पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले कम करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, ट्रंप के बयान के उलट इस्राइल की ओर से ईरान पर हमले और तेज किए जाने का एलान किया गया है। वहीं, ईरान की ओर से भी जवाबी हमला किया जा रहा है। इन स्थितियों को देखते हुए पश्चिम एशिया संकट के सुलझने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग अब अपने चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है। हर बदलते दिन के साथ पश्चिम एशिया संकट और गहराता जा रहा है। इस बीच इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने कहा है कि इस हफ्ते ईरान के खिलाफ हमलों की तीव्रता और बढ़ाई जाएगी। सैन्य अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) और अमेरिका की सेना द्वारा किए जाने वाले हमले काफी तेज होंगे।
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काट्ज ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरानी शासन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना है। काट्ज ने कहा कि हम ईरानी शासन के खिलाफ आक्रामक अभियान का नेतृत्व जारी रखने, उसके कमांडरों का सिर कलम करने और उसकी रणनीतिक क्षमताओं को निष्क्रिय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
लक्ष्य हासिल होने तक नहीं रुकेंगे : इस्राइल
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक इस्राइल और क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए मौजूद हर सुरक्षा खतरे को समाप्त नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा, ''आईडीएफ मजबूत है और इस्राइली नागरिक मोर्चा भी मजबूत है। जब तक युद्ध के सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, हम रुकने वाले नहीं हैं।''
इस बीच ब्रिटेन ने हिंद महासागर में स्थित यूके-अमेरिका सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया को निशाना बनाने के लिए ईरान की निंदा की है। इस हमले की दूरी से संकेत मिलता है कि तेहरान की मिसाइल क्षमता पहले के अनुमान से अधिक ज्यादा है। वहीं, ईरान के नतांज परमाणु संवर्धन ठिकाने पर हवाई हमला होने की खबर सामने आई है। ईरानी सरकारी एजेंसी के अनुसार इस हमले में कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ। हालांकि इस्राइल ने इस हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
ईरान और लेबनान में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत
अब तक इस युद्ध में ईरान में 1,300 से अधिक, लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायल में 15 और अमेरिकी सेना के 13 जवानों की भी जान गई है। खाड़ी क्षेत्र में भी कई नागरिक हताहत हुए हैं, जबकि लाखों लोग ईरान और लेबनान में विस्थापित हो चुके हैं।