रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को मॉस्को के रेड स्क्वायर पर सैन्य परेड की अध्यक्षता की। यह परेड दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर मिली जीत की याद में आयोजित की गई थी। इस मौके पर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध में रूस की जीत का पूरा भरोसा जताया। सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजामों के बीच पुतिन के साथ कई विदेशी नेता भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
पुतिन ने अपने भाषण में यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रूसी सेना एक ऐसी आक्रामक ताकत का सामना कर रही है, जिसे पूरे नाटो (NATO) गुट का समर्थन और हथियार मिल रहे हैं। पुतिन ने जोर देकर कहा कि जीत हमेशा रूस की ही हुई है और आगे भी रूस ही जीतेगा। उन्होंने देश की एकता और सैनिकों के साहस को सफलता की कुंजी बताया।
इस साल की परेड में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला। पिछले करीब 20 साल में पहली बार रेड स्क्वायर पर होने वाली परेड में टैंक, मिसाइल या कोई भी भारी हथियार शामिल नहीं किए गए। आसमान में केवल लड़ाकू विमानों ने अपनी ताकत दिखाई। अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन के हमलों के खतरे और मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं।
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इस दौरान कूटनीतिक हलचल भी तेज रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार से सोमवार तक तीन दिनों के संघर्ष विराम और कैदियों की अदला-बदली का एलान किया। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह युद्ध खत्म होने की शुरुआत हो सकती है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक आदेश जारी कर रूस को परेड करने की अनुमति दी और रेड स्क्वायर को हमलों से मुक्त रखने की बात कही। हालांकि, रूस ने जेलेंस्की की इस बात को मजाक बताया।
सुरक्षा के मद्देनजर मॉस्को में मोबाइल इंटरनेट और मैसेजिंग सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई। रूस ने चेतावनी दी कि अगर यूक्रेन ने उत्सव में किसी भी तरह का खलल डाला, तो वह कीव के केंद्र पर बड़ा मिसाइल हमला करेगा। रूस ने वहां के नागरिकों और विदेशी राजनयिकों को तुरंत शहर छोड़ने की सलाह दी। हालांकि, यूरोपीय संघ ने साफ किया कि उनके राजनयिक कीव छोड़कर नहीं जाएंगे।
परेड में मलेशिया के राजा, लाओस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस के राष्ट्रपति शामिल हुए। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने भी पुतिन से मुलाकात की और शहीदों को श्रद्धांजलि दी, लेकिन वह मुख्य परेड से दूर रहे। रूस के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत संघ के 2.7 करोड़ लोग मारे गए थे।
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