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वेनेजुएला चुनाव: कल आएंगे नतीजे, इस बार पूरी होगी अमेरिकी मंशा?

Sun, 06 Dec 2020 08:20 PM IST
मुकेश कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कराकस
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जुआन गुईदो, विपक्षी नेता
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वेनेजुएला में आज हो रहे संसदीय चुनाव के नतीजों का पूरे लैटिन अमेरिका में बेसब्री से इंतजार है। भारतीय समय के अनुसार सोमवार सुबह साढ़े चार बजे मतदान खत्म होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। इस चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति उगो चावेज की विचारधारा दांव पर लगी है।

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चावेज के उत्तराधिकारी और मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा है कि चुनाव नतीजे चाहे जैसे भी आएं, वे उन्हें स्वीकार कर लेंगे। मादुरो अमेरिका के लगातार विरोध और तख्ता पलट की कई कोशिशों के बावजूद सत्ता में बने रहे हैं। संसदीय चुनाव में अगर मादुरो की पार्टी हार गई, तो उससे उनके तुरंत राष्ट्रपति पद से हटने की संवैधानिक मजबूरी तो नहीं बनेगी, लेकिन वे राजनीतिक रूप से काफी कमजोर हो जाएंगे।

1998 में चावेज के सत्ता में आने के बाद से अमेरिकी खेमे ने वेनेजुएला की घेराबंदी कर रखी है। लेकिन पिछले 22 साल से चावेज या उनके समर्थक सत्ता में बने रहे हैं। पांच साल पहले मादुरो की पार्टी- पीएसयूवी संसदीय चुनाव में हार गई थी, लेकिन बाद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो फिर विजयी रहे। अमेरिका का तब से आरोप रहा है कि मादुरो चुनावी धांधली से जीते।
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इस पर कटाक्ष करते हुए मादुरो ने बीते शुक्रवार को कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका की तरह मतदान के कई दिन बाद चुनाव नतीजे नहीं आते। ये नतीजे मतदान के तुरंत बाद आएंगे और जो भी जनादेश होगा, उसे वे मंजूर कर लेंगे। उनका इशारा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की तरफ था, जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के एक महीना से अभी अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक अपनी हार नहीं मानी है।         

वेनेजुएला में इस बार दो वामपंथी गुट और तीन दक्षिणपंथी गुट चुनाव मैदान में हैं। चावेज के सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है, जब वामपंथी खेमा बंट गया है। इसलिए राष्ट्रपति मादुरो की पार्टी की स्थिति कमजोर बताई जा रही है। इस चुनाव में दो करोड़ 70 लाख मतदाता संसद के 277 सदस्यों का चुनाव करेंगे। वेनेजुएला में प्रत्यक्ष और आनुपातिक निर्वाचन की मिली-जुली चुनाव प्रणाली है।

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इस बार 48 सदस्य पहली बार लागू हुए राष्ट्रीय सूची सिस्टम से और 96 सदस्य क्षेत्रीय सूची से चुने जाएंगे। 130 सदस्य सीधे चुनाव क्षेत्रों से निर्वाचित होंगे। तीन सीटें मूलवासी समुदायों के लिए आरक्षित रखी गई हैँ। नई संसद का पांच साल का कार्यकाल अगले पांच जनवरी से शुरू होगा। वेनेजुएला में मतदान टच स्क्रीन वोटिंग मशीन से होता है, जिसमें पेपर ट्रेल के जरिए रिकॉर्ड भी रखा जाता है।

चुनाव की निष्पक्षता की पुष्टि करने के लिए वेनेजुएला ने कई पर्यवेक्षक दल बुलाए हैं। संयुक्त राष्ट्र, अफ्रीकन यूनियन, कैरीकॉम, काउंसिल ऑफ लैटिन अमेरिकन इलेक्ट्रॉल एक्सपर्ट्स आदि से पर्यवेक्षक चुनावों पर नजर रख रहे हैं। लेकिन यूरोपियन यूनियन ने अपना दल भेजने से इनकार कर दिया, क्योंकि वेनेजुएला ने कोरोना महामारी के बीच चुनाव ना कराने की उसकी मांग नहीं मानी।

 2015 में हुए चुनाव में पीएसयूवी और उसके सहयोगी दल 55 सीटें ही जीत पाए थे। तब संसद में सिर्फ 166 सदस्य थे। 109 सीटें दक्षिणपंथी गठबंधन ने जीती थी। इस बार पीएसयूवी का गठबंधन दो भागों में बंट गया है। लेकिन एक बड़े दक्षिणपंथी गुट ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। इसलिए नतीजों को लेकर अनिश्चय बना हुआ है।

चुनाव पर्यवेक्षकों के मुताबिक निगाहें असल में यह देखने पर टिकी हैं कि मादुरो विरोधी पार्टियों को कितने बड़े अंतर से जीत मिलती है। एक बड़े दक्षिणपंथी गुट के चुनाव में भाग ना लेने के कारण अनुमान है कि शायद इस बार दक्षिणपंथी पार्टियों की जीत का अंतर पांच साल पहले की तुलना में कम रहे। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति मादुरो के लिए मौजूद जन समर्थन का अंदाजा इस चुनाव से लगेगा। उसी पर वेनेजुएला में चाविस्मो यानी चावेज की विचारधारा का भविष्य निर्भर करेगा। 

 
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