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US: व्हाइट हाउस बोला- सीरिया के शांतिपूर्ण देश बनने के समर्थन में ट्रंप; इस्राइली हमलों ने और बिगाड़े हालात

Fri, 18 Jul 2025 07:36 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

इस्राइल और हमास के बीच नेतन्याहू ने अब सीरिया की राजधानी दमिश्क समेत उसके तीन प्रांतों को निशाना बनाया है। 13 जुलाई को सीरिया के सुवैदा में हुई एक घटना के बाद इस्राइल सीधे तौर पर सीरिया में जारी संघर्ष में कूद गया और वहां की नई कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ हवाई हमलों को अंजाम दे रहा है। वहीं, अमेरिका ने सीरिया के शांतिपूर्ण देश बनने के मार्ग का समर्थन किया है। व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग दोनों ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप क्षेत्र में तनाव और संघर्ष को कम होते देखना चाहते हैं। 
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डोनाल्ड ट्रंप और कैरोलिन लेविट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सीरिया में वर्षों चले गृहयुद्ध के बाद जब देश में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीदें बढ़ रही थीं, तब ड्रूज अल्पसंख्यक और सरकारी बलों के बीच नए सिरे से शुरू हुई झड़पों ने हालात फिर से बिगाड़ दिए हैं। वहीं, ड्रूज मुस्लिमों को बचाने के लिए इस्राइल ने सीरिया पर हमले किए हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने इस बीच सीरिया में हालात सुधारने और वहां शांति स्थापित करने के लिए अपना समर्थन जताया है। व्हाइट हाउस ने इस बारे में बयान भी जारी किया है। 

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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब भी सीरिया के समृद्ध राष्ट्र बनने के मार्ग का समर्थन करते हैं। गुरुवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस की वीकली प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र में संघर्ष कम हो रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान उन्होंने उन्हें 'युवा और आकर्षक' बताया था।

ट्रंप ने हाल ही में हटाए थे सीरिया पर से प्रतिबंध
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि बीते कुछ दिनों में सीरिया में तनाव बढ़ गया है। बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति अभी भी सीरिया के शांतिपूर्ण और समृद्ध देश बनने के रास्ते का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि हम इस संघर्ष और तनाव कम करने मदद कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह जारी रहेगा। सीरिया उस क्षेत्र में मौजूद अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर सहमत हो गया है जहां संघर्ष चल रहा था। हम स्थिति पर लगातार सक्रिय रूप से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सीरिया को एक समृद्ध और स्थिर देश बनते देखना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने सीरिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर, उन्हें ऐसा करने का एक वास्तविक मौका दिया है।  
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अमेरिका ने तनाव को बढ़ने से रोका- अमेरिकी विदेश विभाग
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने अपनी प्रेस वार्ता में इस्राइली हमलों को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि सीरिया में इस्राइल के हस्तक्षेप और उसके हमलों का संयुक्त राज्य अमेरिका ने समर्थन नहीं किया है। हम वर्तमान संकट से निपटने और दोनों संप्रभु राज्यों के बीच एक स्थायी समझौते पर पहुंचने के लिए इस्राइल और सीरिया के साथ उच्चतम स्तर पर कूटनीतिक रूप से बातचीत कर रहे हैं। ब्रूस ने कहा कि अमेरिका ने तनाव को तेज़ी से रोकने के लिए काम किया है।

नेतन्याहू बोले- सीरिया में सैन्य कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी
वहीं, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सेना की सीरिया में सैन्य कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस्राइल ने सीरिया में हमले का कदम दो कारणों से उठाया। पहला- दमिश्क (सीरिया की राजधानी) के दक्षिणी इलाके को सैन्य मुक्त बनाए रखना, जो कि गोलन हाइट्स से लेकर द्रुज पहाड़ियों तक फैला हुआ है। दूसरा- सीरिया में बसे द्रुज समुदाय की रक्षा करना, जिन्हें वे हमारे भाइयों के भाई कहते हैं।

'सीरियाई सेना ने शांति का उल्लंघन किया'
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि सीरियाई सरकार ने इन दोनों शर्तों का उल्लंघन किया। उन्होंने दावा किया कि दमिश्क से दक्षिण की ओर सेना भेजी गई, जहां जाने की इजाजत नहीं थी। वहां द्रुज समुदाय पर हमला किया गया और नरसंहार शुरू हुआ। नेतन्याहू के मुताबिक, 'हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते थे। इसलिए मैंने इस्राइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) को जोरदार कार्रवाई के आदेश दिए।'

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इस्राइल की सीधी कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल
इस पूरे घटनाक्रम में इस्राइल की भूमिका भी बेहद अहम रही। इस्राइल ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में दुर्लभ हवाई हमले किए, जो देश की संप्रभुता पर बड़ा हस्तक्षेप माना जा रहा है। इस्राइल ने दावा किया है कि ये हमले ड्रूज समुदाय की रक्षा और इस्लामी चरमपंथियों को सीमाओं से दूर रखने के लिए किए गए हैं। ड्रूज समुदाय इस्राइल में भी बड़ी संख्या में मौजूद है, जिससे इस्राइली सरकार पर दबाव बढ़ा है।
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गृहयुद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह स्थिति सीरिया में नई सरकार के सामने सबसे बड़ा सुरक्षा संकट बनकर उभरी है। 2023 के अंत में जब इस्लामी विद्रोही गुटों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल कर दिया था, तब उम्मीद जगी थी कि एक नई स्थायी सरकार देश में स्थिरता लाएगी। लेकिन अब इन घटनाओं से नए सिरे से संकट गहराता दिख रहा है। 

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