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Vivek Ramaswamy: कैसे होता है अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव, कौन हैं इस पद के लिए दावेदारी पेश करने वाले विवेक?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 23 Feb 2023 05:25 PM IST

सार

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम बेहद अहम है। जिसे 270 इलेक्टर्स का समर्थन मिल जाता है, वह अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनता है। भारतीय मूल के उद्यमी विवेक रामास्वामी ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
 
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
भारतीय-अमेरिकी उद्यमी विवेक रामास्वामी ने अमेरिका में 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का एलान किया है। विवेक से पहले अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली भी राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश कर चुकी हैं। विवेक और निक्की हेली दोनों ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी पेश की है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं वो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव मे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से दावेदारी करेंगे।  

आखिर कितने लोग अमेरिका में एक पार्टी से राष्ट्रपति पद के दावेदारी कर सकते हैं? राष्ट्रपति चुने जाने की प्रक्रिया क्या होती है? दावेदारी पेश कर रहे विवेक रामास्वामी कौन हैं? अपने एलान में उन्होंने क्या कहा? आगे उनकी राह कैसी होगी? आइये जानते हैं…
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
भारतीय-अमेरिकी उद्यमी विवेक रामास्वामी ने अमेरिका में 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का एलान किया है। विवेक से पहले अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली भी राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश कर चुकी हैं। विवेक और निक्की हेली दोनों ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी पेश की है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं वो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव मे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से दावेदारी करेंगे।  

आखिर कितने लोग अमेरिका में एक पार्टी से राष्ट्रपति पद के दावेदारी कर सकते हैं? राष्ट्रपति चुने जाने की प्रक्रिया क्या होती है? दावेदारी पेश कर रहे विवेक रामास्वामी कौन हैं? अपने एलान में उन्होंने क्या कहा? आगे उनकी राह कैसी होगी? आइये जानते हैं…

US राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : Social Media
कैसे होता है अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव? 
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव भारत के आम चुनाव से काफी अलग होता है। भारत में पार्टियां आम चुनाव में बहुमत हासिल करने की कोशिश करती हैं। बहुमत वाले दल या गठबंधन के सांसद अपना नेता चुनते हैं। चुना हुआ नेता प्रधानमंत्री बनता है। अमेरिका में ठीक इसके उलट है। यहां की दोनों प्रमुख पार्टियां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन को लेकर भी जनता के बीच जाती हैं। 

दोनों पार्टियों में उम्मीदवार बनने की चाहत रखने वाले लोग हर स्टेट में प्राइमरी और कॉकस इलेक्शन में हिस्सा लेते हैं। प्राइमरी और कॉकस चुनाव में जो जीतता है वह दोनों पार्टियों की ओर से औपचारिक उम्मीदवार बनता है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ के औपचारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद शुरू होती है। बता दें, यहां द्विदलीय व्यवस्था है, भारत की तरह अमेरिका में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है। अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीतने वाले दोनों उम्मीदवार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं। दोनों प्रत्याशी देशभर में अपने एजेंडे के साथ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं।

वोटिंग के छह हफ्ते पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच टीवी पर राष्ट्रपति पद के लिए तीन बार बहस होती है। जो उम्मीदवार सभी राज्यों में सबसे ज्यादा वोट हासिल करता है वह राष्ट्रपति बनता है। अमेरिका के चुनाव में इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम बेहद अहम है। यह लोगों का समूह होता है जो 538 इलेक्टर्स को चुनता है। जिसे 270 इलेक्टर्स का समर्थन मिल जाता है, वह अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनता है।

US राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : iStock
इलेक्टोरल कॉलेज, कॉकस और प्राइमरी, और राष्ट्रीय सम्मेलनों सहित राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया को समझें…
राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया में लगभग दो साल लगते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवारों को बुनियादी शर्तों को पूरा करना चाहिए। यहां राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए नियम के मुताबिक जन्म से अमेरिका का नागरिक होना होता है। उम्र भी कम से कम 35 साल होनी चाहिए और 14 साल से वहां का निवासी होना चाहिए। 
 
प्राइमरी (इसका संचालन नियमित पोलिंग स्टेशन पर होता है) और कॉकस कॉकस (एक तरह की स्थानीय बैठक) दो तरीके हैं जिनसे लोग राज्यों और राजनीतिक दलों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुनने में मदद करते हैं। 
राजनीतिक दल राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के अपने चयन को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करते हैं। हर चार साल में, अमेरिकी नागरिक आम चुनाव के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज तय करता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति कौन चुना जाएगा।

