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US: ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा चयन प्रक्रिया बदली, अब ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन वालों को मिलेगी प्राथमिकता

Tue, 23 Dec 2025 11:38 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।

सार

US: अमेरिका ने एच-1बी वीजा चयन की रैंडम लॉटरी प्रणाली खत्म कर ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जिसका असर भारतीय आईटी और तकनीकी कर्मचारियों पर पड़ेगा। गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार नया नियम 27 फरवरी 2026 से लागू होगा।
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H-1B Visa - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वीजा जारी करने के लिए अब तक लागू रैंडम लॉटरी प्रणाली को खत्म कर दिया है। इसकी जगह ऐसी नई प्रणाली लाई जा रही है, जिसमें ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले का सीधा असर भारतीय आटी और तकनीकी पेशेवरों पर पड़ने की संभावना है,जो बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं। 
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गृह सुरक्षा विभाग ने बताया कि एच-1बी वर्क वीजा से जुड़े नियमों में संशोधन किया जा रहा है, ताकि अमेरिकी कामगारों की मजदूरी, काम की शर्तों और रोजगार के अवसरों की सुरक्षा की जा सके। 27 फरवरी 2026 से नया नियम लागू होगा और वित्त वर्ष 2027 तक एच-1बी पंजीकरण होगा, उसी में यह नई चयन प्रणाली इस्तेमाल की जाएगी। 

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नए प्रावधानों के तहत अब वीजा चयन पूरी तरह रैंडम नहीं होगा। इसके बजाय एक 'वेटेड प्रणाली' अपनाई जाएगा, जिसमें उच्च कौशल और उच्च वेतन वाले आवेदकों को वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पुरानी लॉटरी प्रणाली का कई कंपनियां दुरुपयोगकर रही थीं और कम वेतन पर विदेशी कामगार लाए जा रहे थे। 

नए प्रावधानों के तहत अब वीजा चयन पूरी तरह रैंडम नहीं होगा। इसके बजाय एक 'वेटेड प्रणाली' अपनाई जाएगी, जिसमें उच्च कौशल और उच्च वेतन वाले आवेदकों को वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पुरानी लॉटरी प्रणाली का कई कंपनियां दुरुपयोग कर रही थीं और कम वेतन पर विदेशी कामगार लाए जा रहे थे।

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाएं (यूएससीआईएस) के मुताबिक, नई प्रणाली से एच-1बी वीजा कार्यक्रम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे अमेरिकी नियोक्ता ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन वाले विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धा की क्षमता मजबूत होगी।

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सरकार पहले ही एच-1बी वीजा को लेकर कई सख्त कदम उठा चुकी है। हाल ही में नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा 15 दिसंबर से एच-1बी और एच-4 वीजा आवेदकों की जांच प्रक्रिया भी कड़ी कर दी गई है, जिसमें सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच शामिल है। 
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इन सख्त नियमों का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। कई एच-1बी वीजा इंटरव्यू टल गए हैं, जिससे वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत आए कई लोग महीनों से फंसे हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वीजा एक सुविधा है, अधिकार नहीं और राष्ट्रीय सुरक्षा व सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर हर आवेदन की गहन जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि हर साल 65 हजार एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए 20 हजार अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है। नए नियमों के लागू होने के बाद -1बी वीजा पाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद है।

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