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WEF: अश्विनी वैष्णव बोले- भारत ने व्यावहारिक दृष्टिकोण से हसिल की उच्च वृद्धि, महंगाई को कम किया

Wed, 18 Jan 2023 04:11 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दावोस

सार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कोरोनाकाल में भारत सरकार ने वित्तीय सहायता, मुफ्त भोजन और मुफ्त टीकों के लिए कमजोर आबादी पर ध्यान केंद्रित किया और यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया।  
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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव - फोटो : ट्विटर/तिरुकुमारन आर
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न मानवीय और आर्थिक संकट से निपटने में भारत ने बहुत ही व्यावहारिक रुख अपनाया है और इससे देश में मध्यम मुद्रास्फीति और उच्च वृद्धि सुनिश्चित हुई है। वह विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक 2023 को संबोधित कर रहे थे। 

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मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लचीली रही है और नीतिगत ढांचा बहुत कम मुद्रास्फीति के साथ सतत वृद्धि का रहा है। उन्होंने कहा, 'जैसे ही महामारी ने दुनिया को प्रभावित किया और आर्थिक और मानवीय संकट पैदा किया, कई देशों ने बड़े प्रोत्साहन पैकेजों के साथ अपने खजाने का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, लेकिन इससे सोने की कीमत बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप भारी मुद्रास्फीति का दबाव पड़ा।    

उन्होंने कहा, 'हालांकि, भारत ने यह समझते हुए बहुत व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया कि पूंजी बहुत कम है, भले ही कुछ विशेषज्ञ कुछ भी कहें। वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार ने वित्तीय सहायता, मुफ्त भोजन और मुफ्त टीकों के लिए कमजोर आबादी पर ध्यान केंद्रित किया और यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया।    
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उन्होंने कहा, 'उन फैसलों ने हमारे देश के भविष्य को आकार दिया है और हमें लचीले और सतत विकास के रास्ते पर रखा है। हमने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के कारण उच्च वृद्धि हासिल की है और महंगाई को कम किया है।    

उन्होंने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया कि राजकोषीय नीति और मौद्रिक नीति साथ-साथ आगे बढ़े, जो कई अन्य देश नहीं कर सके। हमने सुनिश्चित किया कि महंगाई को कम करना मुख्य लक्ष्य हो और वह भी 10 साल की लंबी अवधि के लिए और इसने यह सुनिश्चित किया कि हम जल्दी से उच्च विकास दर पर लौट आएं।    

वह भारत को 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की राह पर एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। पैनलिस्टों ने वित्तीय क्षेत्र के सुधारों से लेकर नए उद्योगों के विकास तक, आने वाले दशक में भारत के आर्थिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदमों पर भी चर्चा की।

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