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दुनिया का सबसे ठंडा स्कूल : यहां माइनस 51 डिग्री ठंड में पढ़ने जाते हैं बच्चे

Tue, 15 Dec 2020 12:59 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हमारे यहां ठंड बढ़ते ही सबसे पहले स्कूल बंद कर दिए जाते हैं। आमतौर पर भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में एक-एक महीने के लिए स्कूल बंद हो जाते हैं। वहीं रूस के ओएमयाकोन शहर में माइनस 51 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी स्कूल खुल रहा है। इतना ही सबसे बड़ी बात यह है कि यहां हड्डियां कंपा देने वाली ठंड के बावजूद छोटे-छोटे बच्चे कक्षा में पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं। यह स्कूल 11 साल या उससे कम उम्र के विद्यार्थियों के लिए तभी बंद होता है, जब तापमान माइनस 52 डिग्री या उससे कम हो जाता है।

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यह है गांव का इतिहास 
यह सरकारी स्कूल 83 साल पुराना है, जो साइबेरिया के गांव में स्थित है। इस स्कूल को 1932 में स्टालिन के राज में बनवाया गया था। यहां खारा तुमूल और बेरेग युर्डे गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। ओएमयाकोन की आबादी करीब 2500 है। यहां पोस्ट ऑफिस और बैंक जैसी कुछ बहुत बुनियादी सुविधाएं ही मौजूद हैं। 

तबीयत खराब होने पर तुरंत की जाती है जांच 
इस बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण जगह पर भी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है। महामारी के बावजूद भी यहां स्कूल खुल रहा है। हालांकि, संक्रमण के बचाव के लिए बच्चों के साथ पैरेंट्स और स्टाफ को भी स्कूल में घुसने से पहले तापमान जांच कराना होता है। किसी भी छात्र या स्टाफ की तबीयत खराब होने पर तत्काल उसकी कोविड जांच कराई जाती है।

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फोटो क्लिक करते वक्त जम जाती है अंगुलियां 

रूस के इस दूर दराज गांव ओएमयाकोन के लोकल फोटोग्राफर सेम्योन बताते हैं कि 8 दिसंबर को यहां फोटो शूट कर रहा था। तब यहां का तापमान माइनस 50 डिग्री था। काम के दौरान मैंने ग्लव्स पहने थे। अगर उन्हें नहीं पहनता, तो मेरी अंगुलियां पूरी तरह से जम जाती और मुझे फ्रॉस्टबाइटिंग की समस्या हो सकती थी, जो अत्यधिक ठंड के चलते अंगुलियों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

हाइपोथर्मिया का बना रहता है खतरा 
इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां के बच्चे कितनी चुनौतियों का सामना करते हुए स्कूल जाते हैं। वे कभी-कभी अपने माता-पिता के साथ होते हैं, तो कभी-कभी वे अपने पालतू कुत्तों को साथ ले जाते हैं। माइनस 50 डिग्री तापमान पर हाइपोथर्मिया होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। 

बेहद चुनौतीपूर्ण जीवन जी रहे गांव वाले 
हाइपोथर्मिया एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शरीर का तापमान बहुत तेजी से गिरने लगता है।इससे हाई ब्लडप्रेशर, दिल की धड़कन का तेज होना और कुछ केसों में मौत भी हो सकती है। इस तापमान पर डॉक्टर्स लंबी-गहरी सांस लेने के लिए भी मना करते हैं क्योंकि इस तापमान पर सिर्फ सांस लेना भी तकलीफदेह हो सकता है। ठंडी हवा फेफड़ों में भर जाने का खतरा भी होता है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इस क्षेत्र में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि सामान्य जनजीवन भी काफी चुनौतीपूर्ण है।
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