पेंटागन में और भी बड़े बदलाव किए गए
इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने दो अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को निकाला है। इसमें अमेरिकी नौसेना की चीफ एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी और वायुसेना के वाइस चीफ जनरल जिम स्लाइफ को भी उनके पद से हटाया गया है। ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले भी कोस्ट गार्ड कमांडेंट एडमिरल लिंडा फेगन को हटा दिया था।
- एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी - अमेरिकी नौसेना की दूसरी ऐसी महिला अधिकारी थीं, जिन्हें चार-स्टार एडमिरल का दर्जा मिला था। वे अमेरिका की छठी बेड़े की कमांडर रह चुकी हैं।
- जनरल जिम स्लाइफ - पहले एयरफोर्स स्पेशल ऑपरेशन कमांड के प्रमुख थे और मध्य पूर्व व अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे थे।
ट्रंप के फैसले पर छिड़ा राजनीतिक विवाद
डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले पर अमेरिकी कांग्रेस में भारी विवाद छिड़ गया है। विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन इस कदम को सेना का राजनीतिकरण करार दिया है। वहीं सीनेट के रक्षा मामलों की समिति के सदस्य जैक रीड ने कहा, 'अमेरिकी सेना को हमेशा राजनीतिक दबाव से दूर रखा गया है। यह फैसला खतरनाक है और इसे रोका जाना चाहिए।' वहीं, ट्रंप समर्थक नेताओं ने इसे सेना को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
जनरल ब्राउन के हटाए जाने की पटकथा
दरअसल, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अपने एक पुराने बयान में संकेत दिए थे कि वे जनरल सीक्यू ब्राउन को हटाना चाहते हैं। जब उनकी नियुक्ति की सुनवाई हुई, तो उनसे पूछा गया कि क्या वे जनरल सीक्यू ब्राउन को हटाएंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'हर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की समीक्षा मेरिट, मानकों, सैन्य ताकत और दिए गए आदेशों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के आधार पर होगी।' रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अपनी एक किताब में यह भी सवाल उठाया था कि जनरल सीक्यू ब्राउन को चेयरमैन पद उनकी योग्यता के कारण मिला या फिर वे अश्वेत होने के कारण चुने गए?
अमेरिकी सेना में बड़े बदलाव की आशंका!
वहीं सेना के पूर्व अधिकारी और विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप वोकिज्म यानी प्रगतिशील विचारों को खत्म करने के लिए सेना में बड़े बदलाव कर रहे हैं। जबकि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहले ही इशारा दिया था कि वे सेना में योग्यता आधारित सिस्टम लागू करेंगे और किसी भी नेता को उसकी राजनीतिक सोच के आधार पर हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से अमेरिकी सेना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक तरफ वे सेना में विविधता और समानता को कम कर पारंपरिक सैन्य संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ इस फैसले की आलोचना भी हो रही है।