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कौन हैं वो दो पायलट?: फ्लाईदुबई विमान में मची तबाही तो बचाई लोगों की जान, अब भी सामने नहीं आई है पहचान

Sun, 04 Oct 2026 08:54 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में कप्तान पर को-पायलट के हमले के बाद विमान तेजी से नीचे गिरने लगा। इसी दौरान ड्यूटी के लिए विमान में सफर कर रहे दो अतिरिक्त पायलटों ने कॉकपिट संभाला और विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक में उतार लिया। घटना के बाद विमान और यात्रियों को बचाने वाले इन दोनों पायलटों की पहचान कंपनी ने अब तक सार्वजनिक नहीं की है।
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फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हाईवोल्टेज ड्रामा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दुबई से इस्राइल जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब कॉकपिट के अंदर को-पायलट ने कप्तान पर अचानक हमला कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि विमान तेजी से नीचे जाने लगा और उसमें सवार 182 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। तभी विमान में मौजूद दो अतिरिक्त पायलट कॉकपिट में पहुंचे और उन्होंने कमान संभालकर विमान को संभाल लिया। हैरानी की बात यह है कि घटना के तीन दिन बाद भी इन दोनों पायलटों की पहचान सामने नहीं आई है। फ्लाईदुबई ने सिर्फ इतना बताया है कि दोनों ड्यूटी पर तैनात क्रू सदस्य थे और उसी विमान से यात्रा कर रहे थे।

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आखिर कौन थे वे दो पायलट, जिन्होंने बचाई 182 लोगों की जान?
शनिवार तक फ्लाईदुबई ने उन दोनों पायलटों के नाम या उनके बारे में कोई दूसरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। एयरलाइन ने उन्हें सिर्फ ड्यूटी पर मौजूद क्रू सदस्यों के तौर पर बताया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि एयरलाइन ने उनकी पहचान गुप्त रखने का फैसला क्यों किया। हालांकि, विमान में मौजूद एक यात्री ने उस खौफनाक घटना की पूरी कहानी बताई है। उसकी बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संकट के उस दौर में दोनों पायलटों ने किस तरह मोर्चा संभाला और विमान को सुरक्षित उतारने में अहम भूमिका निभाई।

‘यह किसी चमत्कार से कम नहीं था’
विमान में आगे की तरफ दूसरी पंक्ति में बैठे डेनियल श्लिक्टर ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में उस घटना को याद किया। उन्होंने कहा, 'यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।' श्लिक्टर के मुताबिक, आम तौर पर किसी उड़ान में दो अतिरिक्त पायलट मौजूद नहीं होते। इस विमान में दोनों इसलिए सवार थे क्योंकि उन्हें तेल अवीव से वापस दुबई जाना था। इस तरह जब कोई पायलट यात्री के तौर पर ड्यूटी के लिए किसी विमान में सफर करता है, तो इसे ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है।
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अचानक कॉकपिट से आने लगी चीख-पुकार
कुछ देर तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन फिर यात्रियों को पता चला कि कॉकपिट के अंदर कोई बेहद गंभीर घटना हो रही है। यात्रियों के मुताबिक, को-पायलट कप्तान पर बार-बार हमला कर रहा था और कॉकपिट के अंदर खून तक बिखर गया था। कप्तान बुरी तरह घायल हो चुके थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद एक यात्री ने को-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया। दूसरे यात्रियों ने भी आगे बढ़कर उसे काबू में करने की कोशिश शुरू कर दी।

तभी एक अतिरिक्त पायलट दौड़कर कॉकपिट में पहुंचा
विमान के अंदर अफरातफरी मची हुई थी। इसी बीच विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलटों में से एक तेजी से कॉकपिट की तरफ बढ़ा। श्लिक्टर के मुताबिक, वह यात्रियों के एक समूह के ऊपर से लगभग छलांग लगाते हुए कॉकपिट तक पहुंचा और बिना एक पल गंवाए पायलट की सीट पर बैठ गया। इसके बाद उसने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। श्लिक्टर ने बताया कि वह पायलट सचमुच किसी हीरो की तरह काम कर रहा था। उसे देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वह घबराया हुआ है। उसने तुरंत विमान को संभालना शुरू कर दिया और ऐसा लग रहा था जैसे उसे बिल्कुल पता हो कि उस वक्त क्या करना है। कुछ ही देर बाद दूसरा अतिरिक्त पायलट भी कॉकपिट में पहुंच गया। दोनों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उस वक्त कोई और अंदर आए।

