पश्चिम एशिया में पिछले 12 दिनों से जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को पूरी तरह से हिला कर रख दिया। इसका अच्छा खासा असर भारत की तेल आपूर्ति पर भी देखने को मिला, जिसके बाद हाल ही में अमेरिका ने भारत को पहले से समुद्री मार्ग में मौजूद रूसी कच्चे तेल को खरीदने और भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाने की विशेष छूट दी। इस मामले में अब व्हाइट हाउस का बयान सामने आया है, जहां बताया गया है कि आखिर भारत को ये विशेष छूट क्यों दी गई? आइए जानते हैं।
बुधवार को व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका ने भारत को पहले से समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की अनुमति इसलिए दी, क्योंकि भारत के लोग अच्छें हैं। दूसरी बात यह है कि भारत अमेरिका का अच्छा साथी साबित हुआ है। बयान में कहा गया कि भारत ने पहले ही अमेरिका की शर्तों का पालन किया और रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया। इसी वजह से अमेरिका ने भारत को यह विशेष छूट दी। वाइट हाउस के अनुसार, यह फैसला इसलिए भी किया गया क्योंकि इससे रूस को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा और दुनिया में तेल की आपूर्ति में अस्थायी कमी को पूरा किया जा सकेगा।
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व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लेविट ने क्या कहा?
वहीं इन सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने बताया कि अमेरिका ने यह फैसला इसलिए किया क्योंकि भारत ने पहले ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि भारत हमारे अच्छे साथी रहे हैं, इसलिए हमने उन्हें यह अस्थायी अनुमति दी। लेविट के अनुसार, इस निर्णय का मकसद दुनिया में तेल की अस्थायी कमी को पूरा करना है, जो ईरान के कारण पैदा हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को यह तेल खरीदने की इजाजत इसलिए दी गई क्योंकि यह तेल पहले से समुद्र में था और इससे रूस को कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा।
बेसेंट ने भारत को बताया था अच्छा साझेदार
पिछले हफ्ते अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत को अमेरिका का अच्छा साझेदार बताया था। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिकी आदेश का पालन करते हुए पहले से रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था। बेसेंट ने बताया कि अमेरिका ने भारत को यह अनुमति इसलिए दी ताकि विश्व बाजार में तेल की अस्थायी कमी को पूरा किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में रूसी तेल के अन्य प्रकारों पर भी प्रतिबंध में बदलाव किया जा सकता है।
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भारत का भी रुख समझिए
वहीं दूसरी ओर इस मामले में भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। केंद्र सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सरकार अपनी 1.4 बिलियन आबादी की ऊर्जा प्राथमिकताओं को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% आयात पर निर्भर करता है, इसलिए यह कदम उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अब समझिए अमेरिका का पिछला रुख
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए कड़ा जुर्माना और टैरिफ लगाया था। भारत से आयातित कई उत्पादों पर अमेरिका ने 25% से लेकर 50% तक के टैरिफ लगाए थे। हालांकि, हालिया ट्रेड डील और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप के लगाए गए टैरिफ अब हटा दिए गए हैं।