वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को मिला इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार
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वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत पहले के समय के मुकाबले कहीं ज्यादा स्पष्ट है। इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार भी ऐसे ही काम के लिए दिया गया है जिसने सीमाओं से परे हट कर मानवता की भलाई के लिए काम किया। इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को दिया गया है। नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा है कि इस कार्यक्रम ने युद्ध और संघर्षों में हथियार के तौर पर भूख के इस्तेमाल को रोकने के प्रयास किए हैं।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम दुनिया भूख के मुद्दे पर काम करने वाला और खाद्य सुरक्षा को प्रोत्साहित करने वाला सबसे बड़ा संगठन है। साल 2019 में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने 88 देशों के करीब 10 करोड़ लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जो खाद्य सुरक्षा और भूख का शिकार थे। साल 2015 में, भूख के उन्मूलन को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में से एक के रूप में अपनाया गया था। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम इस लक्ष्य को साकार स्वरूप देने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख साधन है।
नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार हाल के वर्षों में दुनिया में भूख के खिलाफ जंग में नकारात्मक रुख देखने को मिला है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में 13 करोड़ 50 लाख लोग तीव्र भुखमरी से पीड़ित थे, यह संख्या कई वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा है। इसमें से अधिकांश बढ़त युद्धों और सशस्त्र विवादों की वजह से हुई। इसके साथ ही पूरी दुनिया पर मंडरा रहे वर्तमान संकट कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की वजह से भी भूख से पीड़ित लोगों की संख्या दुनिया भर में बढ़ी है।
यमन, कॉन्गो गणराज्य, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान औक बुर्किना फासो जैसे देशों में हिंसक संघर्ष और महामारी ने भीषण संकट खड़ा कर जिा है और बड़ी संख्या में लोग भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। महामारी के संबंध में, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने अपने प्रयासों को तेज करने की एक प्रभावशाली क्षमता का प्रदर्शन किया है। संगठन खुद यह कह चुका है कि 'जब तक हमारे पास महामारी की वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक अव्यवस्था के खिलाफ सबसे प्रभावी वैक्सीन भोजन है।'
मई 2018 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2417 को सर्वसम्मति से अपनाने की कूटनीतिक प्रक्रिया में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम एक सक्रिय भागीदार था। इसने पहली बार संघर्ष और भूख के बीच की कड़ी को स्पष्ट रूप से संबोधित किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यह सुनिश्चित करने को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों के दायित्व को रेखांकित किया था कि खाद्य सहायता जरूरतमंदों तक पहुंचे। सुरक्षा परिषद ने भुखमरी का इस्तेमाल युद्ध के तरीके के रूप में किए जाने की निंदा की थी।
पुरस्कार के तौर पर वर्ल्ड फूड प्रोग्राम को 10 दिसंबर को ऑस्लो में आयोजित समारोह में एक करोड़ क्रोन (करीब आठ करोड़ रुपये) नकद और स्वर्ण पदक दिया जाएगा। यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिया जाता है। हालांकि, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की जरूरत के मुकाबले पुरस्कार राशि बहुत कम है। अब तक इसे 6.4 अरब डॉलर की सहायता नकद और सामान के रूप में मिली है जिसमें से करीब एक तिहाई यानी 2.7 अरब डॉलर की सहायता अकेले अमेरिका से मिली है।
ऑस्लो में नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रीस एंडरसन ने नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि इस साल के सम्मान के साथ समिति की इच्छा दुनिया का ध्यान उन लाखों लोगों की ओर आकर्षित कराने की है जो भूखमरी के शिकार हैं या जो इसके खतरे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने खाद्य सुरक्षा को शांति की कुंजी बनाने के लिए बहुस्तरीय सहयोग में अहम भूमिका निभाई है। समिति ने कहा कि भूखमरी की समस्या हाल के वर्षों में फिर गंभीर हो गई है।
वहीं, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के प्रमुख डेविड बीसली ने कहा कि पूरी टीम इस सम्मान की हकदार है। बीसली ने कहा, मैं जानता हूं कि मैं इस तरह के सम्मान का हकदार नहीं हूं, लेकिन दुनियाभर में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम और हमारे साझेदार के साथ कम कर रहे सभी पुरुष और महिलाएं, जो हर दिन अपनी जिंदगी को दांव पर लगाते हैं, वे इसके हकदार हैं। वहीं, संस्थान के निदेशक डैन स्मिथ ने कहा कि भूखमरी की वैश्विक समस्या लगातार बढ़ रही है और यह हिंसक संघर्ष की वैश्विक समस्या है।