संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्य देशों ने दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने का वादा किया है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन ने इस साल परमाणु संधि पर होने वाली समीक्षा बैठक से ठीक पहले यह अहम साझा बयान जारी किया है। इन देशों ने कहा, "हमारा यह मजबूत विश्वास है कि ऐसे हथियारों को प्रसारित होने से अब रोकना होगा। एक परमाणु युद्ध कभी भी जीता नहीं जा सकता और ऐसा युद्ध कभी नहीं होना चाहिए।"
मजेदार बात यह है कि बाकी देशों में परमाणु हथियार के प्रसार को रोकने की बात कहने वाले इन पांचों देशों के पास खुद ही एटम बम का एक बड़ा जखीरा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास कुल मिलाकर 13 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। जहां रूस के पास इस वक्त सबसे ज्यादा 6375 परमाणु हथियार हैं, तो वहीं अमेरिका के पास 5800 एटम बम हैं। इसके बाद तीसरा नंबर चीन का है, जिसके पास 320 न्यूक्लियर वेपन्स हैं। फ्रांस (290) और ब्रिटेन (215) इस लिस्ट में चौथे और पांचवें नंबर पर हैं।
इन पांच देशों की तरफ से यह बयान परमाणु हथियार की अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty) की समीक्षा बैठक के दौरान जारी हुआ। यह संधि 1970 में लागू हुई थी। बयान को इस लिहाज से भी अहम माना जा रहा है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस-चीन से कई मुद्दों पर विवाद होने के बावजूद साथ आकर एनपीटी पर बात की। इन देशों की तरफ से कहा गया कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे परमाणु हथियार से संपन्न देशों के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों को कम करें।
व्हाइट हाउस की तरफ से पांचों देशों का जो साझा बयान सामने आया है, उसमें कहा गया, "परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के कई दूरगामी दुष्परिणाण हैं। इसलिए ऐसे हथियार जब तक दुनिया में मौजूद हैं, इन्हें सिर्फ बचाव के लिए या आक्रामकता और युद्ध को रोकने के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साझा बयान में कहा गया कि पांचों देश परमाणु हथियारों के अवैध और अनपेक्षित इस्तेमाल को रोकने की मंशा रखते हैं।