दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें उसे उन अधिकारियों के चुनाव न कराने के लिए कहा गया था, जो पड़ोसी गुयाना में संसाधन-समृद्ध क्षेत्र की देखरेख करेंगे। इस विवादित क्षेत्र पर दोनों देश अपना दावा करते हैं।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार ने एक बयान में कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को मान्यता नहीं देती। सरकार ने जोर देकर कर कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून निकाय को वेनेजुएला में होने वाले चुनावों में हस्तक्षेप या निषेध करने का प्रयास करने की अनुमति नहीं देती है।
गुयाना ने वेनेजुएला पर चुनाव की योजना बनाने का आरोप लगाया था
वेनेजुएला की सरकार का यह बयान हेग स्थित न्यायालय द्वारा गुयाना की अपील पर फैसला जारी करने के एक दिन बाद दिया है। गुयाना ने वेनेजुएला पर एस्सेकिबो क्षेत्र को प्रशासित करने के लिए 25 मई को एक गवर्नर और अन्य अधिकारियों के लिए चुनाव कराने की योजना बनाने का आरोप लगाया था और कहा था कि यह अदालत के पहले के आदेश का उल्लंघन है।
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वेनेजुएला ने कहा- एस्सेकिबो हमारे क्षेत्र का हिस्सा
वेनेजुएला ने कहा कि यह इलाका उसका ही हिस्सा है और वह इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में छोड़ने वाला नहीं है। बयान के अनुसार, 'एस्सेकिबो वेनेजुएला का एक अविभाज्य हिस्सा है और हमारे मुक्तिदाताओं की विरासत है। इसका बचाव ऐतिहासिक, सांविधानिक और नैतिक जनादेश है जो पूरे बोलिवेरियन होमलैंड को एकजुट करता है। कोई भी अंतरराष्ट्रीय दबाव, न्यायिक ब्लैकमेल या विदेशी न्यायाधिकरण हमें इस दृढ़ विश्वास से पीछे नहीं हटा पाएगा।'
समुद्र में मौजूद तेल भंडार के पास है एस्सेकिबो क्षेत्र
विवादित क्षेत्र गुयाना के लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और सोने, हीरे, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यह समुद्र में मौजूद तेल भंडार के पास है, जहां वर्तमान में तेल उत्पादन औसतन लगभग 650,000 बैरल प्रतिदिन है। वेनेजुएला का कहना है कि एस्सेकिबो उसके औपनिवेशिक काल की सीमा में आता था और वह 1899 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों द्वारा तय की गई सीमा को नहीं मानता, जब गुयाना ब्रिटेन का उपनिवेश था।
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अभी भी अदालत में चल रहा विवादित क्षेत्र का मामला
2018 में, गुयाना ने इस विवाद को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख किया और यह निर्णय लेने के लिए कहा कि 1899 का सीमा निर्णय वैध और बाध्यकारी है। वहीं, वेनेजुएला का तर्क है कि 1966 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते से पुराना फैसला रद्द हो गया। यह मामला अभी अदालत में चल रहा है और दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
आपातकालीन शिखर सम्मेलन में बल प्रयोग न करने पर सहमत हुए दोनों देश
2023 के अंत में, वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया और बाद में क्षेत्र पर कब्जा करने की धमकी दी और कहा कि क्या एस्सेकिबो को वेनेजुएला राज्य में बदल दिया जाना चाहिए। हालांकि, कुछ दिनों बाद कैरेबियाई नेताओं ने ब्राजील और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन आयोजित किया। जहां दोनों देशों ने तय किया कि वह बल प्रयोग नहीं करेंगे।
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