इसके पहले डब्लूएचओ की टीम ने अपनी चीन यात्रा के आखिर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कोरोना वायरस किसी प्रयोगशाला में हादसे की वजह से मनुष्य में संक्रमित हुआ, इस बात की संभावना बेहद कम है। लेकिन टीम ने कहा कि उसने इस संभावना की जांच का विकल्प खुला रखा है। गौरतलब है कि चीन का दावा है कि कोवड- 19 वायरस की उत्पत्ति किसी और देश में हुई और वहां से दूषित फ्रोजन फूड के साथ वह चीन पहुंचा। जबकि अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश इस वायरस को चीन की प्रयोगशाला में बनाए जाने का आरोप लगा चुके हैं।
चीन का दावा नहीं मानते वैज्ञानिक
ज्यादातर वैज्ञानिक भी चीन के दावे को स्वीकार नहीं करते। अब तक सबसे ज्यादा स्वीकार्य बात इसे समझा गया है कि ये वायरस किसी पशु से मनुष्य में संक्रमित हुआ। बहुत-सी दूसरी वायरल महामारियों में पशु से मनुष्य में वायरस के संक्रमण की बात साबित हो चुकी है।
अब कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के वैक्सीन बन जाने से दुनिया में भरोसा पैदा हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों में ये आशंका बनी हुई है कि इस महामारी पर काबू पाए जाने के बाद अमेरिका सहित तमाम देशों की दिलचस्पी भविष्य के लिए अनुसंधान में घट जाएगी। जबकि कोरोना महामारी के बीच ही दुनिया के कई हिस्सों में कई दूसरी महामारियों की भी मार पड़ी है।
इसके मद्देनजर अमेरिका में जॉन हॉपकिन्स सेंटर फॉर हेल्थ सिक्युरिटी में सीनियर स्कॉलर जेनिफर नुजो ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘महामारियों के लिए तैयार रहने का खर्च हमें लगातार उठाना होगा। अक्सर हमारे सामने आपातकालीन स्थिति आती है और तब हम संकल्प लेते हैं कि आगे ऐसा नहीं होने देंगे। तब धन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन कुछ वर्षों के बाद लोग भूल जाते हैं। उसके बाद रिसर्च के लिए बजट में कटौती शुरू हो जाती है।’ कई विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की तैयारी के लिए जरूरी है कि अभी पूरी पारदर्शिता बरती जाए। जबकि कोविड- 19 के मामले में पारदर्शिता का सवाल लगातार विवादों से घिरा हुआ है।