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UNAMA: भारत ने कहा, उम्मीद है अफगानिस्तान की धरती पर आतंकियों को नहीं मिलेगी पनाह, ये बड़ी बातें भी कहीं

Thu, 09 Mar 2023 01:34 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, 'अफगानिस्तान हमारा पड़ोसी है और इनके साथ लंबे समय से साझेदारी रही है। अफगान लोगों के साथ हमारे मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए हम चाहते हैं कि देश में शांति और स्थिरता वापस सुनिश्चित हो। इसमें भारत का भी हित है।'  
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रुचिरा कंबोज - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भारत ने कहा है कि वह उम्मीद करता है कि अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल आतंकियों को आश्रय देने, प्रशिक्षण देने या वित्तीय मदद के लिए नहीं किया जाएगा। यही नहीं आतंकवादी व्यक्तियों और संस्थाओं को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित भी किया जाना चाहिए।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, 'अफगानिस्तान हमारा पड़ोसी है और इनके साथ लंबे समय से साझेदारी रही है। अफगान लोगों के साथ हमारे मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए हम चाहते हैं कि देश में शांति और स्थिरता वापस सुनिश्चित हो। इसमें भारत का भी हित है।'  

अफगानिस्तान को लेकर संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग हुई। इसमें बोलते हुए, रुचिरा कंबोज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक दृष्टिकोण को अगस्त 2021 के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 में व्यक्त किया गया है। जिसे UNSC की भारत की अध्यक्षता में अपनाया गया था।
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उन्होंने कहा, 'संकल्प के अनुसार, हम उम्मीद करते हैं कि अफगानिस्तान की धरती का प्रयोग आतंकवादियों को आश्रय, प्रशिक्षण, या उन्हें वित्तीय मदद देने के लिए नहीं किया जाएगा। खासतौर पर जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।' 

और क्या बोलीं रुचिरा? 
अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में बात करते हुए कंबोज ने कहा कि देश में मानवीय स्थिति “गहरा संकटपूर्ण” है। उन्होंने यूएनएससी को उस मानवीय सहायता के बारे में भी बताया जो भारत ने पिछले एक साल में अफगानिस्तान को प्रदान की है। अफगान लोगों की मानवीय जरूरतों के जवाब में और संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई तत्काल अपील के जवाब में भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता के कई शिपमेंट भेजे हैं। हम आगे बढ़ने वाले अफगान लोगों को हमारी मदद जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में हमने मानवीय सहायता के कई शिपमेंट प्रदान किए हैं, जिसमें 40,000 मीट्रिक टन गेहूं, 65 टन चिकित्सा सहायता और 28 टन अन्य राहत सामग्री शामिल है। हाल ही में हमने लगभग 5000 यूनिट स्टेशनरी आइटम और सर्दियों के कपड़े भी भेजे हैं। रुचिरा ने कहा, 'हम अफगानिस्तान में ड्रग उपयोगकर्ता आबादी के कल्याण और पुनर्वास के लिए यूएनओडीसी के साथ भी साझेदारी कर रहे हैं।' 

महिलाओं की स्थिति काफी खराब
महासचिव (SRSG) के विशेष प्रतिनिधि और UNAMA के प्रमुख ने परिषद को बताया कि तालिबान के आने के बाद अफगानिस्तान महिलाओं की स्थिति काफी खराब हुई है। अफगान महिलाओं और लड़कियों को सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर करने के लिए काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, 'दुनिया के सबसे बड़े मानवीय और आर्थिक संकट झेल रहे देशों में से अफगानिस्तान एक है। यहां देश की आधी आबादी को उनके घरों तक सीमित करना राष्ट्रीय नुकसान करना है। यह न केवल महिलाओं और लड़कियों, बल्कि सभी अफगानों की गरीबी और सहायता-निर्भरता की निंदा करेगा। ऐसा करके अफगानिस्तान खुद को दुनिया से अलग-थलग कर रहा है।'
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