इस बार 48 सदस्य पहली बार लागू हुए राष्ट्रीय सूची सिस्टम से और 96 सदस्य क्षेत्रीय सूची से चुने जाएंगे। 130 सदस्य सीधे चुनाव क्षेत्रों से निर्वाचित होंगे। तीन सीटें मूलवासी समुदायों के लिए आरक्षित रखी गई हैँ। नई संसद का पांच साल का कार्यकाल अगले पांच जनवरी से शुरू होगा। वेनेजुएला में मतदान टच स्क्रीन वोटिंग मशीन से होता है, जिसमें पेपर ट्रेल के जरिए रिकॉर्ड भी रखा जाता है।
चुनाव की निष्पक्षता की पुष्टि करने के लिए वेनेजुएला ने कई पर्यवेक्षक दल बुलाए हैं। संयुक्त राष्ट्र, अफ्रीकन यूनियन, कैरीकॉम, काउंसिल ऑफ लैटिन अमेरिकन इलेक्ट्रॉल एक्सपर्ट्स आदि से पर्यवेक्षक चुनावों पर नजर रख रहे हैं। लेकिन यूरोपियन यूनियन ने अपना दल भेजने से इनकार कर दिया, क्योंकि वेनेजुएला ने कोरोना महामारी के बीच चुनाव ना कराने की उसकी मांग नहीं मानी।
2015 में हुए चुनाव में पीएसयूवी और उसके सहयोगी दल 55 सीटें ही जीत पाए थे। तब संसद में सिर्फ 166 सदस्य थे। 109 सीटें दक्षिणपंथी गठबंधन ने जीती थी। इस बार पीएसयूवी का गठबंधन दो भागों में बंट गया है। लेकिन एक बड़े दक्षिणपंथी गुट ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। इसलिए नतीजों को लेकर अनिश्चय बना हुआ है।
चुनाव पर्यवेक्षकों के मुताबिक निगाहें असल में यह देखने पर टिकी हैं कि मादुरो विरोधी पार्टियों को कितने बड़े अंतर से जीत मिलती है। एक बड़े दक्षिणपंथी गुट के चुनाव में भाग ना लेने के कारण अनुमान है कि शायद इस बार दक्षिणपंथी पार्टियों की जीत का अंतर पांच साल पहले की तुलना में कम रहे। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति मादुरो के लिए मौजूद जन समर्थन का अंदाजा इस चुनाव से लगेगा। उसी पर वेनेजुएला में चाविस्मो यानी चावेज की विचारधारा का भविष्य निर्भर करेगा।