अमेरिका और भारत ने वैश्विक अंडरसी केबल नेटवर्क को सुरक्षित, मजबूत और ज्यादा विविध बनाने के लिए साझेदारी का फैसला किया है। डिजिटल कनेक्टिविटी के बढ़ते वैश्विक महत्व के बीच यह कदम भारत की एक उभरते हुए ग्लोबल डिजिटल हब के तौर पर बढ़ती रणनीतिक भूमिका को भी रेखांकित करता है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस साझेदारी की जानकारी दी। दूतावास ने बताया कि सितंबर में दोनों देशों ने सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर 'अंडरसी केबल्स वर्कशॉप' आयोजित की थी। इसका मकसद दुनिया के लिए बेहद अहम सबसी कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को मजबूत करना था। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि अंडरसी केबल्स ग्लोबल डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं, जो अर्थव्यवस्थाओं, क्लाउड सेवाओं और AI क्रांति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिका और भारत अब इन नेटवर्क की सुरक्षा, मजबूती और विविधता बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, जो दुनिया को डिजिटल तौर पर आपस में जोड़े रखते हैं।
क्यों अहम हैं अंडरसी केबल्स?
अमेरिकी दूतावास ने US-India TRUST (स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल करके रिश्तों को बदलना) पहल के तहत अंडरसी केबल नेटवर्क के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। दूतावास के मुताबिक, सबसी केबल नेटवर्क वैश्विक डिजिटल कॉमर्स, डेटा सेंटर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और तेजी से विस्तार कर रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थव्यवस्था की बुनियाद हैं। दुनिया भर में डेटा और डिजिटल सेवाओं का लगातार बढ़ता प्रवाह इन्हीं नेटवर्क पर निर्भर करता है। ऐसे में इन केबल्स की सुरक्षा और मजबूती सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी का सवाल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक कारोबार, डेटा के आदान-प्रदान और डिजिटल अर्थव्यवस्था की निरंतरता पर पड़ता है। अमेरिका और भारत इसी अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में साझेदारी कर रहे हैं।
भारत की रणनीतिक बढ़त
अमेरिकी दूतावास ने तेजी से विस्तार कर रहे वैश्विक डिजिटल नेटवर्क में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। दूतावास के अनुसार, भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड और AI क्षमताओं की बढ़ती मांग और दुनिया के बड़े बाजारों को जोड़ने वाली उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति देश को एक प्रमुख ग्लोबल सबसी केबल हब के तौर पर स्थापित करने का बड़ा अवसर देती है। अंडरसी केबल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और उसका विस्तार भारत की डिजिटल क्षमता को और मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही वैश्विक डेटा और संचार नेटवर्क में नई दिल्ली की रणनीतिक भूमिका भी बढ़ सकती है। ऐसे में अंडरसी केबल नेटवर्क भारत के लिए सिर्फ कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी डिजिटल और तकनीकी ताकत को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम पर भी साझेदारी
इससे पहले मई में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि TRUST पहल दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को नई गति दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान पिछले साल शुरू की गई इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। गोर ने कहा था कि अमेरिका उन देशों के साथ साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है जिन्हें वह उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भरोसेमंद सहयोगी मानता है और भारत उन्हीं सहयोगियों में शामिल है। उन्होंने 'पैक्स सिलिका' पहल में भारत की भागीदारी को भी अहम बताया। यह अमेरिका के नेतृत्व में तैयार किया जा रहा एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी और सप्लाई-चेन नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकों और उनसे जुड़ी आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना है।
'भारत उन सहयोगियों में से एक है'
गोर ने कहा था, 'भारत के दुनिया के उन पहले 10 देशों में शामिल होने की वजह यह है कि हम इस जगह पर भरोसा करते हैं। हम यहां के लोगों पर भरोसा करते हैं, हम टेक्नोलॉजी पर भरोसा करते हैं, हम आपकी सरकार पर भरोसा करते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत ऐसे 'भरोसेमंद इकोसिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के नेटवर्क' का हिस्सा बन रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। पिछले साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, US-India TRUST पहल की शुरुआत रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम, बायोटेक्नोलॉजी, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को तेज करने के लिए की गई थी। इसके तहत सरकार, अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ सत्यापित टेक्नोलॉजी वेंडर्स के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने और संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
ये भी पढ़ें:
एक्सप्लेनर: रूस का एसयू-57 कितना ताकतवर, भारत को पांचवीं पीढ़ी के जेट का ऑफर क्यों, लड़ाकू विमान में खास क्या?
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत-अमेरिका का अगला बड़ा कदम
TRUST पहल के प्रमुख स्तंभों में से एक के तौर पर अमेरिका और भारत ने दोनों देशों की निजी इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देश साल के अंत तक AI इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विस्तार देने के लिए एक US-India रोडमैप पेश करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इस रोडमैप में भारत में बड़े पैमाने पर US-ओरिजिन वाले AI इंफ्रास्ट्रक्चर को फाइनेंस करने, बनाने, बिजली उपलब्ध कराने और नेटवर्क से जोड़ने में आने वाली बाधाओं की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य के माइलस्टोन और अगले कदम भी तय किए जाएंगे। संयुक्त बयान के मुताबिक, अमेरिका और भारत अगली पीढ़ी के डेटा सेंटरों में इंडस्ट्री पार्टनरशिप और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर काम करेंगे। दोनों देश AI के लिए कंप्यूट और प्रोसेसर के विकास तथा उनकी उपलब्धता बढ़ाने, AI मॉडल में इनोवेशन को आगे बढ़ाने और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए AI एप्लीकेशन विकसित करने पर भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा, इन तकनीकों की सुरक्षा और नियंत्रण के लिए जरूरी उपायों और नियामकीय बाधाओं को कम करने पर भी दोनों देशों का फोकस रहेगा।