रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र याकूतिया की पिघलती बर्फ से निकले एक ऊनी गैंडे (ऊली राइनो) के अवशेष ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। स्थानीय शिकारी रोमन रोमानोव को एक धारा किनारे बर्फ से झांकती खोपड़ी और विशाल मुड़ा हुआ सींग दिखाई दिया, जिसे बाद में याकूत्स्क स्थित पी.ए. लाजारेव मैमथ म्यूजियम में ले जाया गया।
वहां विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह लगभग 19,700 वर्ष पुराना ऊनी गैंडा था और इसका सींग अब तक ज्ञात किसी भी गैंडे से लंबा है। इस खोज की पुष्टि रूसी विज्ञान अकादमी द्वारा किए गए अध्ययन और जर्नल ऑफ जूलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट में की गई है। म्यूजियम के शोधकर्ताओं ने जब सींग को मापा तो इसकी लंबाई 5 फीट 5 इंच (1.65 मीटर) निकली जो अब तक ज्ञात किसी भी गैंडे की सबसे लंबा सींग है। इससे पहले का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के सफेद गैंडे के पास था, जिसका सींग इससे दो इंच छोटा है।
बदलते जलवायु की चेतावनी
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज केवल पुरातात्त्विक दृष्टि से ही नहीं पर्यावरणीय चेतावनी के रूप में भी देखी जानी चाहिए। आर्कटिक क्षेत्रों में तेजी से पिघलता परमाफ्रॉस्ट न केवल जीवाश्मों को उजागर कर रहा है, बल्कि मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को मुक्त कर वैश्विक तापमान बढ़ा रहा है। इससे एक ओर जहां अतीत के रहस्य सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरती के भविष्य को लेकर नई चिंताएं भी उभर रही हैं।