जम्मू-कश्मीर में अब तक तक के सबसे घातक आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए और 5 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने वीडियो जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली है। संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन ने जैश-ए-मोहम्मद को साल 2002 में आतंकवादी समूह घोषित किया है और पाकिस्तानी सरकार के भीतर इसके संबंध होने का आरोप लगाया है। लेकिन जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकियों की सूची में नही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन ने भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश के सरगना मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों पर बार-बार रोड़ा अटकाया है। चीन वीटो पावर का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को बचाता रहा है। पुलवामा हमले के बाद भारत की इस कोशिश पर एक बार फिर चीन ने अपना वही पुराना रंग दिखाया है।
चीन ने शुक्रवार को पुलवामा आतंकवादी हमले की निंदा की है, लेकिन उसने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराये जाने की भारत की अपील का समर्थन करने से एक बार फिर इनकार कर दिया।
पुलवामा जिले में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर गुरुवार को एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी अपनी एसयूवी कार को सीआरपीएफ की बस के काफिले में टक्कर मार दी। सीआरपीएफ के 78 वाहनों का काफिला 2500 जवानों को लेकर जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। हमलावर ने जिस बस में टक्कर मारी वह 54वीं बटालियन की थी जिसमें 44 जवान सवार थे।
भारत ने मसूद अजहर को लेकर दोहराई मांग
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत अपने बहादुर जवानों पर हुए इस कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इस घृणित कार्य को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया जिसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों ने आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया है। इस आतंकी गुट का सरगना अंतरराष्ट्रीय आंतकवादी मसूद अजहर है जिसे पाकिस्तान सरकार की तरफ से संचालन और विस्तार कर भारत और अन्य जगहों पर हमले की खुली छूट मिली हुई है।
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक बार फिर अपील की है कि आतंकी मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों की सूची को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक सूची में शामिल किया जाए और पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रस्ताव का समर्थन करें।
हालांकि चीन ने पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में डालने की भारत की अपील का समर्थन करने से फिर इनकार कर दिया है।
2016 में चीन ने लगाया वीटो
भारत सरकार ने दिसंबर 2016 में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल कराने की कोशिश की थी। लेकिन उस समय चीन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो करने का एलान कर किया।
चीन ने अपने निर्णय को लेकर यह तर्क दिया था इस मुद्दे पर सीधे तौर से जुड़े भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के बीच आम राय नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर भारत को सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन हासिल है। लेकिन सुरक्षा परिषद के नियम के तहत किसी फैसले के लिए सभी स्थाई सदस्यों की रजामंदी जरूरी होती है।
चीन पहले भी रोड़ा अटका चुका
इससे पहले चीन हिज्बुल-मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन, लश्कर के आतंकी अब्दुल रहमान मक्की और अजम चीमा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रस्ताव पर रोड़ा अटका चुका है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बावजूद हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी को पाकिस्तान में मिलने वाले फंड के सवाल पर भी चीन उनके समर्थन में खड़ा हो जाता है।