संयुक्त राष्ट की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार समिति ने तीसरी आवधिक समीक्षा रिपोर्ट में तिब्बत में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाया था।
अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस की वर्ल्ड फ्रीडम इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत दुनिया का सबसे कम आजाद मुल्क है। यहां के नागरिकों पर चीनी सुरक्षाबलों का सख्त पहरा है। बीते माह नौ मार्च को जारी हुई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तिब्बत इस सूची में लगातार तीसरे वर्ष दक्षिणी सूडान और सीरिया के साथ सबसे निचले पायदान पर है।
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रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत में रहने वाले लोगों को बुनियादी मानवाधिकार भी नहीं मिले हुए हैं। इससे पहले छह मार्च को संयुक्त राष्ट की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार समिति ने तीसरी आवधिक समीक्षा रिपोर्ट में तिब्बत में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) तिब्बत के पूर्ण चीनीकरण के लिए यहां बलपूर्वक बौद्ध धर्म और संस्कृति को नष्ट कर रही है।
बच्चों को बौद्ध शिक्षाओं से पूरी तरह वंचित कर दिया गया है। इसके अलावा स्कूली शिक्षा के जरिये बच्चों में बौद्ध धर्म व संस्कृति के खिलाफ नफरत पैदा की जा रही है। धार्मिक नेताओं को पुनः शिक्षित करने के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। रिपोर्ट में तिब्बत में होने वाले अत्याचारों की तुलना शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर किए गए अत्याचारों से की गई है।