पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। देश की हालत ऐसी हो गई है कि एक तरफ आम लोग महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ देश का रसूखदार तबका अपनी संपत्ति समेटकर विदेश में बसने की तैयारी कर रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के नेताओं, बड़े अधिकारियों और ताकतवर लोगों ने देश से बाहर रहने के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट में भ्रष्टाचार, सेना के बढ़ते दखल और खराब शासन व्यवस्था को बड़ी वजह बताया है।
लाखों लोग छोड़ रहे हैं पाकिस्तान
'सेंटर फॉर पीस स्टडीज' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पेश सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 के शुरुआती छह महीनों में 3.17 लाख से ज्यादा लोग नौकरी की तलाश में देश छोड़ चुके हैं। वहीं, 2024 से 2026 के बीच 18.7 लाख से अधिक पाकिस्तानी विदेश चले गए। रिपोर्ट के लेखक और रिसर्च फेलो इमरान खुर्शीद का कहना है कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक बदइंतजामी ने सरकारी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। इसका असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है।
सरकारी अधिकारियों के पास विदेशी नागरिकता और संपत्ति
रिपोर्ट में 5 अक्टूबर को सामने आए फेडरल ऑडिट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि पाकिस्तान के 2,500 से ज्यादा सरकारी अधिकारियों के पास दोहरी नागरिकता है। इसके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों पर विदेश में अपनी संपत्ति छिपाने के आरोप भी लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुर्तगाल अमीर और रसूखदार पाकिस्तानियों की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। वहां निवेश के बदले निवास मिलने वाली योजनाओं के जरिए लोग विदेश में बसने का रास्ता तलाश रहे हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी इस मामले पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि कई अधिकारियों ने सरकारी पद पर रहते हुए ही विदेश जाने की तैयारी कर ली थी। इससे उनकी देश के प्रति वफादारी पर सवाल उठते हैं।
नेताओं को जिंदगी भर मुफ्त नीला पासपोर्ट
पाकिस्तान की राजनीति में भी एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अक्टूबर को सीनेट ने पासपोर्ट संशोधन विधेयक 2026 पारित किया। इसके तहत रिटायर हो चुके सांसदों और सीनेटरों को जिंदगी भर मुफ्त आधिकारिक नीला पासपोर्ट रखने की सुविधा दी गई है। ऐसे समय में जब आम नागरिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, नेताओं को मिलने वाली इस सुविधा ने बहस छेड़ दी है।
सेना पर देश के संसाधनों से कमाई करने का आरोप
रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इमरान खुर्शीद का कहना है कि सेना का देश की राजनीति और कारोबार में दखल लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में सेना स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल (SIFC) और फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के जरिए खैबर पख्तूनख्वा के दुर्लभ खनिजों और दूसरी कीमती धातुओं के कारोबार में सक्रिय है। रिपोर्ट का आरोप है कि इन संसाधनों से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा ताकतवर लोगों के पास जाता है, जबकि स्थानीय लोगों को प्रदूषण, बीमारियों और पर्यावरण के नुकसान का सामना करना पड़ता है।
जनता पर महंगाई का बोझ, नेताओं के लिए महंगे विमान
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार बार-बार IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए आम जनता पर महंगाई और आर्थिक कटौती का बोझ डालती है। दूसरी तरफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ की सरकार पर 3.8 से 4.2 करोड़ डॉलर की कीमत वाला गल्फस्ट्रीम G500 निजी विमान खरीदने का दावा किया गया है। इस मामले को आम जनता और सत्ता में बैठे लोगों के बीच बढ़ती आर्थिक खाई के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।
करोड़ों लोग गरीबी और भुखमरी से परेशान
रिपोर्ट में UNDP के 2026 ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में करीब 10 करोड़ लोग गंभीर बहुआयामी गरीबी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लगभग 75 लाख लोगों के सामने भुखमरी जैसे हालात हैं। यानी देश का बड़ा हिस्सा दो वक्त की रोटी और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।
इमरान खान जेल में, कई इलाकों में अशांति
पाकिस्तान में के प्रधानमंत्री इमरान खान अदियाला जेल में बंद हैं। वहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और सिंध में हिंसा और विद्रोह की घटनाएं जारी हैं। इसके साथ ही ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान को दुनिया का सबसे ज्यादा आतंकवाद प्रभावित देश बताया गया है।
ये भी पढ़ें:
डेमोक्रेट्स ने रचा इतिहास: भारतीय मूल की प्रिया सुंदरेशन बनीं एरिजोना सीनेट अध्यक्ष, कैसे मारी बाजी?
देश के भविष्य पर गहराते सवाल
इमरान खुर्शीद के मुताबिक, किसी भी देश की व्यवस्था तब तक मजबूत नहीं रह सकती, जब तक वहां के शासक खुद देश छोड़ने के रास्ते तलाशते रहें और आम जनता को सम्मान से जीने की सुविधाएं तक न मिलें। रिपोर्ट ने पाकिस्तान के सामने खड़े आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक संकट की गंभीर तस्वीर पेश की है।