उत्तर-पश्चिम लंदन के हैरो में होली मना रहे हिंदू समुदाय पर उपद्रवियों ने हमला किया है। कुछ लोगों ने लाउडस्पीकर तोड़े और लोगों पर हमला किया। ब्रिटिश सरकार ने घटना की कड़ी निंदा की है। सांसद बॉब ब्लैकमैन ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए बताया कि उपद्रवियों ने लाउडस्पीकर तोड़कर उत्सव में खलल डाला। इस पर लीडर ऑफ द कॉमन्स एलन कैंपबेल ने दुख जताते हुए कहा कि धार्मिक घृणा किसी भी रूप में घृणित है और हमारे समाज में इसका कोई स्थान नहीं है। एक किशोर को गिरफ्तार किया गया है।
कनाडा में एक और विपक्षी सांसद लोरी इडलाउट ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी में शामिल होकर विपक्षी सदस्यों की संख्या कम कर दी है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कार्नी की पार्टी जल्द ही बहुमत सरकार बना सकती है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के अंतरिम नेता डॉन डेविस ने कहा कि उन्हें इडलाउट के लिबरल्स में शामिल होने पर बहुत निराशा हुई।
लिबरल पार्टी को फायदा
इस कदम से लिबरल्स 170 सांसदों तक पहुँच गए हैं। उन्हें बहुमत सरकार बनाने के लिए 172 सांसदों की जरूरत है। बहुमत मिलते ही पार्टी किसी भी बिल को विपक्षी समर्थन के बिना पास करा सकती है। पिछले कुछ महीनों में तीन कंजर्वेटिव सांसद भी लिबरल पार्टी में शामिल हो चुके हैं, क्रिस डी'एंट्रीमोंट, माइकल मा और मैट जेनेरॉक्स। जेनेरॉक्स ने कहा कि कार्नी का डावोस में दिया गया भाषण उनके फैसले को प्रभावित करने वाला था, जिसमें कार्नी ने बड़े देशों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव का विरोध किया।
आगामी चुनाव और रणनीति
कार्नी ने तीन सीटों पर विशेष चुनाव कराने का फैसला किया है। अगर लिबरल्स में से दो सीटें जीतते हैं, तो पार्टी को बहुमत मिल जाएगा। इन सीटों में स्कारबोरो साउथवेस्ट, यूनिवर्सिटी-रोजडेल (टोरंटो क्षेत्र) और टेरेबॉर्न (मॉन्ट्रियल क्षेत्र) शामिल हैं।
नेटवर्क कंटेजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) की एक हालिया रिपोर्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी बयानबाजी और नफरत भरे कंटेंट में तेज बढ़ोतरी का खुलासा हुआ है। द फ्री प्रेस के संपादकीय सहयोगी टान्नर नाउ ने अपने लेख में एनसीआरआई रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि लक्षित पोस्ट और समन्वित अभियान इस नफरती ऑनलाइन बयानबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत विरोधी बातचीत में 2025 में काफ़ी बढ़ोतरी हुई, जो 2024 के मुकाबले लगभग तीन गुना हो गई और इसे 30 करोड़ से अधिक व्यूज मिले।
एनसीआरआई ने लगभग 24,000 ऐसे पोस्ट चिन्हित किए जिनमें भारत विरोधी सामग्री थी। यह बढ़ती नफरत मुख्य रूप से अप्रवासन, राष्ट्रीय पहचान और वीजा नीतियों पर चल रही बहस से जुड़ी हुई है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि यह बढ़ोतरी आम लोगों की भागीदारी से नहीं बल्कि कुछ बेहद सक्रिय अकाउंट्स के कारण हुई। केवल तीन सबसे सक्रिय अकाउंट्स ने ही 525 पोस्ट किए, जो सभी भारत विरोधी पोस्टों के 10 फीसदी लाइक्स और 20 फीसदी रीपोस्ट के लिए जिम्मेदार थे।रिपोर्ट में बताया गया कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं खास तौर पर एच-1बी वर्क वीजा नीति में बदलाव के बाद बढ़ीं।