कोरोना महामारी से निपटने के लिए जारी लॉकडाउन के चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था गर्त में जा चुकी है। ऐसे में इस त्रासदी से जूझ रहे कई देशों ने अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए लॉकडाउन में ढील देनी शुरू की है।
टेड्रोस ने कहा, लॉकडाउन हटाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि संक्रमणऔर महामारी नियंत्रण में है। यह भी सुनिश्चित हो कि अगर रियायतें देने के बाद संक्रमण फैलता है तो लोगों की देखभाल और उनको चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य संसाधन पर्याप्त और सक्षम हैं।
रेयान ने कहा, दक्षिण कोरिया और जर्मनी में जहां संक्रमण पर नियंत्रण के बाद लॉकडाउन में छूट दी गई वहां मरीज दोबारा मिलने शुरू हो गए। इन देशों में सर्विलांस सिस्टम अच्छा है संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद उनके संपर्कों की भी पहचान पुख्ता तौर पर हो पा रही है।
बेहतर सर्विलांस दोबारा संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जरूरी है। जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क के अलावा केंटुकी, टेनेसी, विस्कंसिन जैसी जगहों पर संक्रमण अभी भी तेजी से फैल रहा है। अमेरिका में स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल मजबूती देना जरूरी है, ताकि आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके।
डब्लूएचओ ने कहा, चिंता इस बात की ज्यादा है कि लॉकडाउन खुलते ही लोग एक-दूसरे से मिलेंगे और संक्रमण निश्चित रूप से फैलेगा। रेयान ने कहा, भीड़ जुटेगी तो संक्रमण बढे़गा। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हम उस स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, कोरिया और जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण हमारे सामने है, जो सावधानी के साथ लॉकडाउन हटा रहे हैं। जबकि कुछ ऐसे देश हैं, जो आंख मूंदकर इस महामारी से बचने की कोशिश में हैं, यह खतरनाक है।