अमेरिका की अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत देते हुए फैसला सुनाया है कि सरकार प्रवासियों को बिना जमानत के हिरासत में रख सकती है। यह फैसला 8वीं सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने दिया, जिसने पहले के निचली अदालत के आदेश को पलट दिया। पहले कहा गया था कि बिना दस्तावेजों के पकड़े गए लोगों को जमानत सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए।
यह मामला मेक्सिको के नागरिक जोकिन हेरेरा एविला से जुड़ा था, जिन्हें 2025 में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने जमानत की मांग की थी, लेकिन अब अदालत ने कहा कि कानून के तहत सरकार उन्हें हिरासत में रख सकती है। यह दूसरा बड़ा फैसला है जो ट्रंप प्रशासन के सख्त इमिग्रेशन रुख के पक्ष में गया है। अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने इसे बड़ी जीत बताया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे हजारों लोगों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। यह मामला अब अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
एयर कनाडा CEO पर विवाद, फ्रेंच न बोल पाने पर मांगी माफी
कनाडा की बड़ी एयरलाइन एयर कनाडा के सीईओ माइकल रूसो को एक गंभीर विमान हादसे के बाद फ्रेंच भाषा में बात न कर पाने को लेकर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। न्यूयॉर्क में हुए इस हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई थी, जिनमें से एक क्यूबेक का फ्रेंच भाषी था। इसके बाद सीईओ ने एक शोक संदेश जारी किया, लेकिन वह पूरी तरह अंग्रेज़ी में था, जिसमें केवल “शुभ प्रभात” और “धन्यवाद” जैसे दो फ्रेंच शब्द ही शामिल थे।
इस पर क्यूबेक के नेताओं और आम लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इसे संवेदनशीलता की कमी बताया और कहा कि देश की दोनों आधिकारिक भाषाओं का सम्मान जरूरी है। क्यूबेक के प्रीमियर ने तो सीईओ से इस्तीफा तक मांग लिया। अब माइकल रूसो ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें दुख है कि उनकी भाषा की कमी की वजह से हादसे से ध्यान हट गया। उन्होंने स्वीकार किया कि कई वर्षों से कोशिश करने के बावजूद वे अभी भी फ्रेंच में सही तरीके से बात नहीं कर पाते हैं, लेकिन वे सीखने की कोशिश जारी रखेंगे। यह मामला इसलिए भी बड़ा बन गया क्योंकि एयर कनाडा का मुख्यालय क्यूबेक में है, जहां लगभग 80% लोग फ्रेंच बोलते हैं। इससे पहले भी माइकल रूसो को इसी मुद्दे पर आलोचना झेलनी पड़ी थी।
अमेरिका में एयरफोर्स बेस के बाहर विस्फोटक मामला, भाई-बहन पर आरोप
अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित मैकडिल एयरफोर्स बेस के बाहर विस्फोटक मिलने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में भाई-बहन एलन झेंग और एन मैरी झेंग के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। एफबीआई के अनुसार, 20 साल का एलन झेंग चीन भाग गया है, जबकि उसकी बहन को हिरासत में लिया गया है। एलन पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, खतरनाक विस्फोटक बनाने और बिना रजिस्ट्रेशन के हथियार रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं उसकी बहन पर सबूत छिपाने और मदद करने का आरोप है।
यह घटना 16 मार्च को सामने आई थी जब एयरफोर्स बेस के बाहर एक संदिग्ध पैकेट मिला। इसके बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। यह बेस बेहद संवेदनशील है क्योंकि यहां से अमेरिका की मध्य-पूर्व और एशिया में सैन्य गतिविधियां संचालित होती हैं। इस घटना के बाद एक अन्य व्यक्ति को भी धमकी भरे फोन कॉल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, हालांकि उसका इस विस्फोटक से कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है। ईरान युद्ध के चलते पहले से ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी, ऐसे में इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
स्पेन में 25 साल की महिला ने ली इच्छामृत्यु, देशभर में बहस तेज
स्पेन में 25 साल की नोएलिया कास्टिलो का इच्छामृत्यु लेना पूरे देश में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। नोएलिया कैस्टिलो ने लंबे कानूनी संघर्ष के बाद यह अधिकार हासिल किया और बार्सिलोना में उन्हें जीवन समाप्त करने की अनुमति दी गई। कास्टिलो पिछले कई वर्षों से मानसिक बीमारी और गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रही थीं। एक आत्महत्या के प्रयास के बाद वे व्हीलचेयर पर आ गई थीं। उन्होंने 2024 में इच्छामृत्यु के लिए आवेदन किया, जिसे मेडिकल बोर्ड ने मंजूरी दे दी थी।
