दक्षिण कोरिया के मध्य शहर डेजॉन में एक ऑटो पार्ट्स के कारखाने के जले हुए मलबे से 10 शव बरामद किए गए हैं। बचाव कर्मियों ने यह जानकारी साझा की। कारखाने में एक विस्फोट के कारण लगी आग में कम से कम 59 अन्य लोग घायल हो गए और चार लापता हो गए।
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गृह एवं सुरक्षा मंत्रालय ने बताया कि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, लेकिन अधिकारियों ने तुरंत यह पुष्टि नहीं की कि किसी की हालत जानलेवा है या नहीं। शुक्रवार दोपहर आग लगने के बाद आग पर काबू पाने और बचाव अभियान चलाने के लिए 500 से अधिक दमकलकर्मी, पुलिस और आपातकालीन कर्मियों को तैनात किया गया था।
अफगानिस्तान से आतंकवादियों को सुरक्षा को खतरे में डालने की अनुमति नहीं देंगे: असीम मुनीर
पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान से आतंकवादियों को शांति को बिगाड़ने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने की अनुमति नहीं देगा। मुनीर ने अफगानिस्तान की सीमा सटे कुर्रम का दौरा किया, ताकि ईद-उल-फितर की छुट्टियों में सैनिकों और अधिकारियों के साथ समय बिता सकें। वहां उन्होंने ईद की नमाज अदा की। सेना ने एक बयान में यह जानकारी दी।
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शंघाई में भारतीय वाणिज्य दूतावास में सौ से अधिक लोगों को दिखाई गई फिल्म
शंघाई में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र में 100 से अधिक लोगों ने एक लोकप्रिय हिंदी फिल्म की विशेष प्रस्तुति देखी, जिसमें फिल्म की लोगों के बीच पुल बनाने की क्षमता को दिखाया गया। इसमें राजनयिक मिशन के सदस्य और भारत के मित्र शामिल थे।
जोया अख्तर निर्देशित 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' शुक्रवार को मेहमानों को दिखाई गई। इस दौरान वाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने कहा, भारत की फिल्में चीन में भारत की सॉफ्ट पावर का मजबूत प्रतीक बनी हैं। शंघाई वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि माथुर ने लोगों के बीच पुल बनाने में भारतीय सिनेमा की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म के अटूट दोस्ती, सार्थक रोमांच और जीवन को पूरी तरह जीने का संदेश जैसे शाश्वत विषय आज भी बेहद प्रासंगिक है। माथुर ने कहा कि यह भारत की सिनेमाई जादू का आदर्श जश्न है, जो लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाता है और अगली पीढ़ी को हर अवसर को अपनाने की प्रेरणा देता है।
पनामा नहर में बढ़ी एलएनजी टैंकर संचालकों की मांग
एक तरफ जहां होर्मुज स्ट्रेट में छिड़ी लड़ाई के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है वहीं पनामा नहर अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही है। इसे वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। यहां प्रतिदिन 36 से 38 जहाज गुजर रहे हैं। जलमार्ग प्रमुख रिकार्टे वास्केज ने कहा, ईरान के विरुद्ध युद्ध के चलते द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर संचालकों की मांग बढ़ रही है। अमेरिकी बंदरगाहों पर माल लोड करने वाले जहाजों की मांग विशेष रूप से अधिक है। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों को दुनिया के सबसे बड़े जलमार्ग, स्वेज नहर तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है या वे इससे बच रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ता देशों को अमेरिकी एलएनजी वितरित करने के लिए पनामा को तेजी से एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। यह मार्ग काफी कारगर भी है।
वैश्विक ऊर्जा संकट : सड़क परिवहन पर लगाम ही इस समय प्रमुख उपाय
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर आए गंभीर संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने स्पष्ट किया है कि इस स्थिति से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका सड़क परिवहन में ईंधन खपत को कम करना है।
एजेंसी के मुताबिक, वैश्विक तेल मांग का सबसे बड़ा हिस्सा सड़क परिवहन से आता है, ऐसे में ड्राइविंग कम करना, स्पीड घटाना और सार्वजनिक परिवहन अपनाना तत्काल राहत दे सकता है। इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और गैस आधारित कुकिंग से दूरी बनाकर वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने जैसे कदम भी कीमतों पर दबाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आईईए के अनुसार, वैश्विक तेल मांग का लगभग 45% हिस्सा सड़क परिवहन से आता है, जिससे यह क्षेत्र संकट के समाधान में सबसे अहम बन जाता है। एजेंसी ने सुझाव दिया है कि स्पीड लिमिट कम करना, निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करना, कारपूलिंग को बढ़ावा देना और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करना ईंधन खपत को तेजी से घटा सकता है।
होर्मुज बंद होने से 20 फीसदी तेल और एलएनजी की आपूर्ति बाधित
अमेरिका-इस्राइल के साझा हमलों के कारण ईरान के तट से सटे होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से दुनिया की 20% तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति रुक गई है।
पश्चिम एशिया में ऊर्जा बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे कई गैस क्षेत्रों, तेल रिफाइनरियों और टर्मिनलों को नुकसान पहुंचा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इनकी मरम्मत में वर्षों लगेंगे। इन सब कारणों से जो स्थिति उपजी है, उसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इतिहास का सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकट बताया है। यह संकट 1973 के अरब तेल प्रतिबंध से भी कहीं अधिक गंभीर है, जिसने ईंधन की कमी और व्यापक आर्थिक क्षति को जन्म दिया था।