मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि जिन राज्यों में टीकाकरण की दर कम है, वहां नए संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की औसत संख्या उन राज्यों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है, जहां टीकाकरण की दर ऊंची है। निम्न टीकाकरण वाले राज्यों में कोरोना संक्रमण के कारण हो रही मौतों की संख्या भी ज्यादा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि महामारी टीका ना लगवाने लोगों की वजह से लौट कर आई है। उन्होंने कहा- ‘टीका ना लगवा कर आप खुद को जितना बुद्धिमान दिखाना चाहते हैं, आप असल में उसके कहीं करीब भी नहीं हैं।’
अमेरिकी में आम लोगों से ऐसी बातचीत छपी है, जिसमें उन्होंने टीका विरोधियों पर अपने गुस्से का इजहार किया। इन लोगों ने कहा है कि अब उन्हें भी कुछ दूसरे लोगों के गैर-जिम्मेदाराना नजरिए की कीमत चुकानी पड़ रही है। कई विशेषज्ञों ने भी कहा है कि उन्हें उन लोगों के बारे में सोच कर गुस्सा आता है, जिनकी वजह से फिर से मास्क पहनना जरूरी हो गया है।
मनोवैज्ञानिकों की संस्था- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मुख्य विज्ञान अधिकारी मिच प्रिंस्टीन ने सीएनएन से कहा- ‘अगर किसी ने आंख पर पट्टी बांध रखी हो, तो उसे गिरने से बचाना मुश्किल है। आप जानते हैं कि असंतोष, चिंता, अनिश्चिय आदि के माहौल में गुस्सा पैदा होता है। (टीका के मामले में) विचारधारा संबंधी गंभीर खाई भी है। ये सारे पहलू हकीकत बन गए हैं। अब ये बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं।’