अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है, जिसमें 18वीं सदी के युद्धकालीन कानून का इस्तेमाल कर वेनेजुएला के लोगों को जल्द से जल्द निर्वासित किए जाने का निर्णय लिया गया था।
दो असहमतिपूर्ण मतों के बावजूद, न्यायाधीशों ने वेनेजुएला के उन लोगों के पक्ष में फैसला दिया, जिन पर गिरोह का सदस्य होने का आरोप लगाया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये लोग 1798 के एलियन एनिमी एक्ट के तहत अमेरिका से से जल्द से जल्द निकाले जाने के योग्य हैं। हालांकि, अदालत ने एलियन एनिमीज कानून के तहत उत्तरी टेक्सास के एक हिरासत केंद्र से निर्वासन पर प्रतिबंध को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया। अब ये मामला 5वें यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में वापस जाएगा। निचली अदालत ने अप्रैल में इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
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अदालत के फैसले पर ट्रंप ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जताई। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट हमें अपराधियों को देश से बाहर निकालने की इजाजत नहीं देगा!' सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की उन न्यायिक असफलताओं में नई है, जिसमें प्रशासन ने देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों को तेजी से निर्वासित करने का प्रयास किया है। हालांकि, अदालतों ने बार-बार ट्रंप प्रशासन के इन प्रयासों पर रोक लगाई है। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि ऐसे लोगों को कानून की प्रक्रिया में ज्यादा अधिकार मिल रहे हैं।
पिछले महीने भी अदालत ने लगाई थी अस्थायी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने भी निर्वासन पर अस्थायी रोक लगाई थी। अदालत ने शुक्रवार को इस रोक को और आगे बढ़ा दिया। न्यायालय ने कहा कि अधिकारी 'तुरंत निष्कासन करने के लिए तैयार हैं।' अदालत ने कहा है कि इन लोगों को निर्वासित करने से पहले इन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।
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कई अदालतों में चल रहे निर्वासन कानून से संबंधित मामले
दरअसल, पुराने निर्वासन कानून से संबंधित कई मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। ट्रंप ने मार्च में वेनेजुएला के ट्रेन डी अरागुआ गिरोह को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके आधार पर लोगों को निर्वासित करने के लिए 1798 कानून को लागू करके निकालना शुरू किया, लेकिन कई अदालतों ने इसे गलत बताया और कहा कि कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, अदालतों में अभी इस बात पर बहस हो रही है कि क्या ट्रंप सरकार को यह कानून इस्तेमाल करने का अधिकार है। अब सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि चाहे सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी हो, फिर भी संविधान का पालन करना जरूरी है।
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