मध्य गाजा में ड्रोन हमले में तीन फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब हमास गाजा की सत्ता एक नई समिति को सौंपने की तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम के बाद से अब तक 440 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हमास ने कहा है कि नई समिति के गठन के बाद वह अपनी मौजूदा सरकार भंग कर देगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने फलस्तीनी कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेंगे ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेंगे। आयोजकों के मुताबिक, ट्रंप के साथ उनके पांच कैबिनेट मंत्री भी सम्मेलन में शामिल होंगे। इस वैश्विक मंच पर भारत का भी मजबूत प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहेगा।
डब्ल्यूईएफ के अध्यक्ष और सीईओ बोर्गे ब्रेंडे ने बताया कि 18 जनवरी से शुरू होने वाली पांच दिवसीय बैठक में कम से कम 64 देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख भाग लेंगे। जी-7 समूह के सात में से छह देशों का शीर्ष नेतृत्व भी सम्मेलन में शामिल होगा। बैठक का विषय ‘संवाद की भावना’ रखा गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी डावोस पहुंचेंगे और यूक्रेन, गाजा तथा लैटिन अमेरिका की स्थिति पर चर्चा होगी। ट्रंप के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अब तक का सबसे बड़ा होगा, जिसमें विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट शामिल हैं।
दक्षिण सूडान में तैनात भारतीय महिला शांति सैनिक को संयुक्त राष्ट्र का सम्मान
दक्षिण सूडान में तैनात भारतीय महिला शांति सैनिक मेजर स्वाति शांति कुमार को लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली पहल के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। 31 वर्षीय मेजर स्वाति कुमार को उनके प्रोजेक्ट ‘इक्वल पार्टनर्स, लास्टिंग पीस’ के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
मेजर स्वाति शांति कुमार वर्तमान में यूएन मिशन इन साउथ सूडान (यूएनएमआईएसएस) में सेवाएं दे रही हैं। भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह परियोजना शांति स्थापना में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यूएनएमआईएसएस ने भी इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। यूएनएमआईएसएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, तैनाती के शुरुआती दौर में स्थानीय महिलाओं से संवाद स्थापित करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह पहली बार था जब भारतीय महिला शांति सैनिकों की टीम वहां पहुंची थी। मेजर स्वाति के अनुसार, स्वास्थ्य किट वितरित करने और लगातार संवाद के प्रयासों से स्थानीय महिलाओं का भरोसा बढ़ा। अब महिलाएं स्वयं आगे आकर अपनी समस्याएं साझा कर रही हैं।
दक्षिण सूडान की महिलाएं हैं मजबूत : स्वाति
मेजर स्वाति का मानना है कि दक्षिण सूडान की महिलाएं मजबूत हैं और समुदाय का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अवसर मिले, तो वे स्थायी शांति की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में शामिल है और वर्तमान में दुनिया भर में 5,300 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मी तैनात हैं।
इराक के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अल-सुदानी सत्ता की दौड़ से हटे
इराक की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने सत्ता की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के लिए रास्ता साफ हो गया है। यह जानकारी मंगलवार को इराकी अधिकारियों ने दी।
अल-सुदानी के नेतृत्व वाले रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट गठबंधन ने नवंबर में हुए संसदीय चुनाव में 329 सदस्यीय संसद में 46 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनने का दावा किया था। अल-मलिकी के गठबंधन को 30 सीटें मिली थीं। दोनों नेता ईरान समर्थित शिया दलों के गठबंधन कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे थे, जिसने 2022 में अल-सुदानी को सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क दोनों नेताओं में से किसी एक को चुनने में असमर्थ रहा और फैसला उम्मीदवारों पर छोड़ दिया गया। इसके बाद अल-सुदानी और अल-मलिकी के बीच हुई बैठक में यह सहमति बनी कि अल-सुदानी, मलिकी के पक्ष में पीछे हट जाएंगे। अल-सुदानी के कार्यालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
सीरिया में हालात सामान्य, झड़पों के बाद घर लौटने लगे विस्थापित लोग
सीरिया के अलेप्पो शहर में भीषण झड़पों के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। सरकारी बलों और कुर्द लड़ाकों के बीच संघर्ष थमने के बाद सैकड़ों विस्थापित लोग अपने घर लौटने लगे हैं। पिछले पांच दिनों की लड़ाई में कम से कम 23 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। अब सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच दुकानें खुल रही हैं और यातायात सामान्य हो रहा है, हालांकि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।