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विश्व पर्यावरण दिवस: जीवन, प्रकृति और प्रदूषण का वो तानाबाना, जो आप जानना चाहेंगे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Fri, 05 Jun 2020 12:42 AM IST
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विश्व पर्यावरण दिवस 2020 की पूर्व संध्या पर अमृतसर के डंप यार्ड में अपनी चोंच में प्लास्टिक का तिनका दबाए बैठी मैना। - फोटो : PTI

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2020) हर साल पांच जून को मनाया जाता है। इसे मनाने की वजह मनुष्य जाति को अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। दरअसल, पर्यावरण की वजह से ही आज इंसान और अन्य जीव-जंतुओं का जीवन संभव है। यह दिवस इसी सुंदर प्रकृति को समझने और उससे तालमेल बैठाने के लिए है। 

पर्यावरण संरक्षण चर्चा में क्यों?
इंसानों यहां तक कि हर जीव-जंतु और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। परंतु विश्व में लगातार वातावरण दूषित होता रहा है, जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन में पड़ा। हालांकि बीते तीन माह में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन में वायु प्रदूषण की मात्रा में कमी जरूर आई है। परंतु यह पर्यावरण से जुड़ा एक हिस्सा मात्र है।

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विश्व पर्यावरण दिवस 2020 की पूर्व संध्या पर अमृतसर के डंप यार्ड में अपनी चोंच में प्लास्टिक का तिनका दबाए बैठी मैना। - फोटो : PTI
विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2020) हर साल पांच जून को मनाया जाता है। इसे मनाने की वजह मनुष्य जाति को अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। दरअसल, पर्यावरण की वजह से ही आज इंसान और अन्य जीव-जंतुओं का जीवन संभव है। यह दिवस इसी सुंदर प्रकृति को समझने और उससे तालमेल बैठाने के लिए है। 

पर्यावरण संरक्षण चर्चा में क्यों?
इंसानों यहां तक कि हर जीव-जंतु और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। परंतु विश्व में लगातार वातावरण दूषित होता रहा है, जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन में पड़ा। हालांकि बीते तीन माह में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन में वायु प्रदूषण की मात्रा में कमी जरूर आई है। परंतु यह पर्यावरण से जुड़ा एक हिस्सा मात्र है।

कब शुरू हुआ यह दिवस

  • वर्ष 1972 में खराब पर्यावरणीय परिस्थितियों और उसके बढ़ते दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिवस को मनाना शुरू किया गया था। जब स्टॉकहोम में इस पर एक सम्मेलन का आयोजन हुआ था। 
  • हालांकि इसके करीब दो साल बाद 1974 में संयुक्त राष्ट्र संघ के पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा करने पर इसे वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा।
  • वर्तमान में यह प्रदूषण की समस्या पर चर्चा करने के लिए एक वैश्विक मंच बन गया है। इसका 100 से अधिक देशों में आयोजन किया जाता है।
पर्यावरण दिवस 2020 की थीम
इस बार पर्यावरण दिवस 2020 की थीम है 'प्रकृति के लिए समय'। इसका अर्थ है पृथ्वी और मानव विकास को लेकर जीवन का समर्थन करने वाले आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने में भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना।

साल 2019 की थीम था वायु प्रदूषण

साल 2019 में विश्व पर्यावरण दिवस की थीम वायु प्रदूषण रखी गई थी। इसका वैश्विक मेजबान चीन था। साल 2018 में भारत ने ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ (Beat Plastic Pollution) थीम के साथ विश्व पर्यावरण दिवस के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी की थी। सरकार ने पौधरोपण को लेकर अभियान भी चलाया था, जिसके तहत लोगों से पौधा रोपकर उसके साथ ली गई सेल्फी को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए कहा गया था।

भातर में वायु प्रदूषण अधिनियम 1981

भारत में संसद ने वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 [Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981] पारित किया था। इसके तहत ‘वायु प्रदूषक’ को वातावरण में मौजूद किसी भी ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ के रूप में परिभाषित किया गया था, जो मनुष्य या अन्य जीवित प्राणियों या पौधों या संपत्ति या वातावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।

इस अधिनियम के तहत शीर्ष स्तर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board- CPCB) की स्थापना और राज्य स्तर पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board-SPCB) को वायु गुणवत्ता में सुधार नियंत्रण एवं वायु प्रदूषण के उन्मूलन से संबंधित किसी भी मामले पर सरकार को सलाह देने का प्रावधान किया गया था।

सीपीसीबी वायु की गुणवत्ता के लिए मानक भी तय करता है तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। 

वायु प्रदूषण हार्ट अटैक अथवा हृदयघात के कारण होने वाली मौतों में से एक चौथाई मौतों और स्ट्रोक, श्वसन संबंधी बीमारियों, फेफड़ों के कैंसर के कारण होने वाली कुल मौतों में से एक तिहाई के लिए जिम्मेदार है। यह जलवायु और पृथ्वी की कार्यप्रणाली पर भी विपरीत प्रभाव डालता है। एक अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण से हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 5 खरब डॉलर का बोझ पड़ता है।

ओजोन परत पर असर

वायुमंडल में प्रदूषण का ओजोन परत भी असर पड़ता है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि बीते कुछ महीनों से वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से औद्योगिक गतिविधियों के बंद होने से ओजोन परत में बना छेद बंद हुआ है। एक अध्ययन के मुताबिक ओजोन परत पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव के कारण वर्ष 2030 तक फसलों की पैदावार लगभग 26 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

हाल ही में भारत ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme-NCAP) का प्रारूप तैयार कर इसे लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को बढ़ाने के अलावा वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन करना है।
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