हालांकि, उनके परिवार ने इस फैसले का विरोध किया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। कई अपीलों के बाद स्पेन की सुप्रीम कोर्ट ने कास्टिलो के पक्ष में फैसला सुनाया। मौत से एक दिन पहले उन्होंने कहा कि वे अब और दर्द सहन नहीं कर सकतीं और शांति चाहती हैं। वहीं, उनके परिवार का कहना है कि सरकार ने उनकी बेटी को बचाने में नाकामी दिखाई। स्पेन में 2021 से इच्छामृत्यु कानूनी है, लेकिन यह मामला इसलिए खास बन गया क्योंकि इसमें एक युवा महिला और पारिवारिक विरोध शामिल था। इससे पूरे देश में कानून और नैतिकता पर नई बहस शुरू हो गई है।
कांगो में बढ़ता संघर्ष, UN ने दी बड़े खतरे की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीकी देश कांगो के पूर्वी हिस्से में बढ़ते संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। यूएन की अधिकारी विवियन वैन डे पेरे ने कहा कि अब इस लड़ाई में भारी हथियारों और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों के लिए खतरा और बढ़ गया है। कांगो के इस इलाके में कई वर्षों से हिंसा चल रही है, जहां सरकारी सेना और M23 जैसे विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष होता रहता है। हाल के महीनों में यह लड़ाई और तेज हो गई है और अब नए इलाकों तक फैल रही है।
यूएन ने बताया कि ड्रोन और भारी हथियारों का इस्तेमाल शहरों में हो रहा है, जिससे नागरिकों और जरूरी ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा विद्रोही समूह अपने कब्जे वाले इलाकों में समानांतर शासन भी चला रहे हैं, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं। हाल ही में अमेरिका, कांगो और रवांडा के बीच बातचीत हुई है, जिसमें तनाव कम करने की कोशिश की गई। यूएन ने सभी पक्षों से युद्धविराम लागू करने और शांति प्रक्रिया का पालन करने की अपील की है।
पाकिस्तान के पंजाब से 33,000 से अधिक अफगानी निर्वासित
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से पिछले साल शुरू हुए अभियान के तहत अब तक 33,000 से अधिक अफगान नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है। आईजीपी अब्दुल करीम के अनुसार, निर्वासितों में 13,760 बच्चों के अलावा रेजिडेंस प्रूफ और अफगान सिटीजन कार्ड धारक भी शामिल हैं। पुलिस शहरी इलाकों में अफगानियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। अवैध प्रवासियों को शरण या नौकरी देने वाले मकान मालिकों और व्यापारियों की भी जांच की जा रही है।
रूसी तेल रिफाइनरी पर यूक्रेनी हमला, निर्यात क्षमता 40% घटी
यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता 40% तक घट गई है। हालिया हमले में लेनिनग्राद क्षेत्र के किरीशी जिले में स्थित रूस की एक सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा है। गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज्डेंको के अनुसार, इस क्षेत्र में 20 से अधिक ड्रोन मार गिराए गए। किरीशी रिफाइनरी रूस के कुल तेल शोधन का 6.6% हिस्सा संभालती है। इसके अलावा, बाल्टिक सागर स्थित प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा बंदरगाहों पर भी कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी गई है। बुधवार को उस्त-लुगा में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई थी।
वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति मादुरो न्यूयॉर्क की अदालत में हुए पेश
वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस गुरुवार को न्यूयॉर्क की अदालत में पेश हुए। मादुरो ड्रग तस्करी के आरोपों को खारिज करने की मांग कर रहे हैं। उनके वकील का तर्क है कि अमेरिकी सरकार ने वेनेजुएला के फंड को कानूनी खर्च के लिए इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह उनके सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मादुरों पर और अधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
ट्रंप के हस्ताक्षर अब डॉलर पर
अमेरिका में इस साल आजादी के 250 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस खास मौके पर बड़ा फैसला लिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर अब अमेरिकी डॉलर नोटों पर दिखाई देंगे। यह पहली बार होगा जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के साइन करेंसी पर होंगे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने यह कदम उठाया है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ट्रंप के नेतृत्व और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए लिया गया है। इससे पहले ट्रंप की तस्वीर वाला 24 कैरेट सोने का सिक्का भी जारी करने की मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार का दावा है कि यह कदम अमेरिका की आर्थिक मजबूती और पहचान को और मजबूत करेगा।
