लॉयड ऑस्टिन के पिछले यात्रा कार्यक्रम से इंडोनेशिया और थाईलैंड नाराज हो गए थे। इंडोनेशिया के अखबार जकार्ता पोस्ट के संपादक एम तौफिकुर्रहमान ने एक टिप्पणी में लिखा- ‘जब ये पता चला कि ऑस्टिन सिर्फ सिंगापुर, वियतनाम और फिलीपींस की यात्रा करेंगे, तो जकार्ता के सत्ता गलियारों में बहुत साफ नाराजगी देखी गई।’
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब इंडोनेशिया और कुछ अन्य देशों में ऐसी नाराजगी और बढ़ सकती है। उप राष्ट्रपति कमला हैरिस सिर्फ सिंगापुर और वियतनाम जाएंगी। इससे बाइडन प्रशासन ये संकेत दे रहा है कि उसकी नजर में इन देशों का रणनीतिक महत्व ज्यादा है। ऑस्टिन की यात्रा के बाद थाईलैंड के अखबार बैंकाक पोस्ट में चुलालोंगकॉम यूनिवर्सिटी में सीनियर फेलॉ कवि चोंगकित्तवर्न ने लिखा था- ‘इससे अमेरिका ने अपनी असल सोच दिखा दी कि थाईलैंड उसके रडार से बाहर है।’
जानकारों के मुताबिक जिन तीन देशों की यात्रा अमेरिकी अधिकारी कर रहे हैं, सचमुच अमेरिका के नजरिए से उनका रणनीतिक महत्व ज्यादा है। सिंगापुर अमेरिका के सातवें बेड़े के लिए एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। ये बेड़ा अमरिकी विमानों और जहाजों को साजो-सामान उपलब्ध कराने में खास भूमिका निभाता है। चीन का मुकाबला करने के नजरिए से वियतनाम और फिलीपींस महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण चीन सागर में दोनों के क्षेत्र संबंधी दावे हैं।
जबकि अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल के वर्षों में इंडोनेशिया, थाईलैंड और कंबोडिया चीन समर्थक हो गए हैं। इसलिए अमेरिकी नेता वहां की यात्रा में अपना समय नहीं लगाना चाहते। संभावना जताई जा रही है कि कमला हैरिस की अगली यात्रा से इस अमेरिकी आकलन की और पुष्टि होगी।