विमान इतनी तेजी से नीचे आया कि रडर का हिस्सा तक टूट गया
कॉकपिट में पहुंचने के बाद दोनों पायलटों ने विमान को स्थिर करने की कोशिश शुरू कर दी। लेकिन तब तक हालात बेहद खराब हो चुके थे। विमान इतनी तेजी से नीचे की ओर जा चुका था कि उसकी पूंछ में लगे रडर का एक हिस्सा तक टूट गया था। श्लिक्टर के मुताबिक, विमान को दोबारा स्थिर करने में काफी वक्त लगा। उनका अनुमान है कि इसे संभालने में करीब 10 मिनट या उससे भी ज्यादा समय लग गया। इस दौरान विमान से ‘मे डे’ यानी आपातकालीन संदेश भी भेजा गया। दोनों पायलट लगातार कोशिश कर रहे थे कि विमान को किसी ऐसी जगह उतारा जा सके, जहां यात्रियों की जान बचाई जा सके।

विमान संभला, लेकिन यात्रियों के मन में एक नया डर बैठ गया
विमान के दोबारा नियंत्रण में आने के बाद भी यात्रियों की घबराहट पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। कॉकपिट में पहुंचे दोनों पायलटों ने यात्रियों से कोई बातचीत नहीं की थी। ऐसे में कुछ लोगों के मन में एक और डर पैदा हो गया। श्लिक्टर ने बताया कि उन्हें आशंका होने लगी कि कहीं कॉकपिट संभालने वाले ये दोनों लोग भी विमान को किसी गलत इरादे से तो नहीं ले जा रहे। यात्रियों को डर था कि कहीं विमान को हाईजैक करके ईरान या किसी दूसरी जगह न ले जाया जाए। उस वक्त विमान उस इलाके से बहुत ज्यादा दूर भी नहीं था।

45 मिनट बाद आई वो खबर, जिसने सबकी जान में जान डाल दी
करीब 45 मिनट तक तनाव के माहौल में रहने के बाद आखिरकार यात्रियों को राहत की खबर मिली। कॉकपिट से घोषणा की गई कि विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा जाएगा। पायलटों ने यात्रियों को बताया कि विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई जाएगी और सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके बाद श्लिक्टर ने भी कॉकपिट में मौजूद दोनों पायलटों पर भरोसा कर लिया। आखिरकार विमान तबुक में सुरक्षित उतर गया और उसमें सवार 182 यात्रियों की जान बच गई।

‘हम आज जिंदा हैं तो उन्हीं की वजह से’
श्लिक्टर के मुताबिक, विमान को संभालने वाले पहले अतिरिक्त पायलट की भूमिका सबसे अहम रही। जिस तरह उसने बिना घबराए तुरंत विमान की कमान अपने हाथ में ली, उससे साफ लग रहा था कि वह पूरी तरह प्रशिक्षित और अनुभवी पायलट है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम उन लोगों की वजह से जिंदा हैं। हमें अपनी जान बचाने के लिए उनका उतना ही शुक्रगुजार होना चाहिए, जितना विमान में मौजूद दूसरे नायकों का।' 

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अब भी रहस्य है दोनों ‘हीरो पायलटों’ की पहचान
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे दोनों पायलट कौन थे, जिन्होंने ऐन वक्त पर कॉकपिट में पहुंचकर विमान को संभाला? फ्लाईदुबई ने अभी तक उनके नाम और दूसरी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, विमान में मौजूद यात्रियों के बयान से इतना जरूर साफ है कि संकट की उस घड़ी में इन दोनों अतिरिक्त पायलटों ने बेहद अहम भूमिका निभाई। अगर वे समय रहते कॉकपिट तक नहीं पहुंचते और विमान का नियंत्रण नहीं संभालते, तो 182 यात्रियों की जिंदगी पर मंडरा रहा खतरा कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था।

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