अमेरिका के फ्लोरिडा में 70 साल के जेम्स अर्नेस्ट हिचकॉक को जहरीला इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी गई। उसे करीब 50 साल पहले अपने भाई की 13 साल की सौतेली बेटी सिंथिया ड्रिगर्स की हत्या का दोषी पाया गया था। यह घटना जुलाई 1976 की है। उस समय हिचकॉक की उम्र 20 साल थी और वह अपने भाई के घर में रह रहा था। जांच के अनुसार, हिचकॉक ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया। जब लड़की ने अपनी मां को सब बताने की बात कही, तो उसने लड़की का गला घोंट दिया। इसके बाद वह उसे घर के बाहर ले गया और पीट-पीटकर मार डाला। हिचकॉक को 1977 में पहली बार मौत की सजा मिली थी। इसके बाद कई वर्षों तक अपील का दौर चला। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी आखिरी अपील भी खारिज कर दी थी। गुरुवार को हुई यह मौत की सजा इस साल फ्लोरिडा में रिपब्लिकन गवर्नर रॉन डेसेंटिस द्वारा हस्ताक्षरित डेथ वारंट के तहत छठी सजा थी। पिछले साल फ्लोरिडा में रिकॉर्ड 19 लोगों को मौत की सजा दी गई थी।
दक्षिण अफ्रीका: स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास शामिल करने की मांग
दक्षिण अफ्रीका में एक प्रमुख हिंदू संगठन ने सरकार से अपील की है कि भारतीय समुदाय के इतिहास को स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों से नजरअंदाज न किया जाए। संगठन ने कहा कि पाठ्यक्रम में भारतीयों के योगदान को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा के अध्यक्ष राम महाराज ने एक खुले पत्र में कहा कि स्कूल पाठ्यक्रम में भारतीयों के इतिहास को सीमित रूप में दिखाया जा रहा है, जो सही नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह समुदाय के योगदान को कमतर दिखाने जैसा है। महाराज ने कहा कि भारतीय समुदाय भले ही अल्पसंख्यक है, लेकिन उसका इतिहास और योगदान देश के विकास में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में भारतीय इतिहास की सामग्री को बढ़ाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही और संतुलित जानकारी मिल सके। उन्होंने याद दिलाया कि 1860 में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में भारत से लोग दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई।
संगठन ने कहा कि भारतीय समुदाय ने कठिन परिस्थितियों, भेदभाव और संघर्षों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता देकर अपनी पहचान बनाई। यही कारण है कि उनका इतिहास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए। हिंदू संगठन ने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम में संतुलित इतिहास शामिल करने से विभिन्न समुदायों के बीच समझ बढ़ेगी और सामाजिक एकता मजबूत होगी।
बांग्लादेश में 2026 की पहली तिमाही में कार्यस्थल हादसों में भारी बढ़ोतरी
बांग्लादेश में 2026 की पहली तिमाही के दौरान कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं में गंभीर वृद्धि दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में कम से कम 72 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि 573 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है, जिससे कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी (HRSS)' ने यह रिपोर्ट ढाका में आयोजित एक चर्चा कार्यक्रम में प्रस्तुत की, जिसका विषय 'श्रमिक अधिकार ही मानव अधिकार हैं' था। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस से पहले आयोजित किया गया था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस वर्ष की पहली तिमाही में घायल श्रमिकों की संख्या 2025 की समान अवधि (294 घायल) की तुलना में लगभग दोगुनी रही। ये चोटें कार्यस्थल दुर्घटनाओं के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और अन्य हिंसक घटनाओं के कारण हुईं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 168 कार्यस्थल मौतें दर्ज की गई थीं, जिनमें से 19 मौतें पहली तिमाही में और 64 अंतिम तिमाही में हुई थीं।
पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो के दो नए मामले
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत से पोलियो के दो नए मामले सामने आए हैं। इससे इस साल की शुरुआत से अब तक देश में कुल मामलों की संख्या तीन हो गई है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को दी। पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर प्रमुख दैनिक 'डॉन' को बताया कि बान्नू और नॉर्थ वजीरिस्तान में एक-एक मामला सामने आया है। इन मामलों की पुष्टि नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (एनईओसी) ने की है।
अधिकारी ने बताया, 'ये दोनों मामले पोलियो वायरस सर्विलांस नेटवर्क के जरिए सामने आए और इन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएस) की डब्ल्यूएचओ-मान्यता प्राप्त लैब ने कन्फर्म किया है।' इससे पहले इस साल का पहला मामला सिंध प्रांत के सुजावल जिले में सामने आया था। अब कुल मामलों की संख्या तीन हो गई है। दुनिया में अब सिर्फ पाकिस्तान और अफगानिस्तान ही ऐसे देश हैं, जहां अभी भी पोलियो के मामले मिलते हैं।
मार्च में बताया गया था कि करीब 2,33,000 बच्चे पोलियो ड्रॉप्स से वंचित रह गए। इसकी वजह सुरक्षा समस्याएं, कुछ इलाकों में लोगों का विरोध और बर्फ से ढके इलाके थे। इनमें से करीब 1,84,000 बच्चे खैबर पख्तूनख्वा से थे, जबकि लगभग 50,000 बच्चे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में टीकाकरण नहीं पा सके। माता-पिता की ओर से वैक्सीन से इनकार करना भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सिर्फ कराची में ही करीब 31,000 मामलों में लोगों ने वैक्सीन लेने से मना कर दिया, जो पूरे देश के कुल इनकार मामलों का लगभग 58 प्रतिशत है।
'राष्ट्रीय मजदूर दिवस' पर थाईलैंड में कामकाजी ढांचे में बड़ा बदलाव
थाईलैंड सरकार ने शुक्रवार को 'राष्ट्रीय मजदूर दिवस' के मौके पर कामकाजी ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की। तेजी से बदलती भू-राजनीतिक चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के बीच सरकार ने यह फैसला लिया। थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री योडचनन वोंगसावत ने कहा कि देश के कामकाजी लोगों के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं, बाहर की तरफ मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव, और अंदरूनी स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बढ़ती उम्र की आबादी और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) से जुड़ी जरूरतें।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार अब अपनी प्राथमिकताएं बदल रही है। योडचानन ने कहा कि अब देश की सफलता सिर्फ आर्थिक विकास से नहीं मापी जाएगी, बल्कि सरकार 'गुड जॉब इकोनॉमी' बनाने पर ध्यान देगी। इसका मतलब है बेहतर नौकरी, सुरक्षित आमदनी और काम करने वालों की गरिमा को बढ़ाना। उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार एक ऐसा राष्ट्रीय स्किल्स डाटाबेस बना रही है, जिसमें अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम करेंगे। इस सिस्टम से नौकरी देने वालों की जरूरत और कामगारों की क्षमता को सीधे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्टिफिकेट भी दिए जाएंगे, ताकि लोगों को सही और बेहतर वेतन मिल सके।
पाकिस्तान- खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस वाहन पर रॉकेट से हमला
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू शहर में कंगर जान बहादुर इलाके में शुक्रवार को सशस्त्र हमलावरों ने एक पुलिस वाहन को रॉकेट हमले का निशाना बनाया, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई और दो अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, बन्नू के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) यासिर अफरीदी ने बताया कि यह घटना तब हुई, जब फतेह खेल चेकपॉइंट से लौट रहे पुलिसकर्मियों के वाहन को रॉकेट हमले का निशाना बनाया गया। इस हमले में कांस्टेबल (ड्राइवर) रजा अली शाह की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की तबीयत बिगड़ी
जेल में बंद ईरानी नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद जेल से अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बौद्धिक संपदा अधिकारों के मुद्दे पर भारत अमेरिका की प्राथमिकता निगरानी सूची में
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि सभा (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर द्वारा जारी एक विशेष रिपोर्ट में भारत सहित छह देशों को प्राथमिकता निगरानी सूची में रखा गया है। है। इनमें चीन और रूस भी शामिल हैं। इस रिपोर्ट में व्यापारिक साझेदारों द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण और प्रवर्तन की पर्याप्तता और प्रभावशीलता संबंधी मुद्दे शामिल हैं। सूची में वियतनाम को बौद्धिक संपदा संबंधी कृत्य, नीतियां और प्रथाओं वाले सबसे गंभीर देश की सूची में डाला गया है।
अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटेंगे: ग्रीर
इस निगरानी सूची में यूरोपीय संघ (ईयू), तुर्किये और पाकिस्तान सहित 19 देश शामिल हैं। राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा, अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटने के लिए सभी प्रवर्तन साधनों का उपयोग करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने अपने व्यापारिक साझेदारों की बौद्धिक संपदा प्रथाओं की गहन समीक्षा की है और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नवप्रवर्तकों के लिए कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।
भारत दुनिया की चुनौतीपूर्ण अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के मुताबिक, बौद्धिक संपदा के संरक्षण और प्रवर्तन के मामले में भारत दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। स्पेशल 301 रिपोर्ट अन्य देशों में बौद्धिक संपदा संरक्षण प्रथाओं का अमेरिका द्वारा होने वाला मूल्यांकन है। यह 100 से अधिक व्यापारिक भागीदारों का मूल्यांकन करता है।
भगवान बुद्ध के सिद्धांतों से मजबूत हो सकती है राष्ट्रीय एकता: पौडेल
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर कहा कि भगवान बुद्ध के सहिष्णुता और पारस्परिक सद्भावना के मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करके राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जा सकता है। नेपाल ने शुक्रवार को 2570वीं बुद्ध जयंती मनाई। बुद्ध का जन्म लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था।
शुक्रवार को नेपाल में बौद्धों ने पारंपरिक पूजा-अर्चना की और लामा, बौद्ध गुरु चैत्यों, मठों, विहारों पर समारोह आयोजित किए गए। लुम्बिनी, स्वयंभू और बुद्ध जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों पर इस दिन के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर राष्ट्रपति पौडेल ने कहा- धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच सहिष्णुता और पारस्परिक सद्भावना बनाए रखकर, अहिंसा-शांति के प्रवर्तक भगवान बुद्ध के संदेशों और मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करते हुए राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत किया जा सकता है। पीएम बालेंद्र शाह ने कहा, बुद्ध के जन्म से धन्य नेपाल हमेशा से अहिंसा-शांति का समर्थक रहा है। उन्होंने बुद्ध का मार्ग ज्ञान की खोज के जरिये दुख खत्म करने का रास्ता बताया। मालूम हो कि भगवान बुद्ध की जयंती शुक्रवार को दुनिया भर में धूमधाम से मनाई गई ौर लोगों ने बुद्ध के सिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
दक्षिण अफ्रीका: किताबों में भारतीय इतिहास को शामिल करने का आग्रह
दक्षिण अफ्रीका के एक प्रमुख हिंदू संगठन ने आग्रह किया है कि वे देश में भारतीयों के इतिहास को मिटाने का प्रयास न करें और वर्तमान में संशोधित की जा रही स्कूली पाठ्यपुस्तकों में समुदाय के योगदान को दर्शाने के प्रयास करें। एक खुले पत्र में, दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा (एसएएचडीएस) के अध्यक्ष राम महाराज ने कहा, भले ही भारतीय समुदाय अल्पसंख्यक है, लेकिन उनके इतिहास को पाठ्यक्रम में पर्याप्त रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
महाराज ने कहा, 1981 में ही, एसएएचडीएस ने डरबन में अपने पहले राष्ट्रीय हिंदू सम्मेलन में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास को पर्याप्त रूप से शामिल करने की मांग की गई थी। वह बोले, दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के इतिहास को इतिहास की किताबों से मिटाया नहीं जा सकता और न ही मिटाया जाना चाहिए। हम मांग करते हैं कि सभी कक्षाओं में भारतीयों के इतिहास की वर्तमान सामग्री को कम से कम दोगुना किया जाए, क्योंकि अल्पसंख्यक मायने रखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1860 में बंधुआ मजदूरों के रूप में आने के बाद से भारतीयों ने दक्षिण अफ्रीका में आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में योगदान दिया है। एजेंसी
रंगभेद में भारतीयों की भूमिका को मिले मान्यता
हिंदू नेता ने कहा, भारतीयों ने दूरदृष्टि और मिशन की भावना के साथ कम संसाधनों में अधिक काम करके प्रगति की है। साथ ही रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में भारतीयों की भूमिका को भी सही तरीके से दिखाया जाना चाहिए, जिससे नेल्सन मंडेला देश के पहले लोकतांत्रिक राष्ट्रपति बने।