इस्राइल-हमास युद्ध
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इस्राइल-हमास के बीच जारी युद्ध को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इस संघर्ष में अब तक 1400 इस्राइली नागरिकों की मौत हो चुकी है जबकि गाजा पट्टी में करीब 3000 लोगों की जान गई है। इसी बीच मंगलवार को गाजा पट्टी स्थित अल-अहली अरब अस्पताल में धमाका हुआ जिसमें 500 से अधिक फलस्तीनी नागरिकों की जान चली गई।
हमास ने अस्पताल में धमाके का आरोप इस्राइल पर लगाया है। वहीं, इस्राइल ने कहा कि अस्पताल में विस्फोट आतंकी संगठन फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) के असफल रॉकेट लॉन्च के कारण हुआ। घटना के बाद मौजूदा संकट और गहराता दिख रहा है। एक ओर जहां जॉर्डन में होने वाली वार्ता रद्द हो गई है। दूसरी ओर मध्य-पूर्व के देशों में इस्राइल विरोधी प्रदर्शन शुरु हो गए हैं।
ऐसे में हमें जानना चाहिए कि आखिर गाजा के अस्पताल में हुआ क्या? हमले को लेकर कौन किस पर आरोप लगा रहे? इस्राइल ने घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी है? क्या इस हमले के बाद इस्राइल-हमास युद्ध में क्या हो सकता है?
Israel Hamas War
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पहले जानते हैं कि गाजा के अस्पताल में हुआ क्या?
इस्राइल-हमास युद्ध के बीच मंगलवार को गाजा पट्टी में अल-अहली अरब अस्पताल पर बमबारी हुई जिसमें कम से कम 500 लोगों की मौत हुई है। गाजा में सत्तारूढ़ हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अस्पताल की ध्वस्त इमारत के मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है।
घटना के बाद अस्पताल में विस्फोट से उपजे भयानक दृश्य सामने आए। घटना के बाद के एक वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि अस्पताल में इमारत में आग लगी हुई दिखाई दे रही है और मैदान में शव के टुकड़े बिखरे हुए हैं, जिनमें से कई छोटे बच्चे हैं। उनके चारों ओर घास पर कंबल, स्कूल बैकपैक और अन्य सामान बिखरा हुआ था।
हमला हुआ उस वक्त हुआ जब यहां शांति के लिए प्रार्थना रखी गई थी। उधर अस्पताल पर हमले के बाद बुधवार को एक दिन के शोक का आह्वान किया गया है। जिस अल-अहली अस्पताल में हमला हुआ, उसका स्वामित्व और संचालन दुनिया के सबसे बड़े ईसाई समूहों में से एक एंग्लिकन कम्युनियन द्वारा किया जाता है। अस्पताल की स्थापना 1882 में हुई थी।
हमले के आरोप किस पर लग रहे?
हमास ने अस्पताल में हमले के पीछे इस्राइली वायुसेना को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, फलस्तीन के एक अधिकारी ने मंगलवार को हुए इस हमले को नरसंहार बताया है। उन्होंने कहा कि अब चुप्पी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर इस हमले की पुष्टि हो जाती है, तो यह हमला 2008 के बाद से लड़े गए पांच युद्धों में अब तक का सबसे घातक इस्राइली हवाई हमला होगा।
Benjamin Netanyahu
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इस्राइल ने घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अस्पताल हमले की जिम्मेदारी इस्राइली सेना (आईडीएफ) ने नहीं ली है। आईडीएफ के अफसरों ने दावा किया कि शुरुआती जांच में पता चलता है कि गाजा के अस्पताल में विस्फोट एक असफल रॉकेट लॉन्च के कारण हुआ। आईडीएफ ने अपने एनालिसिस के आधार पर दावा किया कि जिस दौरान अल-अहली अल-महदी अस्पताल में ब्लास्ट हुआ, ठीक उसी दौरान गाजा में कुछ आतंकियों की तरफ से रॉकेटों का एक जत्था अस्पताल के पास से ही छोड़ा गया था।
आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा कि इस्राइल के पास कई ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं, जिसमें हमास के लोग इस धमाके के पीछे फलस्तीन इस्लामिक जिहाद को जिम्मेदार बता रहे हैं।
फलस्तीन इस्लामिक जिहाद (पीआईजे)
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कौन है फलस्तीन इस्लामिक जिहाद जिस पर आरोप लगा रहा इस्राइल?
अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) के मुताबिक, फलस्तीन इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) एक आतंकवादी समूह है जो एक इस्लामी फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना करना चाहता है। एनसीटीसी के अनुसार, पीआईजे ने इस्राइल के विनाश को ही अपना मकसद बना रखा है। यह गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में दूसरा सबसे बड़ा आतंकवादी समूह है, जिसकी स्थापना 1979 में मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में हुई थी। ईरानी क्रांति से खड़े हुए संगठन को ईरान, सीरिया और लेबनानी आतंकी समूह हिज्बुल्ला से समर्थन हासिल है।
पीआईजे की सैन्य शाखा अल-कुद्स ब्रिगेड ने 1990 के दशक से इस्राइली ठिकानों पर कई हमलों किए। पीआईजे कभी-कभी हमास के साथ समन्वय में काम करता है लेकिन समूहों के बीच तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। पीआईजे आमतौर पर इस्राइल का सामना करने के लिए हमास की रणनीति से असहमत रहता है।
इस संगठन की मौजूदगी गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक, लेबनान और सीरिया में है और तेहरान में कार्यालय है। इसके सदस्यों की संख्या 1,000 बताई जाती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 1997 में पीआईजे को एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया और 2014 में पीआईजे के महासचिव जियाद अल-नखला को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकी के रूप में नामित किया।
हमास की तरह ही पीआईजे भी इस्राइल से भिड़ता रहा है। पिछले साल अगस्त में अपने एक कमांडर की मौत के जवाब में इस्राइल पर लगभग 1,100 रॉकेट दागे। हालांकि, कुछ रॉकेटों के असफल होने से 15 फलस्तीनियों की मौत हो गई और इस्राइल में कुछ लोग घायल हो गए। अब एक बार फिर इस्राइल ने गाजा अस्पताल पर बमबारी के लिए उसे असफल रॉकेट लॉन्च को जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नेतन्याहू को गले लगाकर दिया सांत्वना।
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हमले के बाद क्या-क्या हुआ?
सात अक्तूबर को शुरू हुए संघर्ष को रुकवाने के लिए कई देश मध्यस्थता की कोशिशें कर रहे हैं लेकिन एक हमले ने इन प्रयासों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मामले में कहा, 'मैं अस्पताल पर हुए हमले से बेहद दुखी हूं। हमले की जानकारी मिलते ही मैंने जॉर्डन के राजा और इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात की। मैंने मेरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को निर्देश दिए कि पता लगाएं वास्तव में क्या हुआ था और इस बारे में जानकारी एकत्रित करें।
इसके अलावा ईयू, कनाडा, जर्मनी, रूस, कतर, मिस्र समेत कई देशों ने हमले की निंदा की है। इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूएन जैसे वैश्विक संस्थाओं ने भी रॉकेट हमले की आलोचना की है।
मध्य-पूर्व में इस्राइल विरोधी प्रदर्शन
गाजा के अस्पताल में विस्फोट के बाद मासूमों की मौत को लेकर दुनिया के कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। इनमें वेस्ट बैंक से लेकर लेबनान, जॉर्डन, लीबिया और ईरान जैसे देश शामिल हैं। वेस्ट बैंक में बड़ी संख्या में लोगों को अपनी पुलिस से ही भिड़ते देखा गया।
Israel Hamas War
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शांति की कोशिशों को झटका?
इस्राइल-हमास लड़ाई के बीच जॉर्डन के अम्मान में बुधवार को शिखर सम्मेलन आयोजित होना था। इस सम्मेलन में जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सीसी और फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को शामिल होना था। बैठक में जो बाइडन के साथ इस्राइल-हमास युद्ध को लेकर चर्चा की जानी थी। हालांकि, गाजा के अस्पताल पर हमले की वजह से कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।
फिलहाल, जो बाइडन इस्राइल के दौरे पर हैं। बाइडन के यहां पहुंचने पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित अन्य नेताओं ने उनसे मुलाकात की है। वहीं, अस्पताल हमले के बाद इस्राइल के पड़ोसी देश जॉर्डन ने कड़ा रुख अपनाया है। यहां के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने कहा कि इस्राइल और हमास के बीच युद्ध क्षेत्र को खतरे की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि जॉर्डन शिखर सम्मेलन की मेजबानी तभी करेगा जब हर कोई इस बात पर सहमत होगा कि इसका उद्देश्य युद्ध को रोकना, फलस्तीनियों की मानवता का सम्मान करना और उन्हें उचित सहायता प्रदान करना होगा।