दक्षिण कोरिया के विपक्षी नेता ली जे-म्यांग दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने करीबी प्रतिद्वंद्वी रूढ़िवादी किम मून-सू को हराया है। रूढ़िवादी उम्मीदवार किम मून सू ने राष्ट्रपति चुनाव में हार स्वीकार कर ली है।
मतगणना के दौरान ली ने मतदाताओं को उन पर भरोसा जताने के लिए धन्यवाद दिया। पीपुल्स पावर पार्टी के उम्मीदवार किम ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह "लोगों की पसंद को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं" और अपने उदार प्रतिद्वंद्वी ली जे-म्यांग को चुनाव जीतने के लिए बधाई देते हैं।क्योंकि यून के मार्शल लॉ के बाद कंजर्वेटिव के लिए जनता में निराशा है। वहीं 73 वर्षीय कंजर्वेटिव उम्मीदवार किम मून सो को मतदाताओं का दिल जीतने में संघर्ष करना पड़ रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि देश भर में 14,295 मतदान केंद्रों पर सुबह छह बजे मतदान शुरू हुआ। यह रात आठ बजे बंद हो जाएगा। पर्यवेक्षकों का कहना है कि विजेता आधी रात तक सामने आ सकता है। दोपहर 2 बजे (स्थानीय समयानुसार) तक 1.3 करोड़ से ज्यादा लोग मतदान कर चुके थे। वहीं पिछले हफ्ते दो दिन की शुरुआती वोटिंग अवधि के दौरान वोट देने वाले 1.5 करोड़ लोगों को मिलाकर वोटिंग प्रतिशत 65.5 प्रतिशत रहा है। जबकि दक्षिण कोरिया में 4.4 करोड़ योग्य मतदाता हैं।
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जीतने वाले उम्मीदवार को बुधवार को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी। उसका पांच साल का एक पूर्ण कार्यकाल होगा। नए राष्ट्रपति के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें वामपंथी और दक्षिणपंथी राजनीति के गहराते मतभेद, ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ लगाने का फैसला और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य ताकत से निपटना आदि प्रमुख हैं।
देश के लिए निर्णायक क्षण
यह चुनाव देश के लचीले लोकतंत्र में एक और निर्णायक क्षण है। चुनाव पर्यवेक्षकों को चिंता है कि यून के मार्शल लॉ के बाद घरेलू विभाजन और भी बदतर हो गया है। यह नए राष्ट्रपति पर बड़ा राजनीतिक बोझ बन सकता है।
मार्शल लॉ के खिलाफ कड़ा निर्णय देने का आह्वान
मतदान से पहले फेसबुक पोस्ट में डेमोक्रेटिक पार्टी ने मतदाताओं से मार्शल लॉ के मुद्दे पर कंजर्वेटिव के खिलाफ कठोर निर्णय देने का आह्वान किया। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ली ने कहा कि किम की जीत का मतलब होगा विद्रोही ताकतों की वापसी, लोकतंत्र का विनाश और लोगों के मानवाधिकारों का हनन। उन्होंने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने, असमानता को कम करने और राष्ट्रीय विभाजन को कम करने का भी वादा किया। उन्होंने लोगों से उनके लिए वोट करने की अपील की।
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विरोधियों से बदला लेंगे म्युंग
वहीं 73 वर्षीय कंजर्वेटिव उम्मीदवार किम मून सो ने कहा कि जीत से ली म्युंग को अत्यधिक शक्ति प्राप्त हो जाएगी। वे अपने विरोधियों से राजनीतिक बदला लेंगे। साथ ही विभिन्न कानूनी परेशानियों से बचने के लिए कानून बना सकेंगे, क्योंकि उनकी पार्टी का संसद पर पहले से ही नियंत्रण है। किम ने एक रैली में कहा कि ली अब दक्षिण कोरिया में सारी शक्ति हड़पने और हिटलर जैसी तानाशाही स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।