एजेंसी भारत में अल्पसंख्यकों पर चिंतित
अमेरिकी विदेश विभाग के बाद अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने भारत में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते हुए चिंता जताई है। जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव के अलावा देश के कुछ जिलों में आतंकवाद विरोधी कानून के बहुत ज्यादा इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है। अपने हालिया सत्र में एजेंसी ने भारत के अलावा क्रोएशिया, होंडुरास, मालदीव, माल्टा, सूरीनाम और सीरिया के बारे में अपने निष्कर्ष परिणामों को सामने रखा। इन निष्कर्षों में समिति की मुख्य चिंता और सिफारिशें नागरिक व राजनीतिक अधिकारों के बारे में अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने से संबंधित थीं। भारत के बारे में एजेंसी का आरोप है यहां मुस्लिम, ईसाई और सिखों के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और एलजीबीटीआई लोगों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव होता है।
अधर में है वैध अप्रवासियों के बच्चों का भविष्य, बड़ी संख्या में भारतीय
अमेरिका में वैध अप्रवासियों के बच्चों का भविष्य अधर में है। काफी बड़ी संख्या में ये भारतीय अमेरिकी बच्चे अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आए थे, लेकिन अब खतरा इस बात का है कि उन्हें उस देश में वापस भेजा जा सकता है जहां वे किसी को नहीं जानते। ऐसा इसलिए क्योंकि वे 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वयस्क हो जाएंगे। वैध अप्रवासियों के इन बच्चों की अनुमानित संख्या लगभग 2,50,000 है। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को इस विधायी गतिरोध के लिए रिपब्लिकन खेमे को दोषी ठहराया। 'व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे ने कहा, 'मैंने सीनेट से आए द्विदलीय समझौते के बारे में बात की। जहां हमने तथाकथित प्रलेखित ड्रीमर्स की मदद करने के लिए एक प्रक्रिया पर बातचीत की। दुख की बात है कि रिपब्लिकन ने इसे दो बार खारिज कर दिया। पिछले महीने सीनेट न्यायपालिका उपसमिति के अध्यक्ष सीनेटर एलेक्स पैडीला और प्रतिनिधि डेबोरा रॉस के नेतृत्व में 43 सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने राष्ट्रपति बाइडन से 2,50,000 से अधिक डॉक्यूमेंटेड ड्रीमर्स - दीर्घकालिक वीजा धारकों के बच्चों - की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया था। इस समूह ने कहा था कि बड़ी संथ्या में इन बच्चों को स्व-निर्वासन के लिए मजबूर होना पड़ता है।