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भारत-नेपाल रिश्तों में आएगी गर्मजोशी?: काठमांडू पहुंचे विदेश सचिव, जल्द भारत आ सकते हैं पीएम बालेन शाह

Wed, 04 Nov 2026 11:47 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी बुधवार को नेपाल के दौरे पर पहुंचे। यहां उन्होंने विदेश मंत्री और अपने समकक्ष से मुलाकात की। 
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भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बुधवार को नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के साथ व्यापार, बिजली, सड़क संपर्क, विकास योजनाओं और आपसी सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के आने वाले भारत दौरे की तैयारियों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। शाह मार्च में प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार किसी पड़ोसी देश की यात्रा पर भारत आ सकते हैं।

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भारत-नेपाल रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मिसरी और राय के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए गए। इनमें उच्चस्तरीय नेताओं की यात्राएं, व्यापार, ऊर्जा, विकास में सहयोग, संपर्क सुविधाएं और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी रिश्ते शामिल रहे। नेपाल और भारत के विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री शाह के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों में जुटे हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और पुराने रिश्तों को नई मजबूती देने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि दोनों विदेश सचिवों ने आपसी हित के कई मुद्दों पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री शाह की भारत यात्रा से पहले जरूरी मुद्दों पर बातचीत करना था।

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विदेश मंत्री शिशिर खनाल से भी मिले मिसरी
नेपाल के विदेश सचिव से बातचीत के बाद विक्रम मिसरी ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, खनाल ने भरोसा जताया कि भारत और नेपाल के करीबी रिश्ते आने वाले समय में और ऊंचाई हासिल करेंगे। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, व्यापार, खेल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इस मुलाकात को प्रधानमंत्री शाह के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच आपसी समझ बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर
मिसरी ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा हुई। भारतीय दूतावास के मुताबिक, बैठक में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच पहले से जारी सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न तरीकों पर विचार किया गया। भारत और नेपाल के आर्थिक संबंध काफी पुराने हैं। नेपाल अपनी जरूरतों के लिए भारत पर काफी हद तक निर्भर है। सामान की आवाजाही से लेकर व्यापार और जरूरी सेवाओं तक, दोनों देशों के बीच मजबूत संपर्क बना हुआ है। ऐसे में आर्थिक सहयोग को बढ़ाना दोनों के लिए अहम है।

बिजली और जल संसाधनों पर हुई बातचीत
विदेश सचिव मिसरी ने नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ से भी मुलाकात की। इस दौरान बिजली व्यापार, जलविद्युत परियोजनाओं, आपदा प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी प्रणाली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नेपाल के ऊर्जा मंत्री के सचिवालय के मुताबिक, श्रेष्ठ ने हाल की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत की ओर से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत से बिजली व्यापार बढ़ाने, नेपाल में सहायता से चल रही परियोजनाओं को जल्द पूरा करने और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया। मिसरी ने ऊर्जा क्षेत्र में नेपाल के साथ मिलकर काम करने की भारत की इच्छा जताई। दोनों देशों के बीच बिजली उत्पादन और व्यापार को बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। जलविद्युत परियोजनाएं इस सहयोग का अहम हिस्सा हैं।

सड़क और बुनियादी ढांचे पर भी चर्चा
मिसरी ने नेपाल के बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल से भी मुलाकात की। इस दौरान सड़क संपर्क, बुनियादी ढांचे और दूसरी विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया गया। भारत और नेपाल के बीच बेहतर सड़क संपर्क और परिवहन व्यवस्था दोनों देशों के व्यापार को आसान बना सकती है। नेपाल चारों तरफ जमीन से घिरा देश है और समुद्र तक पहुंचने के लिए काफी हद तक भारत के रास्तों पर निर्भर करता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच संपर्क सुविधाओं का मजबूत होना नेपाल के लिए खास मायने रखता है।
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पुराने दोस्ताना रिश्तों के बीच सीमा विवाद की चुनौती
भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता भी अक्सर इन करीबी संबंधों की पहचान के तौर पर बताया जाता है।हालांकि, दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं। इसी साल मई में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की ओर से लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन की भागीदारी की बात कहे जाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ असहजता देखने को मिली थी। भारत ने इस पर साफ किया था कि सीमा विवाद को सुलझाने में किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार नहीं है। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए पहले से ही द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है। लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। भारत इन क्षेत्रों को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है।

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