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आखिर क्यों हिलने लगी है बोरिस जॉनसन की कुर्सी? प्रधानमंत्री के संचार निदेशक के इस्तीफे से बढ़ा सियासी बवाल

Fri, 13 Nov 2020 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

  • कई सांसदों की चेतावनी, जॉनसन ने कामकाज का तरीका न सुधारा तो हो सकती है बगावत
  • कोरोना के बीच सियासी उठा-पटक से ब्रिटेन के लोग नाराज
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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ब्रिटेन कोरोना महामारी की दूसरी लहर झेल रहा है, जिसे पहले से भी ज्यादा मारक बताया गया है। इसी बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत में फंस गए हैं। सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी में उनके खिलाफ बगावत बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री के संचार निदेशक ली कैन के इस्तीफे के बाद पार्टी के अनेक सांसदों ने चेतावनी दी है कि जॉनसन ने अगर इस बार अपने कामकाज का तरीका नहीं सुधारा, तो वे भी बगावत की राह अपनाएंगे।

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ली कैन को प्रधानमंत्री का निकट सहयोगी माना जाता था। लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में अपना प्रोमोशन ना होने से उठे विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया। खबरों के मुताबिक जॉनसन की उनके साथ रहने वाली प्रेमिका और उनके कुछ निकट सहयोगियों ने चीफ ऑफ स्टाफ पद पर ली कैन की तरक्की रोक दी।     

ब्रिटिश मीडिया में ऐसी जोरदार चर्चा है कि प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉमिनिक कमिंग्स भी क्रिसमस तक इस्तीफा दे देंगे। कमिंग्स अप्रैल में विवादों से घिरे थे, जब उन्हें लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते पाया गया था। तब उनके इस्तीफे की मांग उठी थी, लेकिन बोरिस जॉनसन उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। कमिंग्स ने भी ये पुष्टि की है कि उनका अपने पद पर बने रहने में अब दिलचस्पी नहीं है। इस बारे में पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि साल के शुरु में ही उन्होंने कह दिया था कि 2020 के अंत तक वे अपने को जिम्मेदारियों से खाली हो जाएंगे।
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यहां के सियासी हलकों में ये चर्चा रही है कि कमिंग्स सत्ता के चीफ ऑफ स्टाफ बन जाएं, जिससे सरकारी फैसलों में उनका दखल बढ़ दायरे में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे। ली कैन से उनके बेहतर रिश्ते थे। कंजरवेटिव पार्टी के कुछ सांसदों ने ब्रिटिश मीडिया से कहा है कि ली कैन का प्रोमोशन प्रधानमंत्री कार्यालय में साजिशन रुकवाया गया, ये खबर कमिंग्स ने ही लीक की है। उनका मकसद प्रधानमंत्री पर दबाव बनाना है ताकि वे कैन को चीफ ऑफ स्टाफ बना दें। इसमे कामयाब ना होने पर कमिंग्स अब खुद इस्तीफा देने की खबर फैला रहे हैं।

इन चर्चाओं ने ब्रिटेन के आम लोगों में नाराजगी पैदा की है, जो अपने जीवन की सबसे घातक महामारी का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर आने के बाद एक बार फिर आम जीवन अस्त- व्यस्त हो गया है। सार्वजनिक जगहों पर कई प्रतिबंध लग गए हैं। इस मौके पर राजनीतिक जोड़तोड़ की खबरें फैलने से प्रधानमंत्री जॉनसन की लोकप्रियता में भारी गिरावट आने के संकेत हैं।

जॉनसन के नेतृत्व में पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में कंजरवेटिव पार्टी को भारी बहुमत मिला था। लेकिन उसके बाद से जॉनसन सरकार अंदरूनी गुटबाजी का शिकार हो गई। खासकर दो गुटों का टकराव चर्चित रहा है। वित्त मंत्री ऋषि सुनक और कमिंग्स गुटों के बीच कोरोना महामारी से निपटने के तरीकों को लेकर भी तीखे मतभेद रहे हैं।

सुनक और उनके समर्थक लॉकडाउन लागू करने के खिलाफ रहे हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। कमिंग्स गुट लॉकडाउन लागू कर पहले महामारी पर काबू पाने की वकालत करता रहा है। हाल में पांच नवंबर से  जब फिर से एक महीने के लिए लॉकडाउन लागू हुआ, तो उसे कमिंग्स गुट की जीत बताया गया।

विश्लेषकों का कहना है कि असल समस्या यह है कि जॉनसन ने सारी सत्ता को अपने हाथ में केंद्रित करने की कोशिश की। उन्होंने अपने विश्वस्त सलाहकारों के जरिए शासन चलाना चाहा। इससे उनके सलाहकारों और सहयोगियों में अधिक से अधिक ताकत हथियाने की होड़ लग गई। इसका असर प्रशासन पर पड़ा और अब चीजें हाथ से निकलती नजर आ रही हैं।

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