अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। भारतीय समयानुसार रात करीब साढ़े नौ बजे शुरू हुए हमलों में ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम ने क्या कहा?
सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना ने एक सितंबर को ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमलों की एक श्रृंखला सफलतापूर्वक पूरी की। अमेरिकी सेना ने आईआरजीसी के ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस साइट, रडार सिस्टम, समुद्री ठिकाने और सुविधाएं, बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकाने और संचार केंद्र शामिल थे।
कमान ने कहा कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर आईआरजीसी के हालिया हमलों की कोशिशों के बाद किए गए। पश्चिम एशिया में इस समय 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। कमान ने कहा कि ये सैनिक सतर्क हैं और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए तैयार हैं। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर की जाएगी।
ईरान की समाचार एजेंसियों के अनुसार, केशम द्वीप, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क और सिरिक में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी जॉर्डन के शहर अकाबा के ऊपर धमाके दिखाई दिए। ईरान के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी हमले में एक घर को निशाना बनाया गया। उस समय वहां शादी समारोह चल रहा था। हमले में दो लोगों की मौत हो गई।
ट्रंप ने क्या धमकी दी?
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने इस हमले का जवाब दिया, तो उसे और भी सख्त परिणाम भुगतने होंगे। आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका को अपने इन नए हमलों पर पछतावा होगा।
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ब्रेंट क्रूड के दामों में वृद्धि
इस ताजा संघर्ष के बाद ब्रेंट क्रूड तेल के दामों में लगभग दो फीसदी की और तेजी आई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे सऊदी अरब के दो सुपर टैंकरों पर भी अज्ञात मिसाइलों से हमले की खबर है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि फारस की खाड़ी से ईरान को तेल निर्यात करने से रोका गया, तो कोई भी देश यहां से तेल निर्यात नहीं कर पाएगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि अमेरिका इस सप्ताह और अगले सप्ताह ईरान के खिलाफ नए बैंकिंग प्रतिबंध और कड़े आर्थिक उपाय लागू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के नेतृत्व को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। कतर में स्थित अमेरिकी दूतावास ने मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों से अत्यधिक सतर्क रहने को कहा है।