पश्चिम एशिया में जंग का दायरा खतरनाक स्तर तक फैल चुका है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बीच ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में बड़ा सवाल है, क्या यह संघर्ष और भयानक होने वाला है? क्या वाकई में इस्राइल सेना की कमी से जुझ रहा है? और क्या ईरान की रणनीति हालात को पूरी तरह बदल सकती है?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयानक होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से क्षेत्र में आग का तूफान है। दूसरी ओर ईरान ने भी खाड़ी देशों मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइल में भयंकर और सटीक हमला कर चारों तरफ धुंआ-धुंआ कर रखा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल काबू से बाहर है। इसी बीच अब ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इस्राइल को कड़ी चेतावनी देते हुए बड़ा बयान दिया है।
शनिवार को गालिबाफ ने कहा कि इस्राइल के खिलाफ ईरान की जवाबी कार्रवाई उसकी सेना के पतन को और तेज कर देगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राइल अपनी सेना की आंतरिक कमजोरियों को छिपाने के लिए तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के औद्योगिक ठिकानों पर हमले करके इस्राइल अपने लोगों और सरकार का भरोसा वापस लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसा करना उसके लिए उल्टा साबित होगा।
इस्राइल सेना प्रमुख के बयान का किया जिक्र
अपने बयान में गालिबाफ ने इस्राइल के सेना के प्रमुख एयाल जमीर के हालिया बयान का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि ईरान की प्रतिक्रिया केवल जवाबी नहीं होगी, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत होगी, जो इस्राइल की रक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को निशाना बनाएगी। बता दें कि गालिबाफ का यह बयान इस्राइल की सेना के प्रमुख एयाल जमीर की हालिया चेतावनी के बाद आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीर ने इस्राइली सरकार को बताया कि सेना पर भारी दबाव है और अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो इस्राइली सेना अंदर से टूट सकती है।
इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि इस्राइल में इस समस्या को और गंभीर बना रहा है वहां भर्ती को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के कई युवाओं को लंबे समय से सेना में छूट मिलती रही है, हालांकि 2024 में अदालत ने इस छूट को अवैध करार दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा अभी भी सेना में शामिल नहीं हुए हैं। कुल मिलाकर, एक तरफ ईरान इस्राइल की सैन्य स्थिति को कमजोर बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस्राइल के अंदर से भी सेना पर बढ़ते दबाव और संसाधनों की कमी की बात सामने आ रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ता दिख रहा है।