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कमला हैरिस की यात्रा से और स्पष्ट होगी अमेरिका की दक्षिण-पूर्व एशिया नीति

Thu, 12 Aug 2021 07:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर

सार

जो बाइडन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद अब तक जो संकेत मिले हैं, उससे साफ है कि अमेरिका की प्राथमिकता चीन के बढ़ रहे प्रभाव को रोकना है। इसके लिए वह दक्षिण चीन सागर में कथित मुक्त नौवहन को सुनिश्चित करना चाहता है...
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कमला हैरिस - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की इस महीने होने वाली दक्षिण-पूर्व एशिया देशों की यात्रा से जो बाइडन प्रशासन की दक्षिण-पूर्वी एशिया नीति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद की जा रही है। हैरिस की यात्रा के पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन दो बार दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत कर चुके हैं। इसके पहले बीती जुलाई में अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस की यात्रा की थी।

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जो बाइडन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद अब तक जो संकेत मिले हैं, उससे साफ है कि अमेरिका की प्राथमिकता चीन के बढ़ रहे प्रभाव को रोकना है। इसके लिए वह दक्षिण चीन सागर में कथित मुक्त नौवहन को सुनिश्चित करना चाहता है। अमेरिका अपने इस मकसद के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आसियान देशों का साथ प्राप्त करने की कोशिश में है। आसियान के सदस्य कई देशों के अधिकारियों ने अब संतोष जताया है कि अब आखिरकार अमेरिका ने उन्हें भी अहमियत देनी शुरू की है। शुरुआत में बाइडन प्रशासन का पूरा ध्यान जापान, दक्षिण कोरिया और भारत पर टिका हुआ था।

लेकिन कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि पूरा आसियान फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता नहीं है। ये बात समझी भी जा सकती है। अमेरिका का इस समय मुख्य मकसद चीन को रोकना है। इसमें वह कुछ आसियान देशों की ज्यादा भूमिका नहीं समझता। आसियान दस देशों का समूह है। उन देशों की नीतियों में फर्क है।

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लॉयड ऑस्टिन के पिछले यात्रा कार्यक्रम से इंडोनेशिया और थाईलैंड नाराज हो गए थे। इंडोनेशिया के अखबार जकार्ता पोस्ट के संपादक एम तौफिकुर्रहमान ने एक टिप्पणी में लिखा- ‘जब ये पता चला कि ऑस्टिन सिर्फ सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस की यात्रा करेंगे, तो जकार्ता के सत्ता गलियारों में बहुत साफ नाराजगी देखी गई।’

पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब इंडोनेशिया और कुछ अन्य देशों में ऐसी नाराजगी और बढ़ सकती है। उप राष्ट्रपति कमला हैरिस सिर्फ सिंगापुर और वियतनाम जाएंगी। इससे बाइडन प्रशासन ये संकेत दे रहा है कि उसकी नजर में इन देशों का रणनीतिक महत्व ज्यादा है। ऑस्टिन की यात्रा के बाद थाईलैंड के अखबार बैंकाक पोस्ट में चुलालोंगकॉम यूनिवर्सिटी में सीनियर फेलॉ कवि चोंगकित्तवर्न ने लिखा था- ‘इससे अमेरिका ने अपनी असल सोच दिखा दी कि थाईलैंड उसके रडार से बाहर है।’

जानकारों के मुताबिक जिन तीन देशों की यात्रा अमेरिकी अधिकारी कर रहे हैं, सचमुच अमेरिका के नजरिए से उनका रणनीतिक महत्व ज्यादा है। सिंगापुर अमेरिका के सातवें बेड़े के लिए एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। ये बेड़ा अमरिकी विमानों और जहाजों को साजो-सामान उपलब्ध कराने में खास भूमिका निभाता है। चीन का मुकाबला करने के नजरिए से वियतनाम और फिलीपींस महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण चीन सागर में दोनों के क्षेत्र संबंधी दावे हैं।

जबकि अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल के वर्षों में इंडोनेशिया, थाईलैंड और कंबोडिया चीन समर्थक हो गए हैं। इसलिए अमेरिकी नेता वहां की यात्रा में अपना समय नहीं लगाना चाहते। संभावना जताई जा रही है कि कमला हैरिस की अगली यात्रा से इस अमेरिकी आकलन की और पुष्टि होगी। 
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