अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी के प्रभारी और उद्यमी से नेता बने विवेक रामास्वामी ने अमेरिका में संघीय सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर कटौती के संकेत दिए हैं। बता दें कि एलन मस्क के साथ विवेक रामास्वामी को डीओजीई का प्रभारी बनाया गया है।
उद्यमी से नेता बने विवेक रामास्वामी, जिन्हें टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के साथ 'डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी' (डीओजीई) का प्रभारी बनाया गया है, ने अमेरिका में संघीय सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर कटौती के संकेत दिए हैं।
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विवेक रामास्वामी ने बताई सरकार की योजना
विवेक रामास्वामी ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में एक कार्यक्रम में कहा, एलन मस्क और मैं लाखों अप्रयुक्त सरकारी कर्मचारियों को वॉशिंगटन डीसी की नौकरशाही से हटाने की स्थिति में हैं। इसी तरह हम इस देश को बचाने जा रहे हैं। उन्होंने एलन मस्क की कार्यशैली पर कहा, अगर आप एलन को जानते हैं, तो आप जानते होंगे कि वह छेनी लेकर नहीं आते, वह आरी लेकर आते हैं। हम इस नौकरशाही को हटाने जा रहे हैं, और यह काफी मजेदार होगा।
अमेरिका के अच्छे दिन अभी बाकी हैं- रामास्वामी
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में हमें यह महसूस कराया गया है कि अमेरिका एक गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जैसे प्राचीन रोम साम्राज्य के आखिरी दिन। लेकिन वह मानते हैं कि अमेरिका के अच्छे दिन अभी बाकी हैं। उन्होंने कहा, हम एक ऐसे देश का निर्माण करेंगे, जहां हमारे बच्चे यह महसूस करेंगे कि मेहनत, प्रतिबद्धता और लगन से ही सफलता मिलेगी। यहां हर किसी को अपनी बात कहने की आजादी होगी और सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को उनकी योग्यता के आधार पर काम मिलेगा, रंग या पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं।
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हर हफ्ते एक लाइव स्ट्रीम करेंगे मस्क और रामास्वामी
एलन मस्क और विवेक रामास्वामी ने यह भी घोषणा की कि वे हर हफ्ते एक लाइव स्ट्रीम करेंगे, जिसे 'डोजकास्ट' कहा जाएगा, ताकि जनता को उनके विभाग की प्रगति के बारे में जानकारी मिल सके। विवेक रामास्वामी ने कहा, डीओजीई का उद्देश्य सरकार के आकार को छोटा करना और इसे पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही के कारण नवाचार कम होता है और लागत बढ़ती है। जैसे, एफडीए और एनआरसी जैसी एजेंसियां अपने फैसलों से नई खोजों को बाधित करती हैं और विकास में रुकावट डालती हैं। रामास्वामी ने इस अभियान को 'आधुनिक मैनहट्टन प्रोजेक्ट की तरह बताया। उनका कहना है कि सरकार की नौकरशाही देश को पीछे कर रही है और इसे सुधारने से पैसे की बचत और आत्मनिर्भरता लौटाई जा सकती है।