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Pope: नए पोप के चुनाव की तैयारी तेज, सिस्टीन चैपल में लगी चिमनी, धुएं से मिलेगा नियुक्ति का संकेत; समझिए कैसे?

Fri, 02 May 2025 01:23 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन

सार

दुनियाभर की निगाहें इन दिनों वेटिकन पर है। कारण है कि पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के बाद नए पोप के चुनाव की तैयारी तेज हो गई है, जिसके लिए वेटिकन में सिस्टीन चैपल की छत पर एक खास चिमनी भी लगाई जा चुकी है। आइए जानते है कि नए पोप के चुनाव में चिमनी की क्या भूमिका होती है....
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वेटिकन - फोटो : Instagram
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विस्तार
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पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के बाद नए पोप को चुनने के लिए 7 मई को होने वाले सम्मेलन (कॉन्क्लेव) की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके लिए शुक्रवार को वेटिकन में सिस्टीन चैपल की छत पर एक खास चिमनी लगाई गई, जो नए पोप के चुनाव की घोषणा का संकेत देगी। मीडिया रिपोर्ट की माने तो वेटिकन के फायर ब्रिगेड कर्मियों को यह चिमनी लगाते हुए देखा गया। यह प्रक्रिया कॉन्क्लेव की तैयारियों का अहम हिस्सा मानी जाती है।

क्या है नए पोप के चुनाव की प्रक्रिया, समझिए

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नए पोप के चुनाव के लिए वेटिकन में मौजूद सभी कार्डिनल एक बंद कमरे यानी सिस्टीन चैपल में बैठकर वोटिंग करेंगे। हर दिन दो बार वोटिंग होती है, एक बार सुबह और एक बार दोपहर में। जब सभी कार्डिनल वोट डाल लेते हैं, तो उन बैलेट पेपर (मतपत्रों) को एक विशेष भट्टी में जलाया जाता है।

ये भी पढ़ें:- New Pope: नए पोप के लिए तीन अश्वेतों के नाम पर भी हो रही चर्चा, वेटिकन के इतिहास में पहली बार हो सकता है ऐसा
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चिमनी ले निकलने वाला धुंवा देता है संकेत
वोटिंग के दौरान चिमनी से निकलने वाले धुआं की भूमिका जनता की जानकारी के लिए अहम होती है। इस बात को ऐसे समझिए कि अगर चिमनी से काला धुआं निकलता है, तो इसका मतलब होता है कि अभी किसी को भी पोप नहीं चुना गया है। इसके लिए वोटों के साथ कुछ रसायन मिलाए जाते हैं जैसे, पोटेशियम परक्लोरेट, एंथ्रासीन और सल्फर। वहीं अगर चिमनी से सफेद धुआं निकलता है, तो इसका मतलब होता है कि नया पोप चुन लिया गया है। तब वोटों के साथ पोटेशियम क्लोरेट, लैक्टोज और क्लोरोफॉर्म रेजिन मिलाकर जलाया जाता है।

क्यों खास है यह प्रक्रिया?
यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होती है। जब तक नया पोप नहीं चुन लिया जाता, तब तक दुनिया को सिर्फ इसी चिमनी से निकलने वाले धुएं से जानकारी मिलती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और वेटिकन की पहचान का हिस्सा बन चुकी है।
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तीन अश्वेतों के नाम पर हो रहा विचार
पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के बाद कई कैथोलिक नेता इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या चर्च को इस बार अपना पहला अश्वेत पोप चुनना चाहिए। ऐसे में तीन अफ्रीकी कार्डिनलों के नाम पर गंभीर विचार हो रहा है। यदिअगला पोप उप-सहारा अफ्रीका से हुआ तो वह वेटिकन के इतिहास में पहला होगा। हालांकि, यह चयन प्रक्रिया लंबी है, लेकिन कैथोलिक अफ्रीकियों को उम्मीद है कि फ्रांसिस का उत्तराधिकारी उनके महाद्वीप से एक अश्वेत कार्डिनल हो सकता है।

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