विवेक रामास्वामी - फोटो : SOCIAL MEDIA
राष्ट्रपति पद की दावेदारी करने वाले विवेक कौन हैं?
विवेक रामास्वामी का जन्म 1985 में दक्षिण पश्चिम ओहियो के सिनसिनाटी में हुआ था। उनके पिता वी.जी. रामास्वामी  मूलतः केरल के पलक्कड़ से हैं। केरल के एक स्थानीय कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके पिता वी.जी. रामास्वामी, ओहियो के इवेंडेल में जनरल इलेक्ट्रिक प्लांट में काम करने गए। विवेक की मां सिनसिनाटी में एक मनोचिकित्सक थीं। उनकी पत्नी अपूर्वा तिवारी रामास्वामी ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में डॉक्टर हैं। 

सिनसिनाटी के सेंट जेवियर हाई स्कूल से रामास्वामी ने अपनी आरंभिक शिक्षा ली। उच्च शिक्षा के लिए वह हार्वर्ड और येल लॉ स्कूल गए। रामास्वामी ने हार्वर्ड में स्नातक की डिग्री येल में कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने कॉलेज में जीव विज्ञान का अध्ययन किया। 

 विवेक रामास्वामी बायोटेक कारोबार में जाना-माना चेहरा हैं। रामास्वामी दवाओं को विकसित करने के लिए बायोटेक कंपनी रोइवेंट साइंसेज चलाते हैं। उन्होंने 2016 की सबसे बड़ी जैव प्रौद्योगिकी फर्म मायोवैंट साइंसेज की स्थापना की थी। अप्रैल में कंपनी बनाने के बाद उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर की दवा और महिला बांझपन की दवा के लिए टाकेडा फार्मास्युटिकल्स के साथ एक सौदा किया था।
 
वह बायोफार्मा स्पेस में कई अन्य कंपनियों के संस्थापक भी हैं, जिनमें मायोवैंट साइंसेज, यूरोवेंट साइंसेज, एंजीवेंट थेराप्यूटिक्स, अल्टावेंट साइंसेज और स्पिरोवैंट साइंसेज शामिल हैं। 37 वर्षीय दूसरी पीढ़ी के भारतीय अमेरिकी ने कम ही समय में बायोटेक क्षेत्र में उनका नाम हो गया। 2015 में फोब्स पत्रिका के कवर पर उन्हें फीचर किया गया। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, 2014 में 30 से कम उम्र वाले सबसे अमीर उद्यमियों में विवेक 30वें स्थान पर थे। वहीं 2016 में 40 से कम उम्र वाले 24वें सबसे अमीर उद्यमी थे।

विवेक रामास्वामी - फोटो : SOCIAL MEDIA
अपनी दावेदारी पर क्या बोले विवेक
विवेक अमेरिका में 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए दावेदारी पेश करने वाले दूसरे भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। उन्होने राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी के लिए धन जुटाने के लिए एक राजनीतिक कार्रवाई समिति की स्थापना की है। वह अमेरिकी राज्य आइओवा में अपनी उम्मीदवारी के प्रचार को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। रामास्वामी का कहना है कि वह विचार आधारित कैंपेन शुरू करने पर फोकस कर रहे हैं।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक शॉर्ट वीडियो जारी कर उन्होंने कहा, हमने अपनी 'विविधता' का इतना जश्न मनाया है कि हम सभी तरीकों को भूल गए हैं कि हम वास्तव में अमेरिकियों की तरह हैं, उन आदर्शों से बंधे हैं जो 250 साल पहले लोगों के एक विभाजित, अड़ियल समूह को एकजुट करते थे। मुझे खुद पर विश्वास है कि वे आदर्श अभी भी मौजूद हैं। मैं उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रपति पद की दौड़ में हूं।

निक्की हेली
विवेक से पहले भारतवंशी निक्की हेली भी पेश कर चुकी हैं दावेदारी 
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। उन्होंने घोषणा की कि वह रिपब्लिकन पार्टी के नामांकन के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। निक्की हेली ने बीते बुधवार को दक्षिण कैरोलिना के चार्ल्सटन में एक भाषण के दौरान अपने चुनाव अभियान की योजना पेश की। वह पार्टी के अंदर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। भारतीय मूल की अमेरिकी नेता हेली (51 वर्षीय) दो बार साउथ कैरोलिना राज्य की गवर्नर रह चुकी हैं। इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत भी रही हैं। हेली रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ खड़ी होने वालीं पहली दावेदार थीं।
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