ट्रंप का सख्त संकेत- बात नहीं बनी तो कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कर दिया है कि अगर कूटनीति विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रंप के मुताबिक, 24 घंटे के भीतर बातचीत की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
दोहरी रणनीति- बातचीत भी, तैयारी भी
पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि अमेरिका एक दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है, एक ओर वार्ता के जरिए समाधान की कोशिश, और दूसरी ओर सैन्य ताकत के जरिए दबाव बनाना। यह रणनीति जहां अमेरिका की बातचीत की स्थिति को मजबूत कर सकती है, वहीं यह संकेत भी देती है कि वार्ता विफल होने की स्थिति में टकराव की पूरी तैयारी है।
होरमुज जलडमरूमध्य पर बड़ी चिंता
इस पूरे संकट के बीच होरमुज जलडमरूमध्य सबसे अहम बिंदु बना हुआ है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, जो मौजूदा हमलों और तनाव के कारण प्रभावित हो रही है। करीब छह हफ्तों से जारी इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को झटका दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर भी असर डाला है। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 50,000 सैनिक किसी बड़े जमीनी युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ईरान का विशाल भूभाग और बड़ी आबादी किसी भी संभावित सैन्य अभियान को बेहद जटिल बना देती है।
अब सबकी नजर इस्लामाबाद में शुरू होने वाली वार्ता पर टिकी है। यह बातचीत तय करेगी कि पश्चिम एशिया कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर एक बड़े संघर्ष की ओर।