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Russia: ईरान को मिला रूस का साथ, व्लादिमीर पुतिन बोले- पश्चिम एशिया में शांति के लिए सब कुछ करेंगे

Mon, 27 Apr 2026 07:59 PM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को।

सार

Russia: अमेरिका-इस्राइल से तनाव के बीच ईरान को रूस का साथ मिला है। आज सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की बैठक हुई, जिसमें पुतिन ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव कदम उठाने की बात कही। पढ़िए रिपोर्ट-
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बैठक - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात की। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने यह जानकारी दी।
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बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने क्या कहा?
■ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी लोगों की प्रशंसा की और कहा कि वे अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी से संघर्ष कर रहे हैं।
■ पुतिन यह भी कहा कि रूस पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के हित में हरसंभव प्रयास करेगा।
■ उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता से संदेश मिलने के बाद कहा कि रूस तेहरान के हितों का समर्थन करेगा ।
■ उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान भी कहा कि रूस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए 'सब कुछ करेगा'।


हालात जैसे भी ईरान-रूस के संबंध और मजबूत होंगे: अराघची
पुतिन से मुलाकात के दौरान अराघची ने कहा कि हालात चाहे जैसे हों, ईरान और रूस के संबंध आगे और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सबसे ऊंचे स्तर की रणनीतिक साझेदारी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा युद्ध, क्षेत्रीय तनाव या अंतरराष्ट्रीय दबाव से रूस और ईरान की नजदीकी कम नहीं होगी।

रूस और ईरान पहले से ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय मामलों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों ने पिछले साल दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी समझौता भी किया था।

होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ईरान ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, ईरान ने कहा कि उसके सशस्त्र बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण बनाया जाना चाहिए।  

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ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि सशस्त्र बल पहले से ही इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रख रहे हैं और 'शत्रुओं के जहाजों' के गुजरने पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अजीजी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून में यह प्रावधान है कि इस जलमार्ग से होने वाली आय स्थानीय मुद्रा रियाल में दी जाए।




 
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