अमेरिका में कॉल सेंटर वापस लाने की तैयारी
अमेरिका की संघीय संचार आयोग ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसमें कहा गया है कि कंपनियों को अपने कॉल सेंटर विदेशों से हटाकर फिर से अमेरिका में लाना चाहिए। आयोग का मानना है कि इससे ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलेगी और डेटा सुरक्षा भी बढ़ेगी। प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि कॉल सेंटर कर्मचारियों को अच्छी अंग्रेजी आनी चाहिए। साथ ही, कंपनियों को यह बताना होगा कि उनका कॉल सेंटर किस देश में है। गौरतलब है कि अभी कई अमेरिकी कंपनियां भारत, फिलीपींस जैसे देशों में कॉल सेंटर चलाती हैं क्योंकि वहां खर्च कम होता है। अगर यह नियम लागू होता है तो कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है।
अमेरिका में मेडिकल कॉलेजों की जांच शुरू
अमेरिका में अमेरिकी न्याय विभाग ने तीन बड़े मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें स्टैनफोर्ड, ओहायो स्टेट और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया शामिल हैं। जांच इस बात को लेकर हो रही है कि एडमिशन में कहीं नस्ल (रेस) के आधार पर भेदभाव तो नहीं हो रहा। यह कदम डोनाल्ड ट्रंप सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी एडमिशन में ‘अफर्मेटिव एक्शन’ को खत्म कर दिया था। कॉलेजों ने कहा है कि वे सभी नियमों का पालन करते हैं और जांच में सहयोग करेंगे।
भारत को वापस मिलेंगी प्राचीन मूर्तियां
अमेरिका के मशहूर स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन ने भारत को तीन प्राचीन मूर्तियां लौटाने का फैसला किया है। ये मूर्तियां तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हुई थीं। इनमें भगवान शिव नटराज की 9वीं सदी की मूर्ति, शिव-उमा की मूर्ति और संत सुंदरर की प्रतिमा शामिल है। जांच में पता चला कि ये मूर्तियां अवैध तरीके से बाहर ले जाई गई थीं। भारत सरकार और अमेरिकी म्यूजियम के बीच समझौते के बाद अब इन्हें वापस भेजा जाएगा। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया में अतिरिक्त 10 हजार सैनिकों की तैनाती कर सकता है अमेरिका
इस्राइली मीडिया यरूशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अतिरिक्त 10 हजार सैनिकों की तैनाती करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तैनाती में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के अलावा पैदल सेना और बख्तरबंद वाहनों को शामिल किया जा सकता है। एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती को ईरान के खर्ग द्वीप पर हमले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि ये साफ नहीं है कि अन्य सैनिकों की कहां तैनाती की जाएगी। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की डेडलाइन 6 अप्रैल तक टाल दी है।
एआई कंपनी एंथ्रोपिक को बड़ी राहत
एआई कंपनी एंथ्रोपिक के पक्ष में फैसला देते हुए एक संघीय न्यायाधीश ने पेंटागन को कंपनी को 'सप्लाई चेन जोखिम' करार देने से अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश रीटा लिन ने गुरुवार को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्देश पर भी रोक लगाई जाए, जिसमें सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक के उत्पादों के उपयोग से मना किया गया था।
यह फैसला सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में मंगलवार को हुई 90 मिनट की सुनवाई के बाद आया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि रक्षा अनुबंध पर बातचीत विफल होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने एंथ्रोपिक को अचानक सप्लाई चेन जोखिम क्यों घोषित किया?
मामला उस समय बिगड़ा जब एंथ्रोपिक ने अपनी एआई तकनीक के इस्तेमाल को पूरी तरह स्वायत्त हथियारों या अमेरिकी नागरिकों की निगरानी में इस्तेमाल होने से रोकने की कोशिश की। एंथ्रोपिक, जो चैटबॉट क्लाउड बनाती है, ने अदालत से आपात आदेश की मांग की थी। कंपनी का आरोप है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन की गैरकानूनी प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का हिस्सा था, जिसके चलते उसने इस महीने की शुरुआत में सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया।
एंथ्रोपिक ने इस मामले से जुड़ा एक अलग और सीमित दायरे का मुकदमा भी वॉशिंगटन डीसी की अपीलीय अदालत में दायर किया है, जिस पर अभी सुनवाई जारी है। अदालत ने यह भी कहा कि उसका आदेश एक सप्ताह के लिए स्थगित रहेगा और इससे पेंटागन को एंथ्रोपिक के उत्पादों का उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है, न ही उसे अन्य एआई कंपनियों की ओर रुख करने से रोका